भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी होते ही जिले की शिक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घोषित शेड्यूल के अनुसार 10वीं की परीक्षाएं 21 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक और 12वीं की परीक्षाएं 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी। परीक्षा की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन सिलेबस की स्थिति और स्कूलों के हालात चिंताजनक बने हुए हैं। छात्रों और शिक्षकों के पास प्रभावी पढ़ाई और सिलेबस पूर्ण करने के लिए अब महज 15 से 20 दिन ही शेष हैं। कोर्स पूरा होने के कई कारण हैं, जिसमें सबसे प्रमुख है शिक्षकों का गैर शिक्षकीय कार्यों में उलझे रहना। पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान जिले के शासकीय स्कूलों में पढ़ाई लगातार बाधित रही। सत्र के बीच पहले शीतकालीन अवकाश रहा, इसके बाद अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन की हड़ताल ने शैक्षणिक व्यवस्था को झकझोर दिया। इससे पहले शिक्षकों को एसआईआर सर्वे जैसे कार्यों में लगाया गया, जिससे नियमित कक्षाएं प्रभावित होती रहीं। इन सभी कारणों से स्कूलों में तय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई नहीं हो सकी और पाठ्यक्रम लगातार पिछड़ता चला गया। शिक्षा विभाग भले ही 80 प्रतिशत कोर्स पूरा होने का दावा कर रहा हो, लेकिन मैदानी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। विभिन्न स्कूलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश शासकीय स्कूलों में अब तक केवल 60 से 65 प्रतिशत और कुछ चुनिंदा स्कूलों में अधिकतम 70 प्रतिशत तक ही सिलेबस पूरा हो पाया है। स्थिति को और गंभीर बना रही है शिक्षकों की भारी कमी। जिला शिक्षा अधिकारी संजय गुहे का कहना है कि जिले के सभी स्कूलों में लगभग 80 प्रतिशत कोर्स पूरा हो चुका है और बचे हुए दिनों में शेष पाठ्यक्रम भी पूरा करा लिया जाएगा। छात्रवृत्ति एंट्री, जाति-निवास प्रमाण पत्र, मध्याह्न भोजन से जुड़ी जानकारी, राशन व गणवेश वितरण, साइकिल और किताबों का वितरण, आधार और बैंक डिटेल अपडेट , यू-डायस डेटा एंट्री जैसे ऑनलाइन कार्य अतिरिक्त समय ले रहे हैं। आधार आईडी,जाति व निवास का काम शामिल है। अकेले बलौदाबाजार जिले में शिक्षकों के 4137 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। पूरे शैक्षणिक वर्ष में शिक्षण कार्य के लिए मिले 210 दिनों में से शिक्षकों का आधे से अधिक समय गैर-शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में व्यतीत हो गया। दिसंबर तक पूरा होने वाला सिलेबस अब तक 60–65 प्रतिशत हा हुआ है। इसी बीच शिक्षा विभाग ने स्कूलों में हेल्थ केयर, इलेक्ट्रीशियन और वेंडर जैसे व्यावसायिक कोर्स भी अनिवार्य कर दिए। प्रत्येक स्कूल में 20 छात्रों का चयन कर इन कोर्सों का अध्यापन कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। यह अतिरिक्त जिम्मेदारी भी नियमित शिक्षकों पर डाल दी गई, जिससे उनका कार्यभार और बढ़ गया है।


