केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना खैरथल-तिजारा जिले में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के किशनगढ़बास डिवीजन में योजना के घटक ‘ए’ और घटक ‘सी’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे किसानों को सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा के साथ अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है। पीएम-कुसुम योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, किसानों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करना, बिजली वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सहायक अभियंता भीम सिंह ने बताया- किशनगढ़बास डिवीजन में पीएम-कुसुम योजना के तहत अब तक घटक ‘ए’ में 8 मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित अथवा आवंटित किए जा चुके हैं।वहीं, घटक ‘सी’ के अंतर्गत 30.39 मेगावाट क्षमता के कृषि पंपों का सोलराइजेशन किया गया है। यह उपलब्धि जिले में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। घटक ‘ए’ के तहत किसानों या भूमि स्वामियों की जमीन पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाते हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित बिजली को ग्रिड में प्रवाहित किया जाता है,जिसे डिस्कॉम द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदा जाता है।इससे किसानों को लंबे समय तक स्थिर और सुनिश्चित आय का स्रोत प्राप्त होता है। वहीं,घटक ‘सी’ के अंतर्गत पहले से ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है।इससे किसान दिन के समय निर्बाध रूप से सिंचाई कर पा रहे हैं और बिजली कटौती की समस्या से राहत मिली है।आवश्यकता से अधिक सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजकर किसान अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, सरल और पारदर्शी बनाया गया है। किसान पीएम-कुसुम की आधिकारिक वेबसाइट या राज्य नोडल एजेंसी के पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। सत्यापन और तकनीकी जांच के बाद स्वीकृति मिलने पर सोलर संयंत्र या पैनल की स्थापना की जाती है।


