एनएच-46 बरेठा घाट पर व्यवस्था फिर हुई फेल,खराब ट्रक ने रोकी रफ्तार, जाम में फंसी एंबुलेंस

एनएच-46 बरेठा घाट पर व्यवस्था फिर हुई फेल,खराब ट्रक ने रोकी रफ्तार, जाम में फंसी एंबुलेंस

घंटों जाम में फंसे रहे यात्री।

बैतूल/शाहपुर। नेशनल हाईवे-46 पर स्थित बरेठा घाट एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर यातायात प्रबंधन का उदाहरण बन गया। मंगलवार को घाट क्षेत्र में लगे लंबे जाम ने न केवल आम यात्रियों को परेशान किया, बल्कि आपात सेवाओं की भी पोल खोल दी। इटारसी से बैतूल की ओर जा रहा एक भारी ट्रक सुबह करीब 12 बजे घाट पर पहुंचते ही खराब हो गया। संकरी सडक़ और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में ट्रक बीच सडक़ पर ही खड़ा रह गया, जिससे एक लेन पूरी तरह बंद हो गई। ट्रक खराब होते ही दोनों ओर वाहनों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। देखते ही देखते करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बैतूल की ओर मरीज लेकर जा रही एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। एंबुलेंस के जाम में फंसे होने की खबर से मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिली। सवाल यह है कि यदि समय पर मरीज को अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?। बरेठा घाट की सडक़ें पहले से ही बदहाल रही हैं। हाल ही में यहां सुधार कार्य किए जाने के दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यातायात प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। घाट की संकरी सडक़, भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और ट्रैफिक पुलिस की सीमित मौजूदगी हर छोटी घटना को बड़े जाम में बदल देती है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वाहन घंटों तक रेंग-रेंग कर निकलते रहे। न तो तुरंत क्रेन की व्यवस्था की गई और न ही भारी वाहनों को नियंत्रित करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नजर आई। जाम की सूचना मिलने के बाद यातायात व्यवस्था संभालने के प्रयास जरूर किए गए, लेकिन तब तक हालात काबू से बाहर हो चुके थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरेठा घाट पर जाम अब अपवाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। इसके बावजूद न तो प्रशासन ने स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए हैं और न ही भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने की कोई ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

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