सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर द्वारा 9 जनवरी को जारी रिपोर्ट ‘ट्रेसिंग द हेजी एयर 2026’ में देश की हवा को लेकर डरावनी तस्वीर दिखाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एन-कैप) प्रदूषण रोकने में विफल रहा है। राजस्थान देशभर में दूसरा सबसे प्रदूषित राज्य है। यहां 158 शहरों में मानक से अधिक प्रदूषण है। उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है। रिपोर्ट मे देश के 4041 शहरों में पीएम2.5 स्तरों का मूल्यांकन किया। 1787 शहर (44%) पांच सालों (2019-2024, कोविड प्रभावित 2020 को छोड़कर) से पीएम 2.5 मानकों का पालन करने में विफल रहे हैं, लेकिन सरकार का स्वच्छ वायु कार्यक्रम इनमें से केवल 67 प्रदूषित शहरों को ही कवर करता है। इसका मतलब है कि 96% प्रदूषित शहरों के पास हवा साफ करने का कोई ठोस एक्शन प्लान ही नहीं है। भिवाड़ी की स्थिति: पीएम 2.5 में 7वां व पीएम 10 में 9वां सबसे प्रदूषित शहर
राजस्थान के औद्योगिक हब भिवाड़ी और अलवर के लिए रिपोर्ट के आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं। भिवाड़ी पीएम 2.5 प्रदूषण के मामले में देश का 7वां सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, पीएम 10 के स्तर में भिवाड़ी देश में 9वें पायदान पर है। यह स्थिति तब है जब राजस्थान सरकार ने आवंटित फंड का 95% हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है, फिर भी प्रदूषण के स्तर में बड़ी कमी नहीं आ सकी है। टॉप 50 में 18 शहर प्रदूषित, श्रीगंगानगर और बीकानेर में भी हालात बदतर
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण के मामले में राजस्थान की स्थिति उत्तर प्रदेश के बाद सबसे गंभीर है: एनसीआर और देश का हाल: दिल्ली सबसे प्रदूषित


