आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद नौकरी जॉइन कर ली है। इसके लिए नुसरत हॉस्पिटल या सिविल सर्जन के पास नहीं गई। सीधे विभाग पहुंचकर जॉइन किया। सूत्रों के मुताबिक विभाग ने खुद अप्रोच कर नुसरत को जॉइन कराया है। 20 दिसंबर जॉइनिंग की लास्ट डेट थी। इसे बढ़ाकर 31 दिसबंर किया गया। जब इस दोनों डेट पर नुसरत ने जॉइन नहीं किया तो इसे बढ़ाकर 7 जनवरी किया गया। आखिरी डेट के एक दिन पहले 6 जनवरी को नुसरत ने जॉइन कर लिया। सीएम नीतीश कुमार ने 15 दिसंबर को आयुष डॉक्टर्स को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान नुसरत का हिजाब हटाया था। इसके बाद हिजाब पर विवाद शुरू हो गया। विवाद के बाद नुसरत कहां गईं, इसे लेकर किसी के पास कोई जानकारी नहीं थी। इस रिपोर्ट में सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें, नुसरत परवीन के हिजाब मामले में विवाद शुरू होने से लेकर जॉइनिंग के पीछे की पूरी कहानी। नुसरत पर किस तरह का प्रेशर था। आखिर नौकरी जॉइन करने के लिए नुसरत कैसे मानी। सबसे पहले जानिए नुसरत किन प्रेशर से गुजर रही थीं 1- फैमिली प्रेशर – 23 दिन से घर छूटा हुआ है, पूरा परिवार बाहर – कॉलेज में एब्सेंट लग रहा है, नोटिस जारी होने का डर – पति की सरकारी नौकरी, वो भी तनाव में थे 2- पॉलिटिकल प्रेशर – नीतीश की इमेज बचाने के लिए ज्वाइनिंग का दबाव था – आखिरी मौका था, सरकार नौकरी से निकाल सकती थी – एक साल का कोर्स बाकी, कॉलेज निलंबित कर सकता था अब समझते हैं पूरा विवाद क्या था और कैसे आगे बढ़ता गया? अब समझते हैं पूरा विवाद क्या था और कैसे आगे बढ़ता गया? 15 दिसंबर को सीएम नीतीश कुमार पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। वहां मौजूद आयुष डॉक्टर बारी-बारी से सीएम के पास जाकर अपना नियुक्ति पत्र ले रहे थे। उन्हीं डॉक्टरों की लाइन में नुसरत परवीन भी खड़ी थी। नुसरत ने हिजाब पहन रखा था। नुसरत की जैसे ही बारी आई और सीएम के पास पहुंची, सीएम ने पूछा ‘यह क्या पहनी हो जी?’ नुसरत ने मुस्कुराया तब तक सीएम ने उसका हिसाब अपने हाथ से खींच दिया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने के प्रयास में उनकी आस्तीन खींचते नजर आए। हिजाब हटाने से नुसरत थोड़ी देर के लिए असहज हो गईं। आसपास मौजूद लोग हंसने लगे। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने महिला को नियुक्ति पत्र दिया और जाने का इशारा किया। इसके बाद वह वहां से चली गईं। इस कार्यक्रम को यूट्यूब पर लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा था। सीएम की इस हरकत के बाद यूट्यूब लाइव तुरंत बंद कर दिया गया। तब तक सीएम द्वारा हिजाब खींचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना के बाद नुसरत सामने नहीं आईं थीं। मामला तूल पकड़ते ही नुसरत ने पटना का घर छोड़ा हिजाब मामले के तूल पकड़ते ही नुसरत परवीन से बात करने की हमने कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने अपने पटना वाले घर को छोड़ दिया था। 