सरकारी विभागों पर बिजली बिल का भारी बोझ, 1827 लाख रुपए अब भी बकाया

सरकारी विभागों पर बिजली बिल का भारी बोझ, 1827 लाख रुपए अब भी बकाया

-बैतूल सर्किल में 30 विभागों के 7746 विद्युत कनेक्शनों पर 1950.42 लाख का बकाया, वसूली बेहद कम

बैतूल। मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा सरकारी विभागों के बिजली बिल बकाया को लेकर जारी किए गए ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार बैतूल सर्किल में संचालित 30 सरकारी विभागों के कुल 7746 विद्युत कनेक्शनों पर 1950.42 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया दर्ज किया गया है। हालांकि बिजली कंपनी द्वारा वसूली के प्रयास किए गए, लेकिन अब तक केवल 123.74 लाख रुपए की ही रिकवरी हो सकी है। इसके चलते 1827.11 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि अब भी सरकारी विभागों पर बकाया बनी हुई है।
स्थानीय निकाय और पंचायत सबसे बड़े बकायेदार
जारी विवरण के मुताबिक नगर निगम, नगर परिषद एवं पंचायत विभाग पर सबसे अधिक बिजली बिल बकाया है। पंचायत विभाग के 2544 कनेक्शनों पर 1416.34 लाख रुपए का बिल बना, जिसमें से नाममात्र की वसूली के बाद 1398.62 लाख रुपए अब भी बकाया हैं। वहीं नगर निकायों पर भी 26.81 लाख रुपए से अधिक का भुगतान लंबित है।
महिला एवं बाल विकास और आदिवासी कल्याण विभाग भी पीछे नहीं
महिला एवं बाल विकास विभाग के 1604 कनेक्शनों पर 1304.68 लाख रुपए का बिल दर्ज है, जिसमें से केवल 0.29 लाख की वसूली हुई, जबकि 130.40 लाख रुपए अब भी बाकी हैं। आदिवासी कल्याण विभाग के 1443 कनेक्शनों पर 144.65 लाख रुपए का बिल बना, जिसमें 133.62 लाख रुपए बकाया हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों की भी लंबी सूची
शिक्षा विभाग के 965 कनेक्शनों पर 57.57 लाख रुपए और स्वास्थ्य विभाग के 167 कनेक्शनों पर 28.83 लाख रुपए का बिल सामने आया है। इनमें भी बड़ी राशि अभी तक जमा नहीं हो पाई है। वहीं केवल राज्य ही नहीं, बल्कि केंद्रीय सरकारी विभागों पर भी बिजली बिल बकाया है। रेलवे सहित अन्य केंद्रीय विभागों के 218 कनेक्शनों पर 35.41 लाख रुपए का बिल बना, जिसमें से 21.10 लाख रुपए अब भी लंबित हैं।
बिजली कंपनी की बढ़ी चिंता
इतनी बड़ी बकाया राशि से विद्युत वितरण कंपनी की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर सरकारी विभाग बिजली बिल जमा करें, तो कंपनी को राजस्व संकट से राहत मिल सकती है।
सवालों के घेरे में विभागीय जिम्मेदारी
आंकड़े यह भी सवाल खड़े करते हैं कि जब आम उपभोक्ताओं पर बकाया होने पर कनेक्शन काट दिए जाते हैं, तो सरकारी विभागों पर इतनी बड़ी राशि वर्षों तक कैसे लंबित रहती है। अब देखना होगा कि शासन और संबंधित विभाग इस बकाया राशि की भरपाई के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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