जलवायु से लेकर मानवाधिकार तक… ट्रंप के एक फैसले ने बढ़ाई 66 वैश्विक संस्थाओं की टेंशन, जानें भारत पर असर

जलवायु से लेकर मानवाधिकार तक… ट्रंप के एक फैसले ने बढ़ाई 66 वैश्विक संस्थाओं की टेंशन, जानें भारत पर असर

UN International Organizations Exit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने के लिए आदेश जारी किया है। इनमें संयुक्त राष्ट्र से संबंधित 31 संस्थाएं और 35 गैर यूएन संगठन हैं। अब अमेरिका इन संगठनों को चलाने के लिए फंडिंग भी नहीं देगा। ये संस्थाएं कौन सी हैं और क्या काम करती हैं। अमरीका के इनसे हटने का क्या प्रभाव पड़ेगा जानते हैं।

क्या काम करती हैं ये संस्थाएं?

अमेरिका जिन अंतररराष्ट्रीय संस्थाओं से अलग हुआ है वह संस्थाएं मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता, आतंकवाद विरोधी अभियानों, मानवाधिकार, व्यापार, ऊर्जा, शांति, ग्लोबल गवर्नेंस जैसे विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय सहयोग, महिला सशक्तीकरण, आर्थिक व सामाजिक कार्यों से जुड़ी यूएन की कई संस्थाओं से भी अमरीका अलग हुआ है।

भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जिन संगठनों से अमरीका बाहर निकला है। उनमें से एक संगठन अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भी है। भारत और फ्रांस की अगुवाई वाला यह संगठन जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कार्य करता है। इसका प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवंबर 2015 में किया था। 120 देश इसके सदस्य हैं। अमेरिका नवंबर 2021 में इसका सदस्य बना था। अमेरिका के इससे अलग होने से इस मुहिम को झटका लग सकता है।

कितनी फंडिंग करता था अमरीका?

जिन 66 संगठनों से ट्रंप ने अमरीका को अलग किया है उन्हें कितनी आर्थिक सहायता अमरीका से मिलती थी यह अभी स्पष्ट नहीं है। इनमें 31 संगठन यूएन से जुड़े हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र को फंडिंग देने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है। यूएन के कुल बजट का 22 प्रतिशत अमेरिका देता है। 2025 में यह राशि 82.3 करोड़ डॉलर थी। इसके बाद चीन 20 प्रतिशत फंड देता है। इस बजट का काफी हिस्सा यूएन के इन संगठनों पर भी खर्च होता है। ऐसे में इन संगठनों के काम काज पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

संयुक्त राष्ट्र को लेकर क्या है ट्रंप की नाराजगी?

संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को लेकर डोनाल्ड ट्रंप पहले भी नाराजगी जताते रहे हैं। कुछ समय पहले अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन और मानवाधिकार परिषद से अभी अलग हो चुका है। यूएन के फंड में अमरीका लगातार कटौती भी कर रहा है। पिछले साल 20 जनवरी को शपथ लेने के बाद ही ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते को अमेरिकी हितों के विरूद्ध बताते हुए अलग होने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया था। सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए में यूएन पर तीखा हमला किया था

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