18 दिसंबर को हम (भास्कर रिपोर्टर) पटना के पाटलीपुत्र कॉलोनी के मोहिउद्दीन कॉन्क्लेव पहुंचे, जहां नुसरत रहती थीं। यहां जानकारी मिली कि नुसरत अपने बच्चों और पति के साथ 17 दिसंबर की शाम निकल गईं। हमने लोगों से बात की। लोगों ने नुसरत के बारे में बताया कि उनके पति भी डॉक्टर हैं। पति डॉ. आसिफ साइकेट्रिस्ट (दिमाग के डॉक्टर) हैं। वे हाजीपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं। पटना के चांद मेमोरियल अस्पताल में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। नुसरत का परिवार काफी इज्जतदार है। नुसरत कभी हिजाब के बिना घर से बाहर नहीं निकलती थीं। कमर प्लाजा के गार्ड ने बताया कि करीब 10 साल से नुसरत का परिवार इस कॉलोनी में रह रहा है। पहले कमर प्लाजा में ही रहते थे, लेकिन बाद में पास के ही मोहिउद्दीन कॉन्क्लेव में शिफ्ट हुए हैं। वहां कमरा नंबर 102 में रह रहते हैं। 3 तस्वीरों में समझिए पूरा घटनाक्रम…
आगे हम चांद मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचे। नुसरत के पति डॉ. आसिफ यहां रोज शाम 6 बजे मरीजों को देखते थे। उस दिन डॉ. आसिफ अस्पताल नहीं पहुंचे। उन्हें कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अस्पताल के मैनेजर ने फोन मिलाया तो उन्होंने आने से मना कर दिया। हम 24 दिसंबर को फिर अस्पताल पहुंचे। मैनेजर ने बताया कि डॉ. आसिफ शहर में ही नहीं हैं। नकाब वाले मामले के बाद से मीडिया से बच रहे हैं। शायद कोलकाता गए हैं। नुसरत का पता लगाने हम पटना से कोलकाता रवाना हुए। पता चला कि नुसरत और उनके परिवार के लोग कोलकाता के तोपसिया के कोहिनूर बाजार में रह रहे हैं। हम तोपसिया पहुंचे। यहां नुसरत के भाई का घर ढूंढा। नुसरत के छोटे भाई प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं जानकारी मिली कि नुसरत के छोटे भाई बबलू प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं। हमने उनसे मिलने की कोशिश की। पता चला कि नुसरत की छोटी बहन भी उसी इलाके में रहती है, भाई भी उन्हीं के घर गए हैं। हम जब नुसरत की छोटी बहन के घर पहुंचे तो वहां हमारी मुलाकात बबलू से हुई। बबलू पहले बात करने के लिए तैयार नहीं हुए। बहुत समझाने और भरोसा दिलाने पर वह हमें अपने घर ले जाने को राजी हुए। घर के अंदर जाते ही उनकी छोटी बहन हमारे ऊपर भड़क गई। पूछा- आप लोग कौन हैं? मीडिया से होने की वजह से वह हम पर चिल्लाने लगी। कुछ देर में घर से और लोग बाहर आए। ये वही घर है, जिसमें नुसरत और उनके पति डॉ. आसिफ मौजूद थे। परिवार के लोगों ने धमकी दी कि गार्ड से कहकर, धक्के मारकर बाहर करवा देंगे। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। इसके बाद हम बाहर आ गए। बबलू ने अपने भतीजे वकार (नुसरत के बड़े भाई सरफराज का बेटा) से हमारी बात कराई। उन्होंने बताया कि नुसरत के पति ने उसे मीडिया से दूर रखा है। सोशल मीडिया पर भी कुछ लिखने से मना किया है। इसी वजह से नुसरत घर में बंद है। हम कुछ नहीं कर सकते। हम नहीं चाहते कि मियां-बीवी अलग हो जाएं। इसलिए चुप हैं। बबलू ने बताया ‘मौजूदा हुकूमत से कौन उलझेगा। हम लोगों को बहुत तकलीफ है। अगर आज मेरा बड़ा भाई परमिशन दे तो अभी तोपसिया थाना जाकर नीतीश कुमार समेत वहां मौजूद सभी मंत्रियों के नाम FIR करवा दूं।’ हमने पूछा कि नुसरत क्या चाहती हैं? उन्होंने कहा, ‘पति के बोलने पर ही वह कुछ करेंगी।’ नुसरत, पढ़ी-लिखी, समझदार हैं, फिर ऐसा कैसे? इस पर वकार ने कहा, ‘मुस्लिम परिवार है। यही सबसे बड़ी वजह है।’ आखिरकार नुसरत के घरवालों ने हमें उनसे नहीं मिलने दिया। भाई सरफराज ने कहा, ‘नुसरत इस माहौल में मीडिया से बात नहीं करना चाहतीं। जॉइन करने के पीछे की क्या है वजह? इस घटना के बाद नुसरत ने किसी से बात नहीं की है। डायरेक्ट विभाग में जाकर जॉइन करने के बाद भी वह अभी सामने नहीं आई हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नुसरत के ज्वॉइनिंग को लेकर अधिकारियों के ऊपर भी काफी दबाव था। नुसरत भी मीडिया के सामने नहीं आना चाहती हैं, ना ही इस मामले में कुछ बोलना चाहती हैं। नुसरत अच्छी तरह से जानती हैं कि अगर सिविल सर्जन या हॉस्पिटल में पहुंच कर जॉइन करती तो मीडिया वालों की भीड़ जुट सकती थी। इसी वजह से नुसरत ने सामान्य प्रक्रिया से हटकर हॉस्पिटल या सिविल सर्जन के पास न जाकर सीधे विभाग में पहुंच जॉइन किया है। कैसे और क्यों हुई नुसरत की डायरेक्ट ज्वॉइनिंग स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से हमें जानकारी मिली कि सरकार के तरफ से इस मामले को जल्दी निपटाने का काफी दबाव था। आमतौर पर आयुष डॉक्टर को सिविल सर्जन कार्यालय में खुद पहुंचकर मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराना होता है, लेकिन इस केस में नुसरत की मौजूदगी के बिना ही वहां कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई। मेडिकल साइन और फाइल मूवमेंट ऑफिस लेवल पर ही निपटा दी गई। इसके बाद सीधे संबंधित CHC में ज्वाइनिंग कराई गई। प्रशासन का फोकस प्रक्रिया से ज्यादा परिणाम पर था ताकि विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सके। आखिरी मौका…एक चूक और चली जाती सरकारी नौकरी नुसरत को नौकरी जॉइन करने के लिए 7 जनवरी आखिरी तारीख थी। विभाग ने पहले ही दो बार ज्वॉइनिंग की डेट बढ़ा दी थी। ज्वॉइनिंग डेट पहले 20 दिसंबर था। इस दिन जब जॉइन नहीं की तो 31 दिसंबर किया गया, इस दिन भी जब जॉइन नहीं की तो 7 जनवरी तक बढ़ाई गई। अगर नुसरत 7 जनवरी को भी जॉइन नहीं करतीं तो उनकी नियुक्ति खुद ही रद्द मानी जाती। सरकारी नौकरी हाथ से निकल जाती। यही वजह है कि तमाम असमंजस, दबाव और विवादों के बावजूद ज्वॉइनिंग को लेकर प्रशासन ने भी हर स्तर पर तेजी दिखाई। इसलिए चुपके से ज्वॉइनिंग कराई गई है। विभाग ने सीधे संपर्क कर ज्वॉइनिंग कराई हिजाब विवाद सिर्फ बिहार और देश में ही सीमित नहीं रहा। यह एक इंटरनेशनल मुद्दा बन गया था। नीतीश कुमार का नाम जुड़ने की वजह से सीएम और सरकार दोनों के छवि पर असर पड़ने लगा था। विपक्ष नीतीश के हेल्थ को लेकर लगातार सवाल कर रहा था। सोशल मीडिया पर भी नीतीश कुमार के हेल्थ को लेकर बहस छिड़ गई। ऐसे में नुसरत की ज्वॉइनिंग सरकार के लिए एक तरह का ‘डैमेज कंट्रोल’ बन गई। सरकार के तरफ से भी मैसेज देना था कि सीएम की किसी गतिविधि की वजह से किसी की करियर में कोई बाधा नहीं बन सकता है। नुसरत के ज्वॉइनिंग को लेकर विभाग पर भी काफी प्रेशर बना। अधिकारियों ने नुसरत से सीधा संपर्क किया। इसके बाद नुसरत ने नौकरी ज्वाइन कर ली। आयुष