‘आरोपियों को बेल नहीं, उन्हें बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए। दिल्ली दंगे के 5 आरोपियों को बेल मिलने के बाद हम लोग दुखी हैं, कोर्ट का फैसला ठीक नहीं है।’ ये बातें भोजपुर जिले के चांदी प्रखंड के सलेमपुर गांव के रहने वाले सूबेदार सिंह के 32 साल के बेटे दीपक कुमार की पत्नी, बेटियों और भाई ने दैनिक भास्कर से कही है। दरअसल, दिल्ली दंगे के दौरान दंगाइयों ने बाजार जाने के दौरान भोजपुर के दीपक कुमार की नाम पूछने के बाद निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के 5 आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। दिल्ली दंगा में भोजपुर की दीपक की कैसे हत्या हुई थी? दंगे के दौरान दीपक के साथ क्या हुआ था? दिल्ली दंगों के 5 आरोपियों को जमानत मिलने पर दीपक की पत्नी और बच्चों का क्या कहना है? दीपक के परिवार वालों ने मुआवजा और सरकारी मदद को लेकर क्या कहा है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, दीपक के साथ 25 फरवरी 2020 को क्या हुआ था? 25 फरवरी 2020… दीपक घटना वाले दिन किसी काम से मार्केट जा रहे थे। इस दौरान कुछ दंगाइयों ने दीपक को रोका। पहले दीपक से नाम पूछा और फिर पहले लोहे के रॉड से मारकर अधमरा कर दिया। इसके बाद चाकू और तलवार से शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। दीपक की जब डेडबॉडी मिली थी, उसके मुंह में दांत नहीं थे, शरीर के हर अंगों पर दर्जनों जख्म के निशान पाए गए थे। दीपक दिल्ली के शहादड़ा में रोलिंग मिल कंपनी में मजदूरी का काम करता था। दीपक, दो बेटियां खुशी और रिया और एक बेटा रितिक के पिता थें। घटना फरवरी की है, एक महीने बाद दीपक होली में घर आने वाला थें। पत्नी ने बताया कि घटना वाले दिन दीपक दोपहर करीब 12 बजे काम खत्म करने के बाद बेटे-बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े और मिठाई खरीदने के लिए बाजार निकले थे। दीपक को यह नहीं पता था कि दिल्ली में दंगा भड़का हुआ है। जैसे ही दीपक मंडोली इलाके में पहुंचे, दंगाइयों ने फायरिंग और आगजनी शुरू कर दी। तब दीपक ने अपने साथ रहने वाले अन्य लोगों को घटना की सूचना दी कि इलाके में दंगा भड़क गया है। तुम लोग घर से नहीं निकलना। इसी बीच दीपक उत्तरी पूर्वी जिले के ज्योति नगर इलाके में दंगाइयों के चंगुल में फंस गए। करीब डेढ़ घंटे के बाद उनकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। पुलिस ने दीपक की डेड बॉडी को अस्पताल पहुंचाकर उसके परिजन को सूचना दी थी। इसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया होने के बाद दीपक के शव को 28 फरवरी, 2020 को उसके पैतृक गांव सलेमपुर लाया गया था। पत्नी बोली- सरकार ने मदद बंद की, बेटियों की शादी और पढ़ाई कैसे होगी दीपक की पत्नी सरिता देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि आरोपियों को बेल नहीं मिलना चाहिए था, उन्हें अब तक फांसी मिलनी चाहिए थी। ऐसे अपराधियों के लिए कोई विशेष कानून क्यों नहीं है, जिसमें जल्द फैसला सुनाकर मौत की घाट उतार दिया जाए। हमारी सरकार से मांग है कि बेल ना देकर सभी को मौत की सजा दी जानी चाहिए। दंगाइयों के कारण आज मैं अपनी दो बेटियों और एक बेटे को लेकर दर-दर मदद के लिए भटक रही हूं। सरिता देवी ने कहा कि घटना के बाद दिल्ली सरकार की ओर से 10 लाख रुपए, सांप्रदायिक हिंसा, आतंकवादी हिंसा, जातीय हिंसा के शिकार बच्चों की देख-रेख एवं पुनर्वास के लिए ‘Assist’ परियोजना के तहत साल में तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए 15-15 हजार यानी 45 हजार तीन साल तक दिए। हिंसा की घटना के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से चंदा इकट्ठा कर एक लाख की राशि दी गई थी। लेकिन आज बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा को पिछले तीन सालों से बंद कर दिया गया है। सरिता ने बताया कि मेरे पति काफी खुश