चुनाव रोकते हैं… भाजपा प्रत्याशी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नामांकन खारिज करने का फैसला पलटा

चुनाव रोकते हैं… भाजपा प्रत्याशी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नामांकन खारिज करने का फैसला पलटा

महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले 29 महानगरपालिका चुनावों को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सभी प्रत्याशी धुंआधार प्रचार में जुटे हैं। इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) चुनाव को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने वाशी के वार्ड 17ए में होने वाले चुनाव पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला भाजपा उम्मीदवार नीलेश भोजने का नामांकन पत्र खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।

क्या है पूरा मामला?

भाजपा नेता नीलेश भोजने ने नवी मुंबई नगर निगम के वार्ड-17A से पार्षद पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी (Returning Officer) ने 31 दिसंबर को उनका नामांकन रद्द कर दिया। नामांकन रद्द करने का आधार महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 10(1डी)  को बनाया गया था, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी उम्मीदवार या उसके परिवार के पास कोई अवैध निर्माण है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा। इस फैसले को चुनौती देते हुए भोजने ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।    

हाईकोर्ट ने चुनाव पर लगाई रोक

मुख्य न्यायाधीश श्री चन्द्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को ‘शक्तियों का अवैध और मनमाना प्रयोग’ बताया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की इस दलील को प्रथम दृष्टया सही माना कि धारा 10(1डी) मुख्य रूप से मौजूदा पार्षदों पर लागू होती है, न कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों पर। नामांकन रद्द करने के लिए जो आधार दिए गए, वे कानूनी रूप से इस मामले पर लागू नहीं होते।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक इस मामले का निपटारा नहीं हो जाता, चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।

इस वार्ड में मतदान 15 जनवरी को प्रस्तावित था, जिस पर अब कोर्ट की रोक लग गई है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (9 जनवरी) को होगी।

नवी मुंबई महानगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। सभी वार्डों के उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों (Nomination Papers) की जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कुल 956 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जिनमें से 839 आवेदन वैध पाए गए, जबकि 117 आवेदनों को खारिज कर दिया गया। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार को मिली इस राहत ने चुनाव अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है।

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