नर्सरी से लाकर नगरवन में छोड़े, बिना हवा पानी हजारों पौधे नष्ट

नर्सरी से लाकर नगरवन में छोड़े, बिना हवा पानी हजारों पौधे नष्ट

भिवाड़ी. आगामी सीजन में विभागीय लक्ष्य अनुसार पौधे रोपने के लिए दिसंबर में बैठक हो चुकी है। सरकार से आए निर्देश पर बैठक और कागजी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है। जिम्मेदार अधिकारियों के पास नर्सरी से लाए गए पौधों को जमीन में रोपने, रोपने से बचे पौधों को मिट्टी में गाडक़र सुरक्षित रखने की फुर्सत नहीं है। इसी का नतीजा है काली खोली धाम स्थित नगरवन में नर्सरी से लाए गए हजारों पौधे नष्ट हो गए हैं। पौधे नगर वन में रखे हुए हैं। इनकी जड़ों में पॉलिथिन लगी हुई है, जिसकी वजह से इन्हें हवा पानी नहीं मिला और अब ये नष्ट हो चुके हैं। खिदरपुर गोधान के बीच में स्थित नगर वन हो या फिर मटीला की तरफ से आने पर काली खोली से पहले वाली साइट हो, सभी जगह हजारों पौधे बिना देखभाल के नष्ट हो चुके हैं। यहां पर सरकार की मंशा है कि क्षेत्र को हराभरा किया जाए। काली खोली धाम को धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक रूप से भी सुंदर बनाया जाए, इसके लिए नगर वन में पौधारोपण के साथ अन्य सुंदरता के कार्य भी कराए गए हैं। नर्सरी से मंगाकर बिना लगाए पौधों के नष्ट होने की कहानी में बड़ी लापरवाही उजागर होती है, क्योंकि यहां पर कई बड़े नेता और अधिकारियों की पत्नी ने आकर पौधारोपण किया है, इसके बाजवूद यहां पर नर्सरी से लाए गए पौधों की उचित देखभाल नहीं की गई। समय रहते उन्हें जमीन में नहीं रोपा गया। नगर वन में क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के सहयोग से पौधारोपण कराया गया है। पौधारोपण की देखभाल कंपनियों की ओर से की जाती है लेकिन निगरानी अधिकारियों को भी करनी है। यहां पर मियावाकी पद्धति से पौधे लगाए गए हैं। पौधारोपण को लेकर विभागों की कागजी कसरत अधिक नजर आती है। धरातल पर स्थिति उलट होती है। कई बार विभागों को पौधारोपण के लिए स्थान नहीं मिलता। बारिश के सीजन में भी कई विभागों को पौधारोपण के लिए स्थान नहीं मिला। कई बड़ी कंपनियां पौधारोपण के लिए सहमत थी लेकिन उन्हें समय पर स्थान नहीं दिया जा सका। इसके साथ ही कई बार ऐसी स्थिति होती है कि स्थान मिलने पर पौधे जमीन पर नहीं लगाए जाते।

सीएसआर के तहत कंपनियों को पौधे लगाने थे, देखभाल भी कंपनियों को करनी है। अभी कंपनियों का काम चल रहा है, इसलिए पौधे रखे हुए हैं। जो पौधे नष्ट हुए हैं, उनकी जगह दूसरे पौधे फरवरी में लगवाए जाएंगे। अधिक सर्दी में पौधे लगाने के बाद उनके नष्ट होने की आशंका रहती है।
संजय कुमार, सहायक वन संरक्षक

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