थे। बच्चों से पूछा था कि तुमलोगों को क्या चाहिए। कपड़े खरीदने के लिए मार्केट जा ही रहे थे, तभी दंगाइयों ने चाकू, तलवार से उन पर हमला कर दिया था। हमलोगों को मोबाइल के जरिए सूचना मिली थी। आज ऐसी हालत है कि कोई बात सुनने वाला नहीं है। बच्चों की पढ़ाई में काफी परेशानी हो रही है। सरकार से हमारी मांग है कि दंगाइयों को बेल ना दे, बच्चों की पढ़ाई की जिम्मा को उठाए। बेटी बोली- आरोपियों को बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए मृत दीपक की बड़ी बेटी खुशी ने बताया कि वह 9वीं क्लास की छात्रा है। गांव की ही इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई करती है। मंझला भाई रितिक क्लास 6 और छोटी बहन थर्ड क्लास में पढ़ती है। खुशी बताया कि सभी भाई बहन की पढ़ाई में काफी परेशानी होती है। सरकार की ओर से पैसा दिया जाता था, लेकिन तीन साल से पैसा भी नहीं आ रहा है। आज हालात ऐसे है कि ट्यूशन पढ़ना तो दूर अब इंग्लिश स्कूल में भी नहीं जा सकते हैं। इस सेशन से सरकारी स्कूल में दाखिला होने वाला है। क्योंकि मां सरकार के आश्वासन के भरोसे पर थी। बड़ी बेटी खुशी ने बताया कि मेरे पापा का सपना था कि मैं पढ़ाई करके सरकारी टीचर बनूं और गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाकर आगे बढ़ाऊं। आज सब सपना टूट गया है। घर में अच्छे से खाना तक बनाना मुश्किल हो गया है। खुशी ने कहा कि हमलोगों के साथ बहुत गलत हुआ है, सभी आरोपियों को बेल ना देकर बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए, क्योंकि उन लोगों ने बिना किसी कारण मेरे पिता की हत्या की है। कोर्ट के फैसले से मेरा परिवार खुश नहीं है। अब सरकार के तरफ से कोई मदद नहीं दी जा रही है। चचेरे भाई देव कुमार ने कहा- धारदार हथियार से शरीर पर हमले के कई निशान थे दीपक के चचेरे भाई देव कुमार ने कहा कि आज का फैसला गलत है। इतने निर्मम तरीके से भाई की हत्या की गई, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया है। आरोपियों को सजा देने में इतना वक्त नहीं लगाना चाहिए, चौक चौराहे पर गोली मार देना चाहिए। दीपक कंपनी से काम कर लौट रहा था । होली का कपड़ा खरीदने गया था। इसी दौरान दंगाइयों ने नाम पूछा, फिर उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी। हमलोगों ने जब श्मशान घाट पर दीपक की लाश देखी थी तो पता चला था कि उसके मुंह में एक भी दांत नहीं थे। शरीर पर धारदार हथियार से काटा गया था। ऐसी हत्या तो कोई जानवर के साथ भी नहीं किया जाता है, जो दीपक के साथ दंगाइयों ने किया था। डेड बॉडी की स्थिति को सोचकर आज भी कलेजा कांप जाता है। मेरे भाई के हत्यारों को आज सरकार बेल दे रही है। उन्हें चौक चौराहे पर गोली मारना भी कम होगा। घटना के छह साल तक मामले को उलझाकर रखा गया। आज उन्हें बेल दिया जा रहा है। बच्चों के भरण पोषण के लिए 2023 तक पैसा दिया गया। हमने कई संबंधित अधिकारियों से मिले। दिल्ली दंगे के जितने भी पीड़ित परिवार हैं, उनके साथ आज गलत हुआ देव कुमार ने कहा कि दिल्ली दंगा के जितने भी पीड़ित परिवार हैं, उनके साथ आज गलत हुआ है। सरकार कोई इस विषय पर संज्ञान लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश उनको भी पीड़ित परिवारों की आवाज को सुननी चाहिए। इस फैसले पर क्या न्यायपालिका पर हम लोगों का भरोसा रहेगा। निर्मम हत्या करने वाले पर कुछ नहीं होता है। इस फैसले पर देश में क्या मैसेज जा रहा है। देव कुमार ने कहा कि पीट-पीटकर हत्या कर दो और कोर्ट तुम्हारा कुछ नहीं करेगा। इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। न्यायपालिका पर भरोसा उठ रहा है। जेल से छूट जाने के बाद आरोपी सड़क पर जाकर वही काम करेंगे। वे लोग यही बोलेंगे कि हम लोगों को कुछ नहीं होगा। हम लोग घटना करते जाएंगे, कानून छोड़ता जाएगा। हम माननीय न्यायाधीशों से मांग करते कि इस फैसले पर पीड़ित परिवारों का दर्द समझकर इस फैसले पर पुनः विचार करें। ‘आरोपियों को बेल नहीं, उन्हें बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए। दिल्ली दंगे के 5 आरोपियों को बेल मिलने के बाद हम लोग दुखी हैं, कोर्ट का फैसला ठीक नहीं है।’ ये बातें भोजपुर जिले के चांदी प्रखंड के सलेमपुर गांव के रहने वाले सूबेदार सिंह के 32 साल के बेटे दीपक कुमार की पत्नी, बेटियों और भाई ने दैनिक भास्कर से कही है। दरअसल, दिल्ली दंगे के दौरान दंगाइयों ने बाजार जाने के दौरान भोजपुर के दीपक कुमार की नाम पूछने के बाद निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के 5 आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। दिल्ली दंगा में भोजपुर की दीपक की कैसे हत्या हुई थी? दंगे के दौरान दीपक के साथ क्या हुआ था? दिल्ली दंगों के 5 आरोपियों को जमानत मिलने पर दीपक की पत्नी और बच्चों का क्या कहना है? दीपक के परिवार वालों ने मुआवजा और सरकारी मदद को लेकर क्या कहा है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, दीपक के साथ 25 फरवरी 2020 को क्या हुआ था? 25 फरवरी 2020… दीपक घटना वाले दिन किसी काम से मार्केट जा रहे थे। इस दौरान कुछ दंगाइयों ने दीपक को रोका। पहले दीपक से नाम पूछा और फिर पहले लोहे के रॉड से मारकर अधमरा कर दिया। इसके बाद चाकू और तलवार से शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। दीपक की जब डेडबॉडी मिली थी, उसके मुंह में दांत नहीं थे, शरीर के हर अंगों पर दर्जनों जख्म के निशान पाए गए थे। दीपक दिल्ली के शहादड़ा में रोलिंग मिल कंपनी में मजदूरी का काम करता था। दीपक, दो बेटियां खुशी और रिया और एक बेटा रितिक के पिता थें। घटना फरवरी की है, एक महीने बाद दीपक होली में घर आने वाला थें। पत्नी ने बताया कि घटना वाले दिन दीपक दोपहर करीब 12 बजे काम खत्म करने के बाद बेटे-बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े और मिठाई खरीदने के लिए बाजार निकले थे। दीपक को यह नहीं पता था कि दिल्ली में दंगा भड़का हुआ है। जैसे ही दीपक मंडोली इलाके में पहुंचे, दंगाइयों ने फायरिंग और आगजनी शुरू कर दी। तब दीपक ने अपने साथ रहने वाले अन्य लोगों को घटना की सूचना दी कि इलाके में दंगा भड़क गया है। तुम लोग घर से नहीं निकलना। इसी बीच दीपक उत्तरी पूर्वी जिले के ज्योति नगर इलाके में दंगाइयों के चंगुल में फंस गए। करीब डेढ़ घंटे के बाद उनकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। पुलिस ने दीपक की डेड बॉडी को अस्पताल पहुंचाकर उसके परिजन को सूचना दी थी। इसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया होने के बाद दीपक के शव को 28 फरवरी, 2020 को उसके पैतृक गांव सलेमपुर लाया गया था। पत्नी बोली- सरकार ने मदद बंद की, बेटियों की शादी और पढ़ाई कैसे होगी दीपक की पत्नी सरिता देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि आरोपियों को बेल नहीं मिलना चाहिए था, उन्हें अब तक फांसी मिलनी चाहिए थी। ऐसे अपराधियों के लिए कोई विशेष कानून क्यों नहीं है, जिसमें जल्द फैसला सुनाकर मौत की घाट उतार दिया जाए। हमारी सरकार से मांग है कि बेल ना देकर सभी को मौत की सजा दी जानी चाहिए। दंगाइयों के कारण आज मैं अपनी दो बेटियों और एक बेटे को लेकर दर-दर मदद के लिए भटक रही हूं। सरिता देवी ने कहा कि घटना के बाद दिल्ली सरकार की ओर से 10 लाख रुपए, सांप्रदायिक हिंसा, आतंकवादी हिंसा, जातीय हिंसा के शिकार बच्चों की देख-रेख एवं पुनर्वास के लिए ‘Assist’ परियोजना के तहत साल में तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए 15-15 हजार यानी 45 हजार तीन साल तक दिए। हिंसा की घटना के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से चंदा इकट्ठा कर एक लाख की राशि दी गई थी। लेकिन आज बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा को पिछले तीन सालों से बंद कर दिया गया है। सरिता ने बताया