औरंगाबाद पहुंचे मुखिया संघ प्रदेश अध्यक्ष:बोले – पंचायतों का परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया, गलत हो रहा है

औरंगाबाद पहुंचे मुखिया संघ प्रदेश अध्यक्ष:बोले – पंचायतों का परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया, गलत हो रहा है

मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय गुरुवार को औरंगाबाद पहुंचे, जहां जनप्रतिनिधियों की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने अंबा स्थित प्रखंड कार्यालय में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने पंचायत परिसीमन, मनरेगा भुगतान, पंचायतों की प्रशासनिक समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि पंचायतों का परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा इस साल परिसीमन नहीं कराए जाने की बात कही जा रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है। बिहार में साल 2001 के बाद अब तक पंचायतों का परिसीमन नहीं कराया गया है। जबकि नियम के अनुसार प्रत्येक 10 साल पर जनगणना के बाद परिसीमन किया जाना चाहिए। 2021 में जनगणना के बाद परिसीमन प्रस्तावित था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण जनगणना नहीं हो सकी। इसके बावजूद बिना परिसीमन के ही पंचायतों में आरक्षण रोस्टर लागू कर दिया गया, जो संवैधानिक रूप से गलत है। बैठक में मुखिया संघ प्रखंड अध्यक्ष मंजीत यादव, रविंद्र यादव, पुट्टू यादव तौहीद आलम, गुलाम सरवर, अरविंद पासवान, मुखिया प्रतिनिधि जितेंद्र पासवान, छोटू सिंह, रवि कुमार सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि व स्थानीय लोग मौजूद रहे। आरक्षण रोस्टर लागू किए जाने की मांग कहा गया है कि बिना परिसीमन कराए पंचायतों को नगर पंचायत में अपग्रेड करना और पंचायतों को उसमें समाहित करना भी गलत प्रक्रिया है। इससे पंचायतों का अस्तित्व प्रभावित हुआ है और आरक्षण रोस्टर में गंभीर विसंगतियां उत्पन्न हुई हैं। परिसीमन के बिना आरक्षण रोस्टर लागू करना संविधान का उल्लंघन है। इसी कारण मुखिया संघ ने यह निर्णय लिया है कि बिहार के सभी प्रखंडों में जाकर परिसीमन की मांग को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। यदि सरकार ने इस मुद्दे पर अनदेखी की, तो न्यायालय की शरण भी ली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साल 2026 में जनगणना के बाद ही आरक्षण रोस्टर लागू कर पंचायत चुनाव कराए जाने चाहिए। बैठक में मनरेगा से जुड़े गंभीर मुद्दे भी उठाए गए। मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि मनरेगा में प्रत्येक पंचायत का भारी बकाया है। कई वित्तीय वर्षों की राशि अभी तक लंबित है, जबकि जनप्रतिनिधियों ने उधार लेकर योजनाओं का क्रियान्वयन कराया है। योजनाओं की राशि देर से मिलने से बाधित होता है विकास प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंचायतों को मिलने वाली राशि समय पर नहीं मिल पाने का मुख्य कारण प्रशासनिक उदासीनता है। समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं सौंपा जाता और फाइलों का मूवमेंट बेहद धीमी गति से किया जाता है। घोषणा के बावजूद भी जन प्रतिनिधियों को नहीं दिया जा रहा आम लाइसेंस जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि सरकार द्वारा जनप्रतिनिधियों को शस्त्र लाइसेंस देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। जिन पंचायत प्रतिनिधियों को सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आर्म्स लाइसेंस दिया जाना चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सौंपा आवेदन बैठक के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामीण कार्य मंत्री और संबंधित सचिव को आवेदन सौंपा। इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष ने ओबरा रफीगंज और सदर प्रखंड में भी त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक किया व उनकी समस्याओं को जाना। मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय गुरुवार को औरंगाबाद पहुंचे, जहां जनप्रतिनिधियों की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने अंबा स्थित प्रखंड कार्यालय में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने पंचायत परिसीमन, मनरेगा भुगतान, पंचायतों की प्रशासनिक समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि पंचायतों का परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा इस साल परिसीमन नहीं कराए जाने की बात कही जा रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है। बिहार में साल 2001 के बाद अब तक पंचायतों का परिसीमन नहीं कराया गया है। जबकि नियम के अनुसार प्रत्येक 10 साल पर जनगणना के बाद परिसीमन किया जाना चाहिए। 2021 में जनगणना के बाद परिसीमन प्रस्तावित था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण जनगणना नहीं हो सकी। इसके बावजूद बिना परिसीमन के ही पंचायतों में आरक्षण रोस्टर लागू कर दिया गया, जो संवैधानिक रूप से गलत है। बैठक में मुखिया संघ प्रखंड अध्यक्ष मंजीत यादव, रविंद्र यादव, पुट्टू यादव तौहीद आलम, गुलाम सरवर, अरविंद पासवान, मुखिया प्रतिनिधि जितेंद्र पासवान, छोटू सिंह, रवि कुमार सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि व स्थानीय लोग मौजूद रहे। आरक्षण रोस्टर लागू किए जाने की मांग कहा गया है कि बिना परिसीमन कराए पंचायतों को नगर पंचायत में अपग्रेड करना और पंचायतों को उसमें समाहित करना भी गलत प्रक्रिया है। इससे पंचायतों का अस्तित्व प्रभावित हुआ है और आरक्षण रोस्टर में गंभीर विसंगतियां उत्पन्न हुई हैं। परिसीमन के बिना आरक्षण रोस्टर लागू करना संविधान का उल्लंघन है। इसी कारण मुखिया संघ ने यह निर्णय लिया है कि बिहार के सभी प्रखंडों में जाकर परिसीमन की मांग को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। यदि सरकार ने इस मुद्दे पर अनदेखी की, तो न्यायालय की शरण भी ली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि साल 2026 में जनगणना के बाद ही आरक्षण रोस्टर लागू कर पंचायत चुनाव कराए जाने चाहिए। बैठक में मनरेगा से जुड़े गंभीर मुद्दे भी उठाए गए। मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि मनरेगा में प्रत्येक पंचायत का भारी बकाया है। कई वित्तीय वर्षों की राशि अभी तक लंबित है, जबकि जनप्रतिनिधियों ने उधार लेकर योजनाओं का क्रियान्वयन कराया है। योजनाओं की राशि देर से मिलने से बाधित होता है विकास प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंचायतों को मिलने वाली राशि समय पर नहीं मिल पाने का मुख्य कारण प्रशासनिक उदासीनता है। समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं सौंपा जाता और फाइलों का मूवमेंट बेहद धीमी गति से किया जाता है। घोषणा के बावजूद भी जन प्रतिनिधियों को नहीं दिया जा रहा आम लाइसेंस जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि सरकार द्वारा जनप्रतिनिधियों को शस्त्र लाइसेंस देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। जिन पंचायत प्रतिनिधियों को सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आर्म्स लाइसेंस दिया जाना चाहिए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सौंपा आवेदन बैठक के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामीण कार्य मंत्री और संबंधित सचिव को आवेदन सौंपा। इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष ने ओबरा रफीगंज और सदर प्रखंड में भी त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक किया व उनकी समस्याओं को जाना।  

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