गयाजी के मोहनपुर थाना क्षेत्र के लहथुआ गांव की सुबह अब पहले जैसी नहीं रही। खेतों में जाती पगडंडियों पर सन्नाटा है। आहर के किनारे खड़े लोग निगाहें चुरा कर बात करते हैं। हर सवाल का एक ही जवाब कि पुलिस जांच कर रही है। लेकिन गांव जानता है, 10 दिन बीत चुके हैं। न सवालों का जवाब मिला, न हत्या की गुत्थी खुली। इसी खालीपन में डर पनप रहा है। ऐसा डर जो मृतक के परिजन को अपनी ही जमीन छोड़ने का फैसला करने पर मजबूर कर रही है। ऐसा हम नहीं बल्कि मृतक के परिजन का कहना है। दरअसल, 28 दिसंबर की सुबह लहथुआ में 47 साल के प्रवीण सिंह की लाश मिली थी। घटनास्थल लहथुआ से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गेवलचक आहर था, जहां प्रवीण सिंह का शव पानी में औंधे मुंह उतराया मिला था। पास में न उनकी टोपी थी, न गमछा। थोड़ी दूरी पर, कीचड़ में संघर्ष के निशान भी थे। परिजन के मुताबिक, प्रवीण सिंह एक दिन पहले यानी 27 दिसंबर की शाम ये कहकर घर से निकले थे कि पास के गांव गेवलचक जा रहा हूं। प्रवीण सिंह के साथ क्या हुआ था, आखिर उनकी हत्या किसने और क्यों की? हत्या के 11 दिन बाद तक पुलिस की कार्रवाई कहां तक पहुंची, प्रवीण सिंह के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। बेटा शुभम बोला- घर से 500 मीटर दूर पापा का मोबाइल मिला देर शाम जब प्रवीण सिंह घर नहीं लौटे, तो 22 साल का बेटा शुभम सिंह रात को ही पिता की तलाश में निकला। शुभम बताता है कि घर से करीब 500 मीटर दूर खेत के किनारे किनारे पापा का मोबाइल लावारिस पड़ा मिला। मेरे मन में अनहोनी की आशंका होने लगी, मन में बुरे ख्याल आ रहे थे, बस भगवान से मना रहा था कि सब कुछ ठीक हो। पापा के साथ कोई अनहोनी न हुई हो। हालांकि, आधी रात को शुभम ने आसपास के कुछ घरों के दरवाजे भी खटखटाए, लोगों से पूछताछ कि लेकिन जब पिता के बारे में कुछ पता नहीं चला तो घर लौट आया। 28 दिसंबर की सुबह करीब 8 बजे शुभम को सूचना मिली कि आहर में किसी शख्स का शव पड़ा है। दौड़ते हुए जब वह मौके पर पहुंचा, तो देखा कि ये उसके पिता की लाश है। लोग जुटे। शव को आहर से निकाला गया। पुलिस आई। पोस्टमॉर्टम हुआ। मोहनपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद करीब 11 दिन बाद भी प्रवीण की सिंह की हत्या का कोई भी आरोपी पकड़ा नहीं जा सका। पुलिस ये भी पता नहीं लगा पाई कि आखिर मौत कैसे हुई। ये हत्या है या फिर कोई हादसा है। 11 दिन बीत चुके हैं। मृतक के घर में बुधवार को दशकर्म की प्रक्रिया पूरी की गई। लेकिन इधर न हत्या का कारण साफ है। न हत्यारे का सुराग। पुलिस कहती है, जांच चल रही है। तीन भाईयों से सबसे छोटे थे प्रवीण सिंह प्रवीण सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई मधुसूदन सिंह धनबाद में एक आउटसोर्सिंग कंपनी में जीएम हैं। मंझले भाई अर्जुन सिंह बनारस और दिल्ली में कारोबार करते हैं। गांव में खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी प्रवीण पर ही थी। वही खेत देखते थे। बटाईदारों से मिलते थे। दशकर्म में गांव पहुंचे प्रवीण के बड़े भाई मधुसूदन बताते हैं कि प्रवीण अक्सर