Budget 2026 expectations: शेयर बाजार से कमाई पर लगने वाला टैक्स निवेशकों को काफी परेशान करता है। बात केवल स्थानीय निवेशकों की ही नहीं है, विदेशी निवेशक भी इससे परेशान रहे हैं। पिछले साल की शुरुआत में जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) मार्केट से धड़ाधड़ पैसा निकाल रहे थे तब यह मांग उठी थी कि सरकार को कैपिटल गेन टैक्स पर अपना रुख बदलना चाहिए। सरकार ने यूनियन बजट 2024 में इस टैक्स में बढ़ोतरी की थी। अब जब बजट 2026 (Budget 2026) आने वाला है, तो उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण निवेशकों की मांग पर कुछ विचार करें।
अभी क्या है व्यवस्था?
बजट 2024 में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म, दोनों कैपिटल गेन पर टैक्स में वृद्धि हुई थी। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर टैक्स को जहां 15% से बढ़ाकर 20% किया गया। वहीं, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)10% से बढ़ 12.5% हो गया। हालांकि, कुछ राहत देते हुए सरकार ने 1 लाख छूट के दायरे को बढ़ाकर 1.25 लाख कर दिया गया था। मौजूदा व्यवस्था के तहत एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपए तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता। एक वर्ष के भीतर दर्ज किए गए लाभ को अल्पकालिक लाभ, दूसरे शब्दों में कहें तो शॉर्ट टर्म गेन माना जाता है। जबकि एक साल से अधिक की होल्डिंग लॉन्ग-टर्म के दायरे में आती है।
Budget 2026 में यह संभव
1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 में कैपिटल गेन टैक्स कम करने का फैसला होता है या नहीं, फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है। हालांकि, माना जा रहा है कि सरकार टैक्स-फ्री लिमिट को 1.25 लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। एक्स्पर्ट्स मानते हैं कि कैपिटल गेन टैक्स में कोई बड़ा बदलाव शायद न हो, क्योंकि उससे सरकारी खजाने पर फर्क पड़ेगा। लेकिन सरकार को इसमें कुछ कमी करने पर विचार जरूर करना चाहिए। इसके अलावा यदि होल्डिंग पीरियड को 1 साल से बढ़ाकर 2-3 कर दिया जाए, तो भी बेहतर रहेगा।
Capital Gains सबसे बड़ी गलती
पिछले साल हेलियोस कैपिटल (Helios Capital) के संस्थापक और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) समीर अरोड़ा ने कैपिटल गेन टैक्स को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने इसे सरकार की सबसे बड़ी गलती करार दिया था। समीर अरोड़ा ने कहा था कि इससे खासतौर पर विदेशी निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ है और वे धड़ाधड़ बिकवाली कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां विदेशी निवेशक भी स्टॉक मार्केट से हुए मुनाफे पर टैक्स देने के लिए बाध्य हैं। 2024 के बजट में जब सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स बढ़ाने का फैसला लिया, तब इसका विरोध हुआ था। 2025 की शुरुआत में जब मार्केट बड़े गोते लगाने लगा, तो विरोध तेज हुआ मगर सरकार से कोई राहत नहीं मिली।
FIIs की बिकवाली बड़ा मुदा
कुछ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि सरकार को विदेशी ही नहीं, घरेलू निवेशकों के लिए भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) खत्म कर देना चाहिए। उनका कहना है कि अगर बजट 2026 में LTCG खत्म या कम करने की घोषणा होती है, तो इससे विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी। बता दें कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली इस साल भी बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट की मुताबिक, बीते बुधवार को FIIs ने करीब 1,527.71 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। जनवरी में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में 4,650 करोड़ से अधिक की बिकवाली कर चुके हैं।


