यमुनानगर में छत से गिरकर डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत:डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, परिजनों का अस्पताल में हंगामा, पुलिस पहुंची

यमुनानगर में छत से गिरकर डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत:डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, परिजनों का अस्पताल में हंगामा, पुलिस पहुंची

यमुनानगर में एक डेढ़ साल का बच्चा छत से सिर के बल जमीन पर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे सेक्टर 17 स्थित प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे जहां पर इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे की मौत का कारण डॉक्टर की लापरवाही बताते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि जब वह बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे तो वह उनसे बातचीत कर रहा था। डॉक्टर ने केस में गंभीरता नहीं दिखाती जिसके चलते उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही डायल 112 और सेक्टर 17 से पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद परिजनों ने बच्चे का शव लेकर घर लौटे। 14 फुट ऊंचाई से सिर के बल नीचे गिरा रूप नगर निवासी घनश्याम ने बताया कि वह सेल्समैन का काम करता है और उसके पास दो बच्चे हैं, जिसमें पांच वर्षीय रूद्र और डेढ़ वर्षीय देव हैं। गुरुवार को वह काम पर गया हुआ था। बच्चे घर पर अपनी मां और अन्य परिजनों के साथ थे। दोपहर करीब 12 बजे देव अपने भाई रुद्र के साथ घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान करीब 14 फुट की ऊंचाई से सिर के बल नीचे जा गिरा। रुद्र ने शोर मचाया तो परिजनों मौके पर पहुंचे और देखा कि देव के सिर में गहरी चोट आई है। दोपहर 2 बजे एडमिट कराया, 7 बजे तक कुछ नहीं बताया परिजन उसे तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल लेकर गए। इतने में वह भी अपने भाई श्याम के साथ अस्पताल पहुंच गया। यहां पर डॉक्टर ने हालत गंभीर बताते हुए बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। जिसके बाद वे देव को सेक्टर 17 स्थित जिंदल अस्पताल लेकर आए। देव की हालत काफी गंभीर, लेकिन वह उनसे हल्की बातचीत भी कर रहा था। घनश्याम का आरोप है कि उन्होंने 2 बजे बच्चे को अस्पताल में एडमिट कराया था, जिसके बाद उनके बच्चे को लेकर अस्पताल प्रशासन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। रात को करीब आठ बजे उनके पास डॉक्टर आए और कहने लगे कि हालत काफी सीरियस है। बच्चे को वेंटिलेटर पर डालना होगा। डॉक्टर पर इलाज को लेकर गंभीरता न दिखाने का आरोप घनश्याम ने कहा कि इसके कुछ ही देर बाद उन्हें पता चला कि उनके बच्चे की ताे मौत हो चुकी है। देव के चाचा श्याम ने कहा कि अगर बच्चे की हालत गंभीर भी और यहां के डॉक्टर उसका इलाज करने में असमर्थ थे तो उन्हें दोपहर को ही बता देते। ऐसे में वे अपने बच्चे को पीजीआई लेकर चले जाते। बच्चे की मौत के बाद रात करीब साढ़े 9 बजे परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही डॉयल 112 और सेक्टर 17 पुलिस थाने से टीम मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। करीब एक घंटे चले हंगामे के बाद परिजन बच्चे के शव को लेकर घर लौटे। परिजनों को पहले ही सारी कंडीशन की थी क्लियर: डॉ. जिंदल जिंदल अस्पताल के निदेशक डॉ. योगेश जिंदल ने बताया कि परिजन जब बच्चे को लेकर अस्पताल आए तो उसकी हालत काफी गंभीर थी। बच्चे को एडमिट करते समय ही बता दिया था कि 72 घंटे तक कुछ भी हो सकता है। दोपहर दो बजे से शाम 7 बजे तक बच्चे की जैसे ही कंडीशन रही करीब 4 बार परिजनों से मीटिंग करके उन्हें बताया गया। अपने पूरे प्रयास के बाद भी जब वह बच्चे को नहीं बचा पाए और परिजनों को उसकी मौत की सूचना दी तो वे इस बात को भड़क गए। बच्चे की डेथ सिर पर गहरी चोट लगने से हुई है। परिजनों ने कोई शिकायत नहीं सौंपी: थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे सेक्टर 17 थाना प्रभारी प्रमोद वालिया ने बताया कि उन्हें अस्पताल में बच्चे की मौत पर हंगामे की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचे तो परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। स्थिति कंट्रोल में है। फिलहाल पीड़ित परिवार की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। बच्चे का शव परिजनों को सौंप दिया गया है, जिसे लेकर वे घर चले गए हैं।

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