शाम को गेवलचक जाते थे। वहीं उनका बटाईदार रहता है। कभी-कभी शराब का सेवन भी पी लेते थे। इस बात से इनकार नहीं है। लेकिन उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। गांव में भी नहीं। बाहर भी नहीं। हां, यह जरूर हो सकता है कि शराब के दौरान किसी से कहासुनी हुई हो। परिजन जिस ओर इशारा कर रहे हैं, वह महज शक नहीं लगता। आहर में शव जिस हालत में मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। प्रवीण का शव औंधे मुंह उतराया था। जानकार बताते हैं कि अगर किसी की डूबने से मौत होती है, तो 12 घंटे के भीतर शव पानी में उतराता नहीं है। आहर के पास सरसों के खेत में संघर्ष के निशान भी किसी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। आहर से पहले की कीचड़ वाली जगह पर प्रवीण के कूल्हे तक मिट्टी कैसे चिपकी मिली? सबसे अहम सवाल कि प्रवीण के पास मौजूद 3 से 4 हजार रुपए कहां गए? पैसे गायब हैं। मोबाइल पहले ही खेत पर मिला। टोपी और गमछा आहर से करीब 500 मीटर पहले पड़े मिले। यह सब महज इत्तफाक कतई नहीं हो सकता। यह किसी की सोची-समझी वारदात के संकेत बयां कर रहे हैं। परिजन बताते हैं कि 27 दिसंबर की शाम जब प्रवीण गेवलचक गए, तो कई लोगों ने उन्हें देखा। यहां तक उन्हें लौटते हुए भी कई लोगों ने देखा लेकिन उन्होंने शराब किसके यहां शराब पी, ये कोई बताने को तैयार नहीं। जबकि गांव और आसपास यह सब जानते हैं कि वहां अवैध शराब बनती और बिकती है। कुछ लोग जानते हैं कि हत्या किसने की। लेकिन न कोई खुलकर बोल रहा है, न पुलिस उन सुरागों तक पहुंच पा रही है। फरवरी 2025 में 25 लाख की चोरी का भी आज तक खुलासा नहीं प्रवीण के बड़े भाई मधुसूदन सिंह बताते हैं कि जांच के नाम पर हम लोगों को पुलिस लगातार टाल रही है। वे कहते हैं कि ये पहली बार नहीं है। पिछले साल फरवरी की बात है। प्रवीण की पत्नी रंजू देवी को ब्रेन हेमरेज हुआ था। इलाज के लिए पूरा परिवार दिल्ली में था। उसी दौरान लहथुआ स्थित घर में भीषण चोरी हुई। घर पर ताला लगा था। करीब 25 लाख रुपए के जेवर और सामान चोर ले गए। घर का कोना-कोना खाली कर दिया गया। एक भी सामान नहीं छोड़ा। मधुसूदन बताते हैं कि उधर दिल्ली में रंजू देवी की भी चोरी के बाद मौत हो गई। आज तक चोरी का खुलासा नहीं हो पाया कि आखिर किसने वारदात को अंजाम दिया था। उस घटना को भी एक साल होने को है। वे बताते हैं कि उस दौरान भी मोहनपुर थाना के जो SHO थे, आज भी वहीं थाना अध्यक्ष हैं। मधुसूदन कहते हैं कि पहले चोरी, फिर भाई की हत्या। यह सब देख-सुनकर बदन सिहर जाता है। डर लगता है कि आगे क्या होगा। यही डर अब पलायन का रूप ले रहा है। प्रवीण के परिजन खुले तौर पर कह रहे हैं कि अगर न्याय नहीं मिला, तो गांव छोड़ देंगे। अपने पूर्वजों की जमीन छोड़ देंगे। क्योंकि परिवार की सुरक्षा सबसे ऊपर है। ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। ये उस गांव की कहानी है, जहां लोग कहते हैं कि पिछले 100 वर्षों में कभी चोरी नहीं हुई। लेकिन अब पहले भीषण चोरी हुई। फिर हत्या। लेकिन दोनों ही मामलों में पुलिस खाली हाथ है। प्रवीण के परिजन के आरोप पर डीएसपी क्या कहते हैं? मृतक प्रवीण के परिजन के आरोपों को लेकर डीएसपी सौरभ जायसवाल कहते हैं कि जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट नहीं आया है। बिसरा सुरक्षित रखा गया है। डॉक्टरों की एक्सपर्ट ओपिनियन मांगी गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या 10 दिन में कोई ठोस दिशा तय नहीं हो सकती थी। क्या इतने सारे संकेतों के बावजूद पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। मोहनपुर थाना लहथुआ से करीब 12 किलोमीटर दूर है। जिला मुख्यालय गयाजी से 55 किलोमीटर है। दूरी ज्यादा नहीं, लेकिन न्याय की दूरी बढ़ती जा रही है। गांव में चुप्पी है। डर है। लोग फुसफुसाते हैं। कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। मधुसूदन सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की है। उनका कहना है कि हमें न्याय चाहिए। ताकि हम अपने पूर्वजों की अपनी जमीन पर सुरक्षित और भयमुक्त जीवन जी सकें। प्रवीण के मंझले भाई बोले- परिवार नहीं, हमारा भरोसा भी पलायन कर जाएगा मृतक के भाई अर्जुन सिंह का कहना है कि लहथुआ आज एक सवाल बन चुका है। सवाल पुलिस से। सवाल सिस्टम से। सवाल उस व्यवस्था से, जहां हत्या के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है। अगर इस केस में भी नतीजा नहीं निकला, तो यह सिर्फ एक हत्या की फाइल नहीं होगी। यह उस भरोसे की मौत होगी, जो गांव के लोग आज भी कानून पर करते हैं। और शायद तब लहथुआ से सिर्फ एक परिवार नहीं पूरा भरोसा पलायन कर जाएगा। गयाजी के मोहनपुर थाना क्षेत्र के लहथुआ गांव की सुबह अब पहले जैसी नहीं रही। खेतों में जाती पगडंडियों पर सन्नाटा है। आहर के किनारे खड़े लोग निगाहें चुरा कर बात करते हैं। हर सवाल का एक ही जवाब कि पुलिस जांच कर रही है। लेकिन गांव जानता है, 10 दिन बीत चुके हैं। न सवालों का जवाब मिला, न हत्या की गुत्थी खुली। इसी खालीपन में डर पनप रहा है। ऐसा डर जो मृतक के परिजन को अपनी ही जमीन छोड़ने का फैसला करने पर मजबूर कर रही है। ऐसा हम नहीं बल्कि मृतक के परिजन का कहना है। दरअसल, 28 दिसंबर की सुबह लहथुआ में 47 साल के प्रवीण सिंह की लाश मिली थी। घटनास्थल लहथुआ से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गेवलचक आहर था, जहां प्रवीण सिंह का शव पानी में औंधे मुंह उतराया मिला था। पास में न उनकी टोपी थी, न गमछा। थोड़ी दूरी पर, कीचड़ में संघर्ष के निशान भी थे। परिजन के मुताबिक, प्रवीण सिंह एक दिन पहले यानी 27 दिसंबर की शाम ये कहकर घर से निकले थे कि पास के गांव गेवलचक जा रहा हूं। प्रवीण सिंह के साथ क्या हुआ था, आखिर उनकी हत्या किसने और क्यों की? हत्या के 11 दिन बाद तक पुलिस की कार्रवाई कहां तक पहुंची, प्रवीण सिंह के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। बेटा शुभम बोला- घर से 500 मीटर दूर पापा का मोबाइल मिला देर शाम जब प्रवीण सिंह घर नहीं लौटे, तो 22 साल का बेटा शुभम सिंह रात को ही पिता की तलाश में निकला। शुभम बताता है कि घर से करीब 500 मीटर दूर खेत के किनारे किनारे पापा का मोबाइल लावारिस पड़ा मिला। मेरे मन में अनहोनी की आशंका होने लगी, मन में बुरे ख्याल आ रहे थे, बस भगवान से मना रहा था कि सब कुछ ठीक हो। पापा के साथ कोई अनहोनी न हुई हो। हालांकि, आधी रात को शुभम ने आसपास के कुछ घरों के दरवाजे भी खटखटाए, लोगों से पूछताछ कि लेकिन जब पिता के बारे में कुछ पता नहीं चला तो घर लौट आया। 