जिला मुख्यालय भभुआ में मनरेगा कार्यालय के पास बन रहे प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की तीन मंजिला इमारत के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कार्यस्थल पर न तो कोई अनुमान बोर्ड लगा है और न ही निर्माण की गुणवत्ता का कोई मानक पैमाना। भवन निर्माण में घटिया गुणवत्ता वाली ईंटों का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों में आशंका है कि यदि इतने बड़े प्रोजेक्ट में शुरू से ही लापरवाही बरती जा रही है, तो भविष्य में इमारत कितनी सुरक्षित रहेगी। पिछले 10 दिनों से ईंट बिछाने का काम कर रहे साइट पर काम कर रहे मजदूरों से बातचीत में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 15 वर्षीय सद्दाम ने बताया कि वे अपने गांव से 15 लोग आए हैं और पिछले 10 दिनों से ईंट बिछाने का काम कर रहे हैं। उन्हें प्रतिदिन 400 रुपए मिलते हैं, लेकिन वे पढ़ाई नहीं करते। बंगाल से 10 लोग एक महीने से काम कर रहे वहीं, 17 वर्षीय महबूब ने जानकारी दी कि बंगाल से 10 लोग एक महीने से काम कर रहे हैं और यह काम 7-8 महीने तक चलेगा। उन्हें प्रतिदिन 450 रुपए मिलते हैं, लेकिन वे नहीं जानते कि क्या बन रहा है।नाबालिगों से काम कराना कानूनन अपराध है। स्थानीय लोग निर्माण की गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी पर प्रशासन से तत्काल जांच की मांग कर रहे हैं। जिला मुख्यालय भभुआ में मनरेगा कार्यालय के पास बन रहे प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की तीन मंजिला इमारत के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कार्यस्थल पर न तो कोई अनुमान बोर्ड लगा है और न ही निर्माण की गुणवत्ता का कोई मानक पैमाना। भवन निर्माण में घटिया गुणवत्ता वाली ईंटों का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों में आशंका है कि यदि इतने बड़े प्रोजेक्ट में शुरू से ही लापरवाही बरती जा रही है, तो भविष्य में इमारत कितनी सुरक्षित रहेगी। पिछले 10 दिनों से ईंट बिछाने का काम कर रहे साइट पर काम कर रहे मजदूरों से बातचीत में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 15 वर्षीय सद्दाम ने बताया कि वे अपने गांव से 15 लोग आए हैं और पिछले 10 दिनों से ईंट बिछाने का काम कर रहे हैं। उन्हें प्रतिदिन 400 रुपए मिलते हैं, लेकिन वे पढ़ाई नहीं करते। बंगाल से 10 लोग एक महीने से काम कर रहे वहीं, 17 वर्षीय महबूब ने जानकारी दी कि बंगाल से 10 लोग एक महीने से काम कर रहे हैं और यह काम 7-8 महीने तक चलेगा। उन्हें प्रतिदिन 450 रुपए मिलते हैं, लेकिन वे नहीं जानते कि क्या बन रहा है।नाबालिगों से काम कराना कानूनन अपराध है। स्थानीय लोग निर्माण की गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी पर प्रशासन से तत्काल जांच की मांग कर रहे हैं।