डॉक्टर की ज्वॉइनिंग प्रोसेस क्या है? नियुक्ति के लिए आयुष विभाग लेटर जारी करता है। नुसरत को मुख्यमंत्री ने 15 दिसंबर को दे दिया था। इस लेटर को लेकर सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है। वहां कैंडिडेट्स से बेसिक इन्फॉर्मेशन ली जाती है। डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन होता है। इसके बाद सिविल सर्जन लेटर जारी करते हैं कि आयुष डॉक्टर को किस कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में जॉइन करना है। इसके बाद कैंडिडेट संबंधित CHC में वो लेटर दिखाकर जॉइन करता है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने दिया नुसरत को दिया था ऑफर हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की एंट्री हुई थी। डॉ. इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड में सरकारी सेवा में आने का खुला ऑफर दिया था। इरफान अंसारी ने कहा, ‘अगर डॉ. नुसरत परवीन झारखंड में अपनी सेवाएं देती हैं, तो उन्हें तीन लाख रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें उनकी मनचाही पोस्टिंग और रहने के लिए सरकारी आवास (फ्लैट) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।’ बिहार में महीने की 32 हजार सैलरी झारखंड सरकार के मंत्री ने कहा, प्रदेश में बेटियों और डॉक्टर के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि ‘बिहार में उन्हें 32 हजार रुपए मिलेंगे। वे झारखंड में नौकरी जॉइन करें, उन्हें 3 लाख रुपए वेतन, सरकारी फ्लैट, मनचाही पोस्टिंग और पूरी सुरक्षा दी जाएगी। आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद नौकरी जॉइन कर ली है। इसके लिए नुसरत हॉस्पिटल या सिविल सर्जन के पास नहीं गई। सीधे विभाग पहुंचकर जॉइन किया। सूत्रों के मुताबिक विभाग ने खुद अप्रोच कर नुसरत को जॉइन कराया है। 20 दिसंबर जॉइनिंग की लास्ट डेट थी। इसे बढ़ाकर 31 दिसबंर किया गया। जब इस दोनों डेट पर नुसरत ने जॉइन नहीं किया तो इसे बढ़ाकर 7 जनवरी किया गया। आखिरी डेट के एक दिन पहले 6 जनवरी को नुसरत ने जॉइन कर लिया। सीएम नीतीश कुमार ने 15 दिसंबर को आयुष डॉक्टर्स को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान नुसरत का हिजाब हटाया था। इसके बाद हिजाब पर विवाद शुरू हो गया। विवाद के बाद नुसरत कहां गईं, इसे लेकर किसी के पास कोई जानकारी नहीं थी। इस रिपोर्ट में सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें, नुसरत परवीन के हिजाब मामले में विवाद शुरू होने से लेकर जॉइनिंग के पीछे की पूरी कहानी। नुसरत पर किस तरह का प्रेशर था। आखिर नौकरी जॉइन करने के लिए नुसरत कैसे मानी। सबसे पहले जानिए नुसरत किन प्रेशर से गुजर रही थीं 1- फैमिली प्रेशर – 23 दिन से घर छूटा हुआ है, पूरा परिवार बाहर – कॉलेज में एब्सेंट लग रहा है, नोटिस जारी होने का डर – पति की सरकारी नौकरी, वो भी तनाव में थे 2- पॉलिटिकल प्रेशर – नीतीश की इमेज बचाने के लिए ज्वाइनिंग का दबाव था – आखिरी मौका था, सरकार नौकरी से निकाल सकती थी – एक साल का कोर्स बाकी, कॉलेज निलंबित कर सकता था अब समझते हैं पूरा विवाद क्या था और कैसे आगे बढ़ता गया? अब समझते हैं पूरा विवाद क्या था और कैसे आगे बढ़ता गया? 