28 दिसंबर की सुबह करीब 8 बजे शुभम को सूचना मिली कि आहर में किसी शख्स का शव पड़ा है। दौड़ते हुए जब वह मौके पर पहुंचा, तो देखा कि ये उसके पिता की लाश है। लोग जुटे। शव को आहर से निकाला गया। पुलिस आई। पोस्टमॉर्टम हुआ। मोहनपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद करीब 11 दिन बाद भी प्रवीण की सिंह की हत्या का कोई भी आरोपी पकड़ा नहीं जा सका। पुलिस ये भी पता नहीं लगा पाई कि आखिर मौत कैसे हुई। ये हत्या है या फिर कोई हादसा है। 11 दिन बीत चुके हैं। मृतक के घर में बुधवार को दशकर्म की प्रक्रिया पूरी की गई। लेकिन इधर न हत्या का कारण साफ है। न हत्यारे का सुराग। पुलिस कहती है, जांच चल रही है। तीन भाईयों से सबसे छोटे थे प्रवीण सिंह प्रवीण सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई मधुसूदन सिंह धनबाद में एक आउटसोर्सिंग कंपनी में जीएम हैं। मंझले भाई अर्जुन सिंह बनारस और दिल्ली में कारोबार करते हैं। गांव में खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी प्रवीण पर ही थी। वही खेत देखते थे। बटाईदारों से मिलते थे। दशकर्म में गांव पहुंचे प्रवीण के बड़े भाई मधुसूदन बताते हैं कि प्रवीण अक्सर शाम को गेवलचक जाते थे। वहीं उनका बटाईदार रहता है। कभी-कभी शराब का सेवन भी पी लेते थे। इस बात से इनकार नहीं है। लेकिन उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। गांव में भी नहीं। बाहर भी नहीं। हां, यह जरूर हो सकता है कि शराब के दौरान किसी से कहासुनी हुई हो। परिजन जिस ओर इशारा कर रहे हैं, वह महज शक नहीं लगता। आहर में शव जिस हालत में मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। प्रवीण का शव औंधे मुंह उतराया था। जानकार बताते हैं कि अगर किसी की डूबने से मौत होती है, तो 12 घंटे के भीतर शव पानी में उतराता नहीं है। आहर के पास सरसों के खेत में संघर्ष के निशान भी किसी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। आहर से पहले की कीचड़ वाली जगह पर प्रवीण के कूल्हे तक मिट्टी कैसे चिपकी मिली? सबसे अहम सवाल कि प्रवीण के पास मौजूद 3 से 4 हजार रुपए कहां गए? पैसे गायब हैं। मोबाइल पहले ही खेत पर मिला। टोपी और गमछा आहर से करीब 500 मीटर पहले पड़े मिले। यह सब महज इत्तफाक कतई नहीं हो सकता। यह किसी की सोची-समझी वारदात के संकेत बयां कर रहे हैं। परिजन बताते हैं कि 27 दिसंबर की शाम जब प्रवीण गेवलचक गए, तो कई लोगों ने उन्हें देखा। यहां तक उन्हें लौटते हुए भी कई लोगों ने देखा लेकिन उन्होंने शराब किसके यहां शराब पी, ये कोई बताने को तैयार नहीं। जबकि गांव और आसपास यह सब जानते हैं कि वहां अवैध शराब बनती और बिकती है। कुछ लोग जानते हैं कि हत्या किसने की। लेकिन न कोई खुलकर बोल रहा है, न पुलिस