झारखंड में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा के रहीमपुर रुदौली गांव स्थित घर पर सोमवार को सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह पहुंचे। उन्होंने शहीद इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्र के तेल्य चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मौके पर दरभंगा रेंज की डीआईजी डा स्वप्ना गौतम के अलावा एसपी अरविंद प्रताप सिंह आदि भी मौजूद रहे। मौके पर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस मौके पर सीआरपीएफ के पुलिस महानिदेशक ने शहीद के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकारी प्रावधान के अनुसार जो कुछ मिलना है, वो समय सीमा के अंदर परिवार को उपलब्ध हो जाएगा, इसके लिए परिवार को परेशान होने की भी जरूरत नहीं है, सीआरपीएफ पूरे परिवार के साथ खड़ी है। बोले- शहीद के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सली हमले में शहीद हुए कौशल कुमार मिश्र के बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। डीजी ने शहीद के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि देश और बल उनके योगदान को सदैव याद रखेगा। पिछले10 अक्टूबर को झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सली अटैक में कौशल कुमार मिश्रा घायल हो गए थे। सारंडा जंगल में नक्सलियों की ओर से आईईडी विस्फोट किया गया था, जिसमें सीआरपीएफ 60 बटालियन के इंस्पेक्टर 58 साल के कौशल कुमार मिश्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका उपचार दिल्ली एम्स में चल रहा था। इलाज के दौरान 29 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई थी। शहीद इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा समस्तीपुर शहर से सटे रहीमपुर रुदौली गांव के रहने वाले थे। वह गांव के स्व. भोला मिश्र के पुत्र थे। 18 जनवरी 1967 को जन्मे कौशल कुमार मिश्रा बचपन से ही होशियार थे। करीब 20 वर्ष की उम्र में वह सीआरपीएफ में जवान के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। करीब 2 साल बाद वह रिटायर होने वाले थे। झारखंड में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा के रहीमपुर रुदौली गांव स्थित घर पर सोमवार को सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह पहुंचे। उन्होंने शहीद इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्र के तेल्य चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। मौके पर दरभंगा रेंज की डीआईजी डा स्वप्ना गौतम के अलावा एसपी अरविंद प्रताप सिंह आदि भी मौजूद रहे। मौके पर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस मौके पर सीआरपीएफ के पुलिस महानिदेशक ने शहीद के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकारी प्रावधान के अनुसार जो कुछ मिलना है, वो समय सीमा के अंदर परिवार को उपलब्ध हो जाएगा, इसके लिए परिवार को परेशान होने की भी जरूरत नहीं है, सीआरपीएफ पूरे परिवार के साथ खड़ी है। बोले- शहीद के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सली हमले में शहीद हुए कौशल कुमार मिश्र के बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। डीजी ने शहीद के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि देश और बल उनके योगदान को सदैव याद रखेगा। पिछले10 अक्टूबर को झारखंड के सारंडा जंगल में नक्सली अटैक में कौशल कुमार मिश्रा घायल हो गए थे। सारंडा जंगल में नक्सलियों की ओर से आईईडी विस्फोट किया गया था, जिसमें सीआरपीएफ 60 बटालियन के इंस्पेक्टर 58 साल के कौशल कुमार मिश्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका उपचार दिल्ली एम्स में चल रहा था। इलाज के दौरान 29 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई थी। शहीद इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा समस्तीपुर शहर से सटे रहीमपुर रुदौली गांव के रहने वाले थे। वह गांव के स्व. भोला मिश्र के पुत्र थे। 18 जनवरी 1967 को जन्मे कौशल कुमार मिश्रा बचपन से ही होशियार थे। करीब 20 वर्ष की उम्र में वह सीआरपीएफ में जवान के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। करीब 2 साल बाद वह रिटायर होने वाले थे।


