भागलपुर में शीतलहर और कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। ठंड और नमी भरे मौसम का सीधा असर मूर्तिकारों के रोजगार पर पड़ रहा है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं ठीक से सूख नहीं पा रही है। इससे मूर्तिकारों को सरस्वती पूजा के लिए मिले भारी ऑर्डरों को समय पर पूरा करने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सरस्वती पूजा के मद्देनजर मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं, लेकिन ठंडा मौसम उनके काम की गति धीमी कर रहा है। प्रतिमाओं को सूखने में सामान्य से कहीं अधिक समय लग रहा है, जिससे रंग-रोगन और सजावट का काम भी प्रभावित हो रहा है। इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। शीतलहर के कारण काम प्रभावित खंजरपुर के मूर्तिकार टुनटुन पंडित ने बताया कि इलाके में लगभग 20 से 25 परिवार मूर्ति निर्माण के कार्य से ही घर चलाते हैं। इस बार ठंड के कारण प्रतिमाएं समय पर सूख नहीं पा रही हैं, जिससे ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है। कजरैली के बब्लू पंडित, नाथनगर के मुकेश पंडित, अम्बे के राजेश पंडित और नरगा के अमित पंडित सहित कई कुम्हारों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पूरे जिले में इस बार लगभग 50 हजार से अधिक प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर आमतौर पर इस सीजन में रोजगार का एक बड़ा सहारा होते हैं, लेकिन लगातार शीतलहर के कारण काम प्रभावित हो रहा है। मुनाफा कम, लागत बढ़ने की आशंका मूर्तिकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें अतिरिक्त संसाधनों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे खर्च बढ़ेगा और मुनाफा कम होगा। फिलहाल, सभी की नजरें मौसम के मिजाज पर टिकी है, ताकि सरस्वती पूजा से पहले प्रतिमाएं समय पर तैयार हो सके। भागलपुर में शीतलहर और कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। ठंड और नमी भरे मौसम का सीधा असर मूर्तिकारों के रोजगार पर पड़ रहा है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं ठीक से सूख नहीं पा रही है। इससे मूर्तिकारों को सरस्वती पूजा के लिए मिले भारी ऑर्डरों को समय पर पूरा करने में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सरस्वती पूजा के मद्देनजर मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं, लेकिन ठंडा मौसम उनके काम की गति धीमी कर रहा है। प्रतिमाओं को सूखने में सामान्य से कहीं अधिक समय लग रहा है, जिससे रंग-रोगन और सजावट का काम भी प्रभावित हो रहा है। इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। शीतलहर के कारण काम प्रभावित खंजरपुर के मूर्तिकार टुनटुन पंडित ने बताया कि इलाके में लगभग 20 से 25 परिवार मूर्ति निर्माण के कार्य से ही घर चलाते हैं। इस बार ठंड के कारण प्रतिमाएं समय पर सूख नहीं पा रही हैं, जिससे ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है। कजरैली के बब्लू पंडित, नाथनगर के मुकेश पंडित, अम्बे के राजेश पंडित और नरगा के अमित पंडित सहित कई कुम्हारों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पूरे जिले में इस बार लगभग 50 हजार से अधिक प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर आमतौर पर इस सीजन में रोजगार का एक बड़ा सहारा होते हैं, लेकिन लगातार शीतलहर के कारण काम प्रभावित हो रहा है। मुनाफा कम, लागत बढ़ने की आशंका मूर्तिकारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें अतिरिक्त संसाधनों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे खर्च बढ़ेगा और मुनाफा कम होगा। फिलहाल, सभी की नजरें मौसम के मिजाज पर टिकी है, ताकि सरस्वती पूजा से पहले प्रतिमाएं समय पर तैयार हो सके।


