फिंगरप्रिंट-डीएनए , बाल और रक्त के नमूने होंगे सुरक्षित:नवादा पुलिस को मिली अपराध स्थल किट, SP बोले-फोरेंसिक साक्ष्य अपराध जांच में बेहद महत्वपूर्ण

फिंगरप्रिंट-डीएनए , बाल और रक्त के नमूने होंगे सुरक्षित:नवादा पुलिस को मिली अपराध स्थल किट, SP बोले-फोरेंसिक साक्ष्य अपराध जांच में बेहद महत्वपूर्ण

नवादा में अपराध जांच को वैज्ञानिक और मजबूत बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विभिन्न थाना प्रभारियों को अपराध स्थल उपकरण किट (क्राइम सीन किट) वितरित की गईं। इन किटों का मुख्य उद्देश्य अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट, डीएनए, बाल, रक्त के नमूने, फुटप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित एकत्र करना है। इससे अपराधियों के विरुद्ध अदालत में ठोस और अकाट्य सबूत पेश किए जा सकेंगे। अब प्रारंभिक जांच ही होगी वैज्ञानिक, नहीं बचेंगे अपराधी पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने थाना प्रभारियों को संबोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य अपराध जांच में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में सबूतों के गलत संग्रहण या दूषित होने के कारण अपराधी बरी हो जाते हैं। इन किटों के उपयोग से थाना स्तर पर ही प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक हो जाएगी, जिससे दोषसिद्धि दर में वृद्धि होगी और अपराधियों में पुलिस का भय बढ़ेगा। यह पहल बिहार पुलिस के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। एसपी धीमान के नेतृत्व में नवादा जिले में पिछले कुछ महीनों में अपराध नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें साइबर क्राइम पर विशेष अभियान, थानों में फेरबदल और रात्रि गश्ती शामिल हैं। इन किटों के वितरण से जिले के सभी प्रमुख थानों में फोरेंसिक जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और प्रभावी बनेगी। जिले के पुलिस अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे जांच की गुणवत्ता बढ़ने के साथ-साथ आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। एसपी धीमान ने सभी थाना प्रभारियों को किट के उपयोग के लिए प्रशिक्षण आयोजित करने के भी निर्देश दिए हैं। यह कदम नवादा पुलिस की अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है और न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक होगा। नवादा में अपराध जांच को वैज्ञानिक और मजबूत बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विभिन्न थाना प्रभारियों को अपराध स्थल उपकरण किट (क्राइम सीन किट) वितरित की गईं। इन किटों का मुख्य उद्देश्य अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट, डीएनए, बाल, रक्त के नमूने, फुटप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित एकत्र करना है। इससे अपराधियों के विरुद्ध अदालत में ठोस और अकाट्य सबूत पेश किए जा सकेंगे। अब प्रारंभिक जांच ही होगी वैज्ञानिक, नहीं बचेंगे अपराधी पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान ने थाना प्रभारियों को संबोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक साक्ष्य अपराध जांच में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में सबूतों के गलत संग्रहण या दूषित होने के कारण अपराधी बरी हो जाते हैं। इन किटों के उपयोग से थाना स्तर पर ही प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक हो जाएगी, जिससे दोषसिद्धि दर में वृद्धि होगी और अपराधियों में पुलिस का भय बढ़ेगा। यह पहल बिहार पुलिस के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। एसपी धीमान के नेतृत्व में नवादा जिले में पिछले कुछ महीनों में अपराध नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें साइबर क्राइम पर विशेष अभियान, थानों में फेरबदल और रात्रि गश्ती शामिल हैं। इन किटों के वितरण से जिले के सभी प्रमुख थानों में फोरेंसिक जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और प्रभावी बनेगी। जिले के पुलिस अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे जांच की गुणवत्ता बढ़ने के साथ-साथ आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। एसपी धीमान ने सभी थाना प्रभारियों को किट के उपयोग के लिए प्रशिक्षण आयोजित करने के भी निर्देश दिए हैं। यह कदम नवादा पुलिस की अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है और न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने में सहायक होगा।  

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