कि मेरे पति काफी खुश थे। बच्चों से पूछा था कि तुमलोगों को क्या चाहिए। कपड़े खरीदने के लिए मार्केट जा ही रहे थे, तभी दंगाइयों ने चाकू, तलवार से उन पर हमला कर दिया था। हमलोगों को मोबाइल के जरिए सूचना मिली थी। आज ऐसी हालत है कि कोई बात सुनने वाला नहीं है। बच्चों की पढ़ाई में काफी परेशानी हो रही है। सरकार से हमारी मांग है कि दंगाइयों को बेल ना दे, बच्चों की पढ़ाई की जिम्मा को उठाए। बेटी बोली- आरोपियों को बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए मृत दीपक की बड़ी बेटी खुशी ने बताया कि वह 9वीं क्लास की छात्रा है। गांव की ही इंग्लिश स्कूल में पढ़ाई करती है। मंझला भाई रितिक क्लास 6 और छोटी बहन थर्ड क्लास में पढ़ती है। खुशी बताया कि सभी भाई बहन की पढ़ाई में काफी परेशानी होती है। सरकार की ओर से पैसा दिया जाता था, लेकिन तीन साल से पैसा भी नहीं आ रहा है। आज हालात ऐसे है कि ट्यूशन पढ़ना तो दूर अब इंग्लिश स्कूल में भी नहीं जा सकते हैं। इस सेशन से सरकारी स्कूल में दाखिला होने वाला है। क्योंकि मां सरकार के आश्वासन के भरोसे पर थी। बड़ी बेटी खुशी ने बताया कि मेरे पापा का सपना था कि मैं पढ़ाई करके सरकारी टीचर बनूं और गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाकर आगे बढ़ाऊं। आज सब सपना टूट गया है। घर में अच्छे से खाना तक बनाना मुश्किल हो गया है। खुशी ने कहा कि हमलोगों के साथ बहुत गलत हुआ है, सभी आरोपियों को बेल ना देकर बीच चौराहे पर गोली मार देनी चाहिए, क्योंकि उन लोगों ने बिना किसी कारण मेरे पिता की हत्या की है। कोर्ट के फैसले से मेरा परिवार खुश नहीं है। अब सरकार के तरफ से कोई मदद नहीं दी जा रही है। चचेरे भाई देव कुमार ने कहा- धारदार हथियार से शरीर पर हमले के कई निशान थे दीपक के चचेरे भाई देव कुमार ने कहा कि आज का फैसला गलत है। इतने निर्मम तरीके से भाई की हत्या की गई, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया है। आरोपियों को सजा देने में इतना वक्त नहीं लगाना चाहिए, चौक चौराहे पर गोली मार देना चाहिए। दीपक कंपनी से काम कर लौट रहा था । होली का कपड़ा खरीदने गया था। इसी दौरान दंगाइयों ने नाम पूछा, फिर उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी। हमलोगों ने जब श्मशान घाट पर दीपक की लाश देखी थी तो पता चला था कि उसके मुंह में एक भी दांत नहीं थे। शरीर पर धारदार हथियार से काटा गया था। ऐसी हत्या तो कोई जानवर के साथ भी नहीं किया जाता है, जो दीपक के साथ दंगाइयों ने किया था। डेड बॉडी की स्थिति को सोचकर आज भी कलेजा कांप जाता है। मेरे भाई के हत्यारों को आज सरकार बेल दे रही है। उन्हें चौक चौराहे पर गोली मारना भी कम होगा। घटना के छह साल तक मामले को उलझाकर रखा गया। आज उन्हें बेल दिया जा रहा है। बच्चों के भरण पोषण के लिए 2023 तक पैसा दिया गया। हमने कई संबंधित अधिकारियों से मिले। दिल्ली दंगे के जितने भी पीड़ित परिवार हैं, उनके साथ आज गलत हुआ देव कुमार ने कहा कि दिल्ली दंगा के जितने भी पीड़ित परिवार हैं, उनके साथ आज गलत हुआ है। सरकार कोई इस विषय पर संज्ञान लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश उनको भी पीड़ित परिवारों की आवाज को सुननी चाहिए। इस फैसले पर क्या न्यायपालिका पर हम लोगों का भरोसा रहेगा। निर्मम हत्या करने वाले पर कुछ नहीं होता है। इस फैसले पर देश में क्या मैसेज जा रहा है। देव कुमार ने कहा कि पीट-पीटकर हत्या कर दो और कोर्ट तुम्हारा कुछ नहीं करेगा। इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। न्यायपालिका पर भरोसा उठ रहा है। जेल से छूट जाने के बाद आरोपी सड़क पर जाकर वही काम करेंगे। वे लोग यही बोलेंगे कि हम लोगों को कुछ नहीं होगा। हम लोग घटना करते जाएंगे, कानून छोड़ता जाएगा। हम माननीय न्यायाधीशों से मांग करते कि इस फैसले पर पीड़ित परिवारों का दर्द समझकर इस फैसले पर पुनः विचार करें।


