Oil Bathing Benefits: आज के समय में जहां रोजाना पानी से स्नान करना आम बात हो गई है, वहीं प्राचीन भारतीय परंपराओं में तेल से स्नान को सेहत का अहम हिस्सा माना जाता था। आयुर्वेद में इसे सिर्फ स्वच्छता नहीं, बल्कि शरीर को संतुलित रखने वाली एक प्रभावी निवारक विधि बताया गया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, तय अंतराल पर ऑयल बाथिंग अपनाने से नसों को मजबूती मिलती है, त्वचा और जोड़ों को पोषण मिलता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है। यही वजह है कि यह प्राचीन स्नान पद्धति आज भी स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है।
सिद्ध चिकित्सा और तेल स्नान का महत्व
सिद्ध चिकित्सा दक्षिण भारत की एक प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसकी जड़ें आयुर्वेद से जुड़ी मानी जाती हैं। इस चिकित्सा पद्धति में तेल स्नान को 11 प्रमुख उपचारों में शामिल किया गया है। माना जाता है कि नियमित तेल स्नान से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है और कई छोटी-बड़ी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।सबसे खास बात यह है कि यह एक आसान घरेलू उपाय है, जिसे रोजमर्रा की दिनचर्या में बिना किसी परेशानी के अपनाया जा सकता है।
तेल स्नान करने की सही विधि
- सबसे पहले सिर (स्कैल्प) और पूरे शरीर पर तिल का तेल या शुद्ध गाय का घी लगाएं।
- हल्के हाथों से मालिश करें, ताकि तेल त्वचा में अच्छे से समा जाए।
- तेल को कुछ समय तक शरीर पर लगा रहने दें।
- इसके बाद नहाने के लिए पारंपरिक हर्बल बाथ पाउडर (पंचकर्पम) का उपयोग करें।
- यह पाउडर त्वचा को साफ करने के साथ-साथ ताजगी भी देता है और केमिकल साबुनों की जरूरत नहीं पड़ती।
किन समस्याओं में फायदेमंद है तेल स्नान
- शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है।
- मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी-जुकाम और बुखार से बचाव।
- मांसपेशियों और नसों को मजबूती।
- शरीर के मोटर फंक्शन बेहतर होते हैं।
- त्वचा, आंखें और अन्य संवेदी अंग स्वस्थ रहते हैं।
ऑयल बाथ के लिए तेल तैयार करने की विधि
घर पर ऑयल बाथिंग के लिए तेल आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए एक कढ़ाई में तिल का तेल हल्का गर्म करें। तेल गुनगुना होते ही उसमें 10–15 साबुत काली मिर्च डालें और गैस बंद कर दें। इसके बाद डंठल सहित साबुत लाल मिर्च और छिलके सहित 10–15 लहसुन की कलियां तेल में डालें। अब तेल को कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। इस तरह तैयार किया गया तेल मालिश और स्नान, दोनों के लिए उपयोग किया जा सकता है और यह शरीर को अंदर से पोषण देने में मदद करता है।