15 दिसंबर को सीएम नीतीश कुमार पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। वहां मौजूद आयुष डॉक्टर बारी-बारी से सीएम के पास जाकर अपना नियुक्ति पत्र ले रहे थे। उन्हीं डॉक्टरों की लाइन में नुसरत परवीन भी खड़ी थी। नुसरत ने हिजाब पहन रखा था। नुसरत की जैसे ही बारी आई और सीएम के पास पहुंची, सीएम ने पूछा ‘यह क्या पहनी हो जी?’ नुसरत ने मुस्कुराया तब तक सीएम ने उसका हिसाब अपने हाथ से खींच दिया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने के प्रयास में उनकी आस्तीन खींचते नजर आए। हिजाब हटाने से नुसरत थोड़ी देर के लिए असहज हो गईं। आसपास मौजूद लोग हंसने लगे। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने महिला को नियुक्ति पत्र दिया और जाने का इशारा किया। इसके बाद वह वहां से चली गईं। इस कार्यक्रम को यूट्यूब पर लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा था। सीएम की इस हरकत के बाद यूट्यूब लाइव तुरंत बंद कर दिया गया। तब तक सीएम द्वारा हिजाब खींचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना के बाद नुसरत सामने नहीं आईं थीं। मामला तूल पकड़ते ही नुसरत ने पटना का घर छोड़ा हिजाब मामले के तूल पकड़ते ही नुसरत परवीन से बात करने की हमने कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने अपने पटना वाले घर को छोड़ दिया था। 18 दिसंबर को हम (भास्कर रिपोर्टर) पटना के पाटलीपुत्र कॉलोनी के मोहिउद्दीन कॉन्क्लेव पहुंचे, जहां नुसरत रहती थीं। यहां जानकारी मिली कि नुसरत अपने बच्चों और पति के साथ 17 दिसंबर की शाम निकल गईं। हमने लोगों से बात की। लोगों ने नुसरत के बारे में बताया कि उनके पति भी डॉक्टर हैं। पति डॉ. आसिफ साइकेट्रिस्ट (दिमाग के डॉक्टर) हैं। वे हाजीपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं। पटना के चांद मेमोरियल अस्पताल में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। नुसरत का परिवार काफी इज्जतदार है। नुसरत कभी हिजाब के बिना घर से बाहर नहीं निकलती थीं। कमर प्लाजा के गार्ड ने बताया कि करीब 10 साल से नुसरत का परिवार इस कॉलोनी में रह रहा है। पहले कमर प्लाजा में ही रहते थे, लेकिन बाद में पास के ही मोहिउद्दीन कॉन्क्लेव में शिफ्ट हुए हैं। वहां कमरा नंबर 102 में रह रहते हैं। 3 तस्वीरों में समझिए पूरा घटनाक्रम…
आगे हम चांद मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचे। नुसरत के पति डॉ. आसिफ यहां रोज शाम 6 बजे मरीजों को देखते थे। उस दिन डॉ. आसिफ अस्पताल नहीं पहुंचे। उन्हें कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अस्पताल के मैनेजर ने फोन मिलाया तो उन्होंने आने से मना कर दिया। हम 24 दिसंबर को फिर अस्पताल पहुंचे। मैनेजर ने बताया कि डॉ. आसिफ शहर में ही नहीं हैं। नकाब वाले मामले के बाद से मीडिया से बच रहे हैं। शायद कोलकाता गए हैं। नुसरत का पता लगाने हम पटना से कोलकाता रवाना हुए। पता चला कि नुसरत और उनके परिवार के लोग कोलकाता के तोपसिया के कोहिनूर बाजार में रह रहे हैं। हम तोपसिया पहुंचे। यहां नुसरत के भाई का घर ढूंढा। नुसरत के छोटे भाई