लखनऊ में साइबर ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर रिटायर्ड प्रोफेसर से 92 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने का डर दिखाकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। इसके बाद और रुपए का दबाव बनाने लगे। तब ठगी का एहसास हुआ। ऋषिता मैनहैटन, गोमतीनगर विस्तार निवासी जयन्त कुमार सिंह ने बताया कि 19 दिसंबर 2025 को उनके पास एक महिला का फोन आया। महिला ने कहा कि उनके सिम का मिसयूज हो रहा है और उससे अवैध मैसेज भेजे जा रहे हैं। इसके बाद कॉल को पीआरओ अरुण कुमार के पास ट्रांसफर करने को कहा गया। जयन्त ने बताए गए नंबर पर कॉल किया तो खुद को अरुण कुमार बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनका सिम मुंबई से मिसयूज हो रहा है और मामला आगे भेजा जा रहा है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के जरिए एक अन्य व्यक्ति ने आधार नंबर लेकर जांच की बात कही और बताया कि पीड़ित का नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में आ रहा है। जिसकी सुनवाई पीएमएलए कोर्ट में होती है। सीनियर सिटीजन होने की वजह से राहत का झांसा दिया कुछ देर बाद कॉल कर खुद को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर संदीप राव बताया गया। उसने कहा कि फाइल एनसीआरबी और फिर सीबीआई डायरेक्टर तक भेजी जा रही है। इसके बाद डायरेक्टर बनने वाले व्यक्ति ने कहा कि पीड़ित के नाम से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है, लेकिन सीनियर सिटीजन होने के कारण राहत दिलाने की कोशिश की जाएगी। ठगों ने पीड़ित को यह कहकर भरोसे में लिया कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और सर्विलांस रिपोर्ट पॉजिटिव है। इसके बाद सभी बैंक खातों, एफडी और फंड की जानकारी लेकर एफडी तुड़वाने को कहा गया। जांच के नाम पर रकम ठगों ने बताए गए खातों में ट्रांसफर कराने को कहा गया। बोला जांच पूरी होने के बाद आरबीआई पैसा वापस कर देगी। 15 लाख रुपए फ्रीज हुए विश्वास में आकर पीड़ित ने आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग तारीखों में करीब 92 लाख रुपए विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी लगातार और पैसों की मांग होने लगी। जिससे पीड़ित को शक हुआ। परिवार से चर्चा करने पर ठगी का एहसास हुआ।इंस्पेक्टर साइबर थाना बृजेश यादव ने बताया कि ट्रांसफर कराए रुपए पश्चिम यूपी, तेलंगना, उत्तराखंड और हरियाणा के खाते में गए हैं। 15 लाख फ्रीज किया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।