उन सुरागों तक पहुंच पा रही है। फरवरी 2025 में 25 लाख की चोरी का भी आज तक खुलासा नहीं प्रवीण के बड़े भाई मधुसूदन सिंह बताते हैं कि जांच के नाम पर हम लोगों को पुलिस लगातार टाल रही है। वे कहते हैं कि ये पहली बार नहीं है। पिछले साल फरवरी की बात है। प्रवीण की पत्नी रंजू देवी को ब्रेन हेमरेज हुआ था। इलाज के लिए पूरा परिवार दिल्ली में था। उसी दौरान लहथुआ स्थित घर में भीषण चोरी हुई। घर पर ताला लगा था। करीब 25 लाख रुपए के जेवर और सामान चोर ले गए। घर का कोना-कोना खाली कर दिया गया। एक भी सामान नहीं छोड़ा। मधुसूदन बताते हैं कि उधर दिल्ली में रंजू देवी की भी चोरी के बाद मौत हो गई। आज तक चोरी का खुलासा नहीं हो पाया कि आखिर किसने वारदात को अंजाम दिया था। उस घटना को भी एक साल होने को है। वे बताते हैं कि उस दौरान भी मोहनपुर थाना के जो SHO थे, आज भी वहीं थाना अध्यक्ष हैं। मधुसूदन कहते हैं कि पहले चोरी, फिर भाई की हत्या। यह सब देख-सुनकर बदन सिहर जाता है। डर लगता है कि आगे क्या होगा। यही डर अब पलायन का रूप ले रहा है। प्रवीण के परिजन खुले तौर पर कह रहे हैं कि अगर न्याय नहीं मिला, तो गांव छोड़ देंगे। अपने पूर्वजों की जमीन छोड़ देंगे। क्योंकि परिवार की सुरक्षा सबसे ऊपर है। ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। ये उस गांव की कहानी है, जहां लोग कहते हैं कि पिछले 100 वर्षों में कभी चोरी नहीं हुई। लेकिन अब पहले भीषण चोरी हुई। फिर हत्या। लेकिन दोनों ही मामलों में पुलिस खाली हाथ है। प्रवीण के परिजन के आरोप पर डीएसपी क्या कहते हैं? मृतक प्रवीण के परिजन के आरोपों को लेकर डीएसपी सौरभ जायसवाल कहते हैं कि जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट नहीं आया है। बिसरा सुरक्षित रखा गया है। डॉक्टरों की एक्सपर्ट ओपिनियन मांगी गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या 10 दिन में कोई ठोस दिशा तय नहीं हो सकती थी। क्या इतने सारे संकेतों के बावजूद पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। मोहनपुर थाना लहथुआ से करीब 12 किलोमीटर दूर है। जिला मुख्यालय गयाजी से 55 किलोमीटर है। दूरी ज्यादा नहीं, लेकिन न्याय की दूरी बढ़ती जा रही है। गांव में चुप्पी है। डर है। लोग फुसफुसाते हैं। कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। मधुसूदन सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की है। उनका कहना है कि हमें न्याय चाहिए। ताकि हम अपने पूर्वजों की अपनी जमीन पर सुरक्षित और भयमुक्त जीवन जी सकें। प्रवीण के मंझले भाई बोले- परिवार नहीं, हमारा भरोसा भी पलायन कर जाएगा मृतक के भाई अर्जुन सिंह का कहना है कि लहथुआ आज एक सवाल बन चुका है। सवाल पुलिस से। सवाल सिस्टम से। सवाल उस व्यवस्था से, जहां हत्या के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है। अगर इस केस में भी नतीजा नहीं निकला, तो यह सिर्फ एक हत्या की फाइल नहीं होगी। यह उस भरोसे की मौत होगी, जो गांव के लोग आज भी कानून पर करते हैं। और शायद तब लहथुआ से सिर्फ एक परिवार नहीं पूरा भरोसा पलायन कर जाएगा।