प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं जानकारी मिली कि नुसरत के छोटे भाई बबलू प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं। हमने उनसे मिलने की कोशिश की। पता चला कि नुसरत की छोटी बहन भी उसी इलाके में रहती है, भाई भी उन्हीं के घर गए हैं। हम जब नुसरत की छोटी बहन के घर पहुंचे तो वहां हमारी मुलाकात बबलू से हुई। बबलू पहले बात करने के लिए तैयार नहीं हुए। बहुत समझाने और भरोसा दिलाने पर वह हमें अपने घर ले जाने को राजी हुए। घर के अंदर जाते ही उनकी छोटी बहन हमारे ऊपर भड़क गई। पूछा- आप लोग कौन हैं? मीडिया से होने की वजह से वह हम पर चिल्लाने लगी। कुछ देर में घर से और लोग बाहर आए। ये वही घर है, जिसमें नुसरत और उनके पति डॉ. आसिफ मौजूद थे। परिवार के लोगों ने धमकी दी कि गार्ड से कहकर, धक्के मारकर बाहर करवा देंगे। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। इसके बाद हम बाहर आ गए। बबलू ने अपने भतीजे वकार (नुसरत के बड़े भाई सरफराज का बेटा) से हमारी बात कराई। उन्होंने बताया कि नुसरत के पति ने उसे मीडिया से दूर रखा है। सोशल मीडिया पर भी कुछ लिखने से मना किया है। इसी वजह से नुसरत घर में बंद है। हम कुछ नहीं कर सकते। हम नहीं चाहते कि मियां-बीवी अलग हो जाएं। इसलिए चुप हैं। बबलू ने बताया ‘मौजूदा हुकूमत से कौन उलझेगा। हम लोगों को बहुत तकलीफ है। अगर आज मेरा बड़ा भाई परमिशन दे तो अभी तोपसिया थाना जाकर नीतीश कुमार समेत वहां मौजूद सभी मंत्रियों के नाम FIR करवा दूं।’ हमने पूछा कि नुसरत क्या चाहती हैं? उन्होंने कहा, ‘पति के बोलने पर ही वह कुछ करेंगी।’ नुसरत, पढ़ी-लिखी, समझदार हैं, फिर ऐसा कैसे? इस पर वकार ने कहा, ‘मुस्लिम परिवार है। यही सबसे बड़ी वजह है।’ आखिरकार नुसरत के घरवालों ने हमें उनसे नहीं मिलने दिया। भाई सरफराज ने कहा, ‘नुसरत इस माहौल में मीडिया से बात नहीं करना चाहतीं। जॉइन करने के पीछे की क्या है वजह? इस घटना के बाद नुसरत ने किसी से बात नहीं की है। डायरेक्ट विभाग में जाकर जॉइन करने के बाद भी वह अभी सामने नहीं आई हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नुसरत के ज्वॉइनिंग को लेकर अधिकारियों के ऊपर भी काफी दबाव था। नुसरत भी मीडिया के सामने नहीं आना चाहती हैं, ना ही इस मामले में कुछ बोलना चाहती हैं। नुसरत अच्छी तरह से जानती हैं कि अगर सिविल सर्जन या हॉस्पिटल में पहुंच कर जॉइन करती तो मीडिया वालों की भीड़ जुट सकती थी। इसी वजह से नुसरत ने सामान्य प्रक्रिया से हटकर हॉस्पिटल या सिविल सर्जन के पास न जाकर सीधे विभाग में पहुंच जॉइन किया है। कैसे और क्यों हुई नुसरत की डायरेक्ट ज्वॉइनिंग स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों से हमें जानकारी मिली कि सरकार के तरफ से इस मामले को जल्दी निपटाने का काफी दबाव था। आमतौर पर आयुष डॉक्टर को सिविल सर्जन कार्यालय में खुद पहुंचकर मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराना होता है, लेकिन इस केस में नुसरत की मौजूदगी के बिना ही वहां कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई। मेडिकल साइन और फाइल मूवमेंट ऑफिस लेवल पर ही निपटा दी गई। इसके