184 करोड़ रुपए से संवरेगी तोपचांची झील, इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी

184 करोड़ रुपए से संवरेगी तोपचांची झील, इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी

झारखंड की प्रसिद्ध तोपचांची झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण के उद्देश्य से इसके लिए 184 करोड़ की योजना तैयार की गई है। पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर बनने वाली इस परियोजना को नगर विकास व पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मंजूरी दी है। नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकरण को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। 214 एकड़ में फैली है झील… झील धनबाद जिले में एनएच पर है और बोकारो रेलवे स्टेशन से 41 किमी दूर है। पारसनाथ पहाड़ियों और जंगलों के बीच झील 214 एकड़ में फैली है। परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य जलाशय के जल स्रोत में सुधार और आसपास की पारिस्थितिकी का संरक्षण है। पीपीपी मोड में क्या होगा काम परियोजना क्षेत्र झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण के नियंत्रण में है। राज्य सरकार कोई खर्च नहीं करेगी। बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर टेंडर के जरिए निजी डेवलपर का चयन होगा। पट्टा अवधि: 35 साल निर्माण व विकास: 2 साल संचालन व रखरखाव: 33 साल चयनित डेवलपर स्पेशल परपस व्हीकल बनाएगा डेवलपर जेएमएडीए को हर साल 5 करोड़ देगा तीसरे साल से 35वें साल तक हर तीसरे साल भुगतान में 10% की बढ़ोतरी होगी जुडको द्वारा तैयार परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, 33 साल में जेएमडीए को इससे करीब 4921 करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। वॉकिंग ट्रैक, लाइटिंग, हरियाली व लैंडस्केपिंग होगी योजना के तहत झील को आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में संवारा जाएगा। रिसोर्ट, पार्क, स्टाफ क्वार्टर, सोलर पैनल, झील के चारों ओर वॉकिंग ट्रैक, लाइटिंग, हरियाली व लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था, नौकायन, बच्चों के मनोरंजन साधन, सुरक्षा व स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं होंगी। झील के पानी की गुणवत्ता व पर्यावरण संतुलन के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। सौंदर्यीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा, ताकि प्राकृतिक संरचना को नुकसान न पहुंचे। परियोजना बनने पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। झील… झील धनबाद जिले में एनएच पर है और बोकारो रेलवे स्टेशन से 41 किमी दूर है। पारसनाथ पहाड़ियों और जंगलों के बीच झील 214 एकड़ में फैली है। परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य जलाशय के जल स्रोत में सुधार और आसपास की पारिस्थितिकी का संरक्षण है। झारखंड की प्रसिद्ध तोपचांची झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण के उद्देश्य से इसके लिए 184 करोड़ की योजना तैयार की गई है। पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर बनने वाली इस परियोजना को नगर विकास व पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मंजूरी दी है। नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकरण को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। 214 एकड़ में फैली है झील… झील धनबाद जिले में एनएच पर है और बोकारो रेलवे स्टेशन से 41 किमी दूर है। पारसनाथ पहाड़ियों और जंगलों के बीच झील 214 एकड़ में फैली है। परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य जलाशय के जल स्रोत में सुधार और आसपास की पारिस्थितिकी का संरक्षण है। पीपीपी मोड में क्या होगा काम परियोजना क्षेत्र झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण के नियंत्रण में है। राज्य सरकार कोई खर्च नहीं करेगी। बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर टेंडर के जरिए निजी डेवलपर का चयन होगा। पट्टा अवधि: 35 साल निर्माण व विकास: 2 साल संचालन व रखरखाव: 33 साल चयनित डेवलपर स्पेशल परपस व्हीकल बनाएगा डेवलपर जेएमएडीए को हर साल 5 करोड़ देगा तीसरे साल से 35वें साल तक हर तीसरे साल भुगतान में 10% की बढ़ोतरी होगी जुडको द्वारा तैयार परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, 33 साल में जेएमडीए को इससे करीब 4921 करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। वॉकिंग ट्रैक, लाइटिंग, हरियाली व लैंडस्केपिंग होगी योजना के तहत झील को आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में संवारा जाएगा। रिसोर्ट, पार्क, स्टाफ क्वार्टर, सोलर पैनल, झील के चारों ओर वॉकिंग ट्रैक, लाइटिंग, हरियाली व लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था, नौकायन, बच्चों के मनोरंजन साधन, सुरक्षा व स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं होंगी। झील के पानी की गुणवत्ता व पर्यावरण संतुलन के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। सौंदर्यीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा, ताकि प्राकृतिक संरचना को नुकसान न पहुंचे। परियोजना बनने पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। झील… झील धनबाद जिले में एनएच पर है और बोकारो रेलवे स्टेशन से 41 किमी दूर है। पारसनाथ पहाड़ियों और जंगलों के बीच झील 214 एकड़ में फैली है। परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य जलाशय के जल स्रोत में सुधार और आसपास की पारिस्थितिकी का संरक्षण है।  

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