Dangerous Indian Places Winter: पहाड़ों पर जाकर बर्फ का मजा लेना हर ट्रैवलर का शौक होता है। लेकिन पहाड़ी जगह पर ट्रैवल करना कोई आसान काम नहीं है। भारत में तो कुछ ऐसी जगहें भी हैं। जो कि सुंदर तो बहुत हैं पर वहां सर्दियों में जाना मना है। इसकी वजह यहां होने वाली भारी बर्फबारी, सुरक्षा कारण और ज्योग्राफिकल दिक्कतें (Geographical Issue) हैं, जिसके कारण यहां सर्दियों में नहीं जा सकते। तो आइए जानें कि ये खूबसूरत पर खतरनाक जगहें कौन-सी हैं।
एक अलग दुनिया है गुरेज घाटी | Jammu and Kashmir, Gurez Valley

जम्मू-कश्मीर की ये गुरेज घाटी एक सेंसिटिव एरिया है जो कि लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) के पास में है। रजदान दर्रा, जो कि एकमात्र सड़क है गुरेज को बांदीपोरा और श्रीनगर को जोड़ने वाली, पहली बर्फ गिरने के बाद ही पूरी तरह से बंद हो जाती है। दिसंबर से मार्च के महीने तक ये घाटी बिल्कुल सूनी पड़ जाती है। यहां का तापमान जीरो से काफी नीचे चला जाता है और यहां का मौसम जान लेवा बन जाता है, जिसके कारण आवाजाही पर केवल सेना का कंट्रोल होता है। पर्यटकों के लिए ये जगह पूरी बंद होती है।
सबसे अलग-थलग है जांस्कार घाटी | Ladakh, Janskar Valley

हिमालय के सबसे अलग-थलग इलाकों में शुमार जांस्कार घाटी लद्दाख के अंदर के हिस्से में है। सर्दियों के आते ही ये घाटी देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाती है। पेंसी ला जैसे पहाड़ी दर्रे भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाती हैं। यहां की सड़कें बंद और हवाई सेवा भी नहीं मिलती हैं। यहां का तापमान माइनस तीस डिग्री या उससे भी नीचे गिर जाता है, जिससे नदियां भी जम जाती हैं। यहां के स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं, और पर्यटन पूरी तरह रोक दिया जाता है।
खतरों से भरा तवांग | Arunachal Pradesh, Tawang

अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सर्दियों की शुरुआत में जाया जा सकता है। लेकिन यहां की ऊंचाई पर बने गांव और भारत-चीन बॉर्डर के पास नहीं जा सकते हैं, ये पूरी तरह बंद होता है। कोहरे, बर्फीली सड़कें और भूस्खलन (Landslide) के कारण यहां खतरा बना रहता है, जिससे यहां यात्रा करना मुमकिन नहीं होता है। दिसंबर और मार्च तक यहां के कुछ इलाके बंद रहते हैं, जहां केवल सैन्य के काफिलों को ही सीमित आवाजाही की इजाजत रहती है।
यहां रोक लगाना क्यों जरूरी है?
- हिमस्खलन और हादसों से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए।
- सीमावर्ती इलाकों में सेना का काम सही तरीके से चल सके।
- नाजुक पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए।
- स्थानीय लोगों पर ज्यादा दबाव न पड़े।