बाद सीधे संबंधित CHC में ज्वाइनिंग कराई गई। प्रशासन का फोकस प्रक्रिया से ज्यादा परिणाम पर था ताकि विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सके। आखिरी मौका…एक चूक और चली जाती सरकारी नौकरी नुसरत को नौकरी जॉइन करने के लिए 7 जनवरी आखिरी तारीख थी। विभाग ने पहले ही दो बार ज्वॉइनिंग की डेट बढ़ा दी थी। ज्वॉइनिंग डेट पहले 20 दिसंबर था। इस दिन जब जॉइन नहीं की तो 31 दिसंबर किया गया, इस दिन भी जब जॉइन नहीं की तो 7 जनवरी तक बढ़ाई गई। अगर नुसरत 7 जनवरी को भी जॉइन नहीं करतीं तो उनकी नियुक्ति खुद ही रद्द मानी जाती। सरकारी नौकरी हाथ से निकल जाती। यही वजह है कि तमाम असमंजस, दबाव और विवादों के बावजूद ज्वॉइनिंग को लेकर प्रशासन ने भी हर स्तर पर तेजी दिखाई। इसलिए चुपके से ज्वॉइनिंग कराई गई है। विभाग ने सीधे संपर्क कर ज्वॉइनिंग कराई हिजाब विवाद सिर्फ बिहार और देश में ही सीमित नहीं रहा। यह एक इंटरनेशनल मुद्दा बन गया था। नीतीश कुमार का नाम जुड़ने की वजह से सीएम और सरकार दोनों के छवि पर असर पड़ने लगा था। विपक्ष नीतीश के हेल्थ को लेकर लगातार सवाल कर रहा था। सोशल मीडिया पर भी नीतीश कुमार के हेल्थ को लेकर बहस छिड़ गई। ऐसे में नुसरत की ज्वॉइनिंग सरकार के लिए एक तरह का ‘डैमेज कंट्रोल’ बन गई। सरकार के तरफ से भी मैसेज देना था कि सीएम की किसी गतिविधि की वजह से किसी की करियर में कोई बाधा नहीं बन सकता है। नुसरत के ज्वॉइनिंग को लेकर विभाग पर भी काफी प्रेशर बना। अधिकारियों ने नुसरत से सीधा संपर्क किया। इसके बाद नुसरत ने नौकरी ज्वाइन कर ली। आयुष डॉक्टर की ज्वॉइनिंग प्रोसेस क्या है? नियुक्ति के लिए आयुष विभाग लेटर जारी करता है। नुसरत को मुख्यमंत्री ने 15 दिसंबर को दे दिया था। इस लेटर को लेकर सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है। वहां कैंडिडेट्स से बेसिक इन्फॉर्मेशन ली जाती है। डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन होता है। इसके बाद सिविल सर्जन लेटर जारी करते हैं कि आयुष डॉक्टर को किस कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में जॉइन करना है। इसके बाद कैंडिडेट संबंधित CHC में वो लेटर दिखाकर जॉइन करता है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने दिया नुसरत को दिया था ऑफर हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की एंट्री हुई थी। डॉ. इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड में सरकारी सेवा में आने का खुला ऑफर दिया था। इरफान अंसारी ने कहा, ‘अगर डॉ. नुसरत परवीन झारखंड में अपनी सेवाएं देती हैं, तो उन्हें तीन लाख रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें उनकी मनचाही पोस्टिंग और रहने के लिए सरकारी आवास (फ्लैट) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।’ बिहार में महीने की 32 हजार सैलरी झारखंड सरकार के मंत्री ने कहा, प्रदेश में बेटियों और डॉक्टर के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि ‘बिहार में उन्हें 32 हजार रुपए मिलेंगे। वे झारखंड में नौकरी जॉइन करें, उन्हें 3 लाख रुपए वेतन, सरकारी फ्लैट, मनचाही पोस्टिंग और पूरी सुरक्षा दी जाएगी।


