चित्रकूट के बहुचर्चित 43.13 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले में विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। एसआईटी अब 2014 के बाद हुए लेन-देन की परतें खोलने में जुटी है। जांच के दौरान पांच संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित किया गया है, जिनमें भारी मात्रा में संदिग्ध धनराशि के ट्रांसफर की बात सामने आई है। इन खातों में आई रकम के स्रोत और उसके आगे ट्रांसफर की कड़ियां जोड़ने के लिए बैंककर्मियों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही, पेंशनरों और बिचौलियों के खातों में भेजी गई रकम का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। 2014 के बाद लेन-देन में सामने आई कई परतें रविवार को एसआईटी की टीम पूरे दिन 2014 से जुड़े खातों की जांच में जुटी रही। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ खातों में संदिग्ध तरीके से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। टीम ने संबंधित बैंकों से डिजिटल रिकॉर्ड, स्टेटमेंट और दस्तावेजों का मिलान कराया। कई मामलों में लेन-देन की प्रक्रिया सामान्य नहीं पाई गई, जिससे घोटाले की रकम को इधर-उधर करने की आशंका गहरी हो गई है। 8 लाख के गबन में अजय यादव गिरफ्तार इस मामले में राजापुर थाना क्षेत्र के अतर सुई गांव निवासी अजय यादव को गिरफ्तार किया गया है। उस पर करीब 8 लाख रुपए के गबन में संलिप्त होने का आरोप है। एसआईटी की पूछताछ में सामने आया है कि अजय यादव के खाते से जुड़े लेन-देन का संबंध अन्य संदिग्ध खातों से भी जुड़ सकता है। गिरफ्तारी के बाद उससे पूरे नेटवर्क और पैसों की आवाजाही को लेकर पूछताछ की जा रही है। वरिष्ठ कोषाधिकारी और कर्मचारियों पर शिकंजे की तैयारी एसआईटी की अगली कार्रवाई में उस समय के वरिष्ठ कोषाधिकारी सहित विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई नामजद अधिकारियों और कर्मचारियों से संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया था, लेकिन अब तक पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसे जांच में सहयोग न करने के तौर पर देखा जा रहा है। ईडी की एंट्री के बाद जांच एजेंसियां अलर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े रिकॉर्ड मंगवाए जाने के बाद एसआईटी ने भी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को दोबारा पत्र लिखकर जांच में सहयोग मांगा है। पुलिस की ओर से अब तक दो बार ईओडब्ल्यू को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर एसआईटी ने एक बार फिर अब तक की जांच की स्थिति और उपलब्ध तथ्यों की जानकारी देते हुए नया पत्र भेजा है। संपत्ति रिकॉर्ड न मिलने पर सख्ती के संकेत जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने उपनिबंधक कार्यालय को निर्देश दिए हैं कि घोटाले में नामजद अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की खरीद-बिक्री का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, एक माह बीतने के बाद भी पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलने से जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, अब कानूनी कार्रवाई और नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। साक्ष्य सुरक्षित करने में जुटी SIT एसआईटी टीम घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने में भी जुटी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


