फर्जी इनवॉइस से 100 करोड़ की जीएसटी चोरी उजागर, STF ने अंतर्राज्यीय गिरोह के चार सदस्य दबोचे

फर्जी इनवॉइस से 100 करोड़ की जीएसटी चोरी उजागर, STF ने अंतर्राज्यीय गिरोह के चार सदस्य दबोचे

UP STF Action: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को जीएसटी चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है। STF ने फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसके चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी किए जाने की पुष्टि हुई है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।

STF अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्तों ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बोगस फर्मों का जाल बिछाकर वास्तविक व्यापारिक संस्थाओं को अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उपलब्ध कराया। इस नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक फर्मों द्वारा करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

  • STF ने जिन चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है-
  • हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस -निवासी टैगोर गार्डन, नई दिल्ली
  • जितेन्द्र झा- मूल निवासी समस्तीपुर (बिहार), वर्तमान पता नई दिल्ली
  • पुनीत अग्रवाल – निवासी पश्चिम बिहार, नई दिल्ली
  • शिवम- निवासी विजय एन्क्लेव, नई दिल्ली

चारों अभियुक्तों को STF फील्ड यूनिट, नोएडा कार्यालय में पूछताछ के दौरान 09 जनवरी 2026 को दोपहर 14:40 बजे विधिवत गिरफ्तार किया गया।

बरामद सामग्री

गिरफ्तारी के दौरान STF ने अभियुक्तों के कब्जे से कई अहम डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें  2 लैपटॉप,9 मोबाइल फोन,3 आधार कार्ड, ₹55,840 नकद बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में फर्जी फर्मों, बैंक खातों, ई-मेल आईडी और जीएसटी पोर्टल से संबंधित अहम जानकारियां मौजूद बताई जा रही हैं।

कैसे चलता था जीएसटी चोरी का संगठित खेल

STF की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह का सरगना हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस अकाउंटेंसी से जुड़े कार्य करता था। उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जीएसटी प्रणाली की खामियों का दुरुपयोग करते हुए एक सुनियोजित और तकनीकी तरीके से जीएसटी चोरी का नेटवर्क खड़ा किया।

गिरोह का तरीका बेहद संगठित था,सबसे पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न राज्यों में बोगस फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। इन फर्मों के नाम से बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी सेल्स इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। वास्तविक व्यापार करने वाली फर्मों से उनका जीएसटी नंबर, माल या सेवाओं का विवरण व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए लिया जाता था। इसके बाद बोगस फर्मों के नाम से इनवॉइस जनरेट कर उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराया जाता था।

सर्कुलर ट्रेडिंग और कैश एडजस्टमेंट का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि बैंकिंग लेन-देन को वैध दिखाने के लिए गिरोह द्वारा सर्कुलर ट्रेडिंग और कैश एडजस्टमेंट का सहारा लिया जाता था। एक ही रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर फर्जी खरीद-बिक्री का आभास कराया जाता था, जिससे GST पोर्टल पर रिटर्न सही दिखाई दें। STF अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्तों के मोबाइल फोन और लैपटॉप से 30 से अधिक ईमेल आईडी, कई फर्मों के बैंक लॉगिन, फर्जी GST रिटर्न फाइलिंग से जुड़े डेटा, बरामद किए गए हैं, जो इस बड़े आर्थिक अपराध की पुष्टि करते हैं।

कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में पंजीकृत कई बोगस फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी को अंजाम दे रहा था। STF का मानना है कि नेटवर्क की जड़ें अन्य राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ेगी, और फर्मों, खातों व व्यक्तियों के नाम सामने आने की संभावना है।

दर्ज मुकदमा और आगे की कार्रवाई

यह कार्रवाई थाना कवि नगर, गाजियाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 626/25 के तहत की गई है। गिरफ्तार अभियुक्तों को संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां STF उनकी रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों और लाभार्थी फर्मों तक पहुंचा जा सके। STF ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में जीएसटी विभाग, आयकर विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय किया जाएगा, ताकि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

आर्थिक अपराधों पर STF की सख्ती

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी चोरी जैसे आर्थिक अपराध न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ईमानदार व्यापारियों के लिए भी अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इसी वजह से STF ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। STF ने व्यापारियों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के फर्जी ITC या संदिग्ध लेन-देन से दूर रहें, अन्यथा उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

और गिरफ्तारियों की संभावना

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह केवल चार लोगों तक सीमित नहीं है। पूछताछ और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं। इसके साथ ही जीएसटी चोरी से अर्जित संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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