किशनगंज के ठाकुरगंज में निर्माणाधीन बाइपास सड़क एक बार फिर विवादों में घिर गई है। सड़क के एलाइन्मेंट को लेकर भाजपा नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसे दोषपूर्ण बताते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। आरोप है कि बाइपास सड़क निर्माण के दौरान प्राकृतिक जलधारा बूढ़ी डांगी नदी को मिट्टी से पाटा जा रहा है, जो भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकता है। इससे पहले भी बाइपास निर्माण को लेकर रैयतों को मुआवजा नहीं मिलने का विरोध सामने आ चुका है। अब नदी पाटे जाने के आरोपों ने इस परियोजना को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। भाजपा नेता कौशल किशोर यादव ने जताई आपत्ति भाजपा जिला प्रवक्ता सह वकील कौशल किशोर यादव ने सड़क निर्माण एजेंसी और विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि ठाकुरगंज से मुरारीगच्छ जाने वाले पथ पर मुंशी भीट्टा कब्रिस्तान के पीछे से बहने वाली बूढ़ी डांगी नदी को मिट्टी से भरने का काम शुरू कर दिया गया है। इसी दौरान यह मामला उजागर हुआ। यादव ने कहा कि किसी भी स्थिति में प्राकृतिक नदी या जलधारा को पाटना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे जल निकासी बाधित होगी और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकारी जमीन छोड़ नदी को क्यों पाटा जा रहा? भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जिस स्थल पर सड़क के एलाइन्मेंट को मोड़ा गया है, उसके लगभग 50 मीटर पश्चिम में बिहार सरकार की जमीन उपलब्ध है। इसके बावजूद उस जमीन का उपयोग न कर नदी को पाटने का निर्णय समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी जमीन का उपयोग किया जाता, तो न तो पर्यावरण को नुकसान होता और न ही आसपास के इलाकों को खतरा पैदा होता। नदी को पाटने की वजह से बशीरनगर, मुकरीबस्ती और डिबरी मोहल्ले के लोग खासे चिंतित हैं। स्थानीय लोगों में बढ़ता डर स्थानीय नागरिकों और किसानों का कहना है कि बूढ़ी डांगी नदी भले ही साल के कुछ समय शांत रहती हो, लेकिन मेची नदी में उफान आने पर यही नदी विकराल रूप धारण कर लेती है। यह नदी आसपास के इलाकों से अतिरिक्त पानी निकालने का काम करती है। यदि इसे पाट दिया गया, तो बारिश और बाढ़ के समय पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो जाएगी। इससे सैकड़ों किसानों की फसलें बर्बाद हो सकती हैं और कई घर जलमग्न होने का खतरा पैदा हो जाएगा। लोगों का कहना है कि पहले भी इस क्षेत्र में जलजमाव और बाढ़ की समस्या सामने आती रही है। मुआवजे को लेकर पहले भी हुआ था विरोध गौरतलब है कि ठाकुरगंज बाइपास सड़क निर्माण को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। रैयतों ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें समुचित मुआवजा नहीं दिया गया। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। अब नदी पाटे जाने का मामला सामने आने से लोगों में यह आशंका गहराती जा रही है कि बाइपास निर्माण में नियमों और स्थानीय परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है। निर्माण विभाग ने दी सफाई पूरे मामले पर निर्माण विभाग का पक्ष भी सामने आया है। कार्यपालक अभियंता शैलेश कुमार ने दूरभाष पर बताया कि संबंधित नदी एक “मृत नदी” है। उन्होंने कहा कि इस नदी पर कई लोगों द्वारा जमीन की बंदोबस्ती की जा चुकी है। उनके अनुसार, वर्तमान में उसी स्थल पर मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा है और निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप है। हालांकि विभाग की इस दलील से स्थानीय लोग संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। जेडीयू विधायक ने जताई चिंता इस विवाद पर ठाकुरगंज के जेडीयू विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता कौशल किशोर यादव ने उन्हें इस संबंध में एक आवेदन दिया है। विधायक ने कहा कि ठाकुरगंज बाइपास का निर्माण उन्होंने काफी संघर्ष के बाद शुरू करवाया है और वे चाहते हैं कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास में सहायक बने, न कि भविष्य में किसी बड़ी समस्या का कारण। उन्होंने साफ कहा कि यदि बहती हुई नदी को भरा जाएगा, तो आसपास के कई इलाके इसकी चपेट में आ सकते हैं, जो किसी भी सूरत में उचित नहीं है। जिलाधिकारी से मिलने का भरोसा विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बताया कि वे जल्द ही इस मामले को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगे। सभी पक्षों से बातचीत कर एक व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विकास कार्य भी चलता रहे और पर्यावरण तथा आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। जांच की मांग तेज भाजपा नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से बाइपास सड़क के एलाइनमेंट और बूढ़ी डांगी नदी को पाटने के निर्णय की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाकर किया गया विकास भविष्य में भारी तबाही का कारण बन सकता है। फिलहाल ठाकुरगंज बाइपास सड़क निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं। किशनगंज के ठाकुरगंज में निर्माणाधीन बाइपास सड़क एक बार फिर विवादों में घिर गई है। सड़क के एलाइन्मेंट को लेकर भाजपा नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसे दोषपूर्ण बताते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। आरोप है कि बाइपास सड़क निर्माण के दौरान प्राकृतिक जलधारा बूढ़ी डांगी नदी को मिट्टी से पाटा जा रहा है, जो भविष्य में बड़े खतरे का कारण बन सकता है। इससे पहले भी बाइपास निर्माण को लेकर रैयतों को मुआवजा नहीं मिलने का विरोध सामने आ चुका है। अब नदी पाटे जाने के आरोपों ने इस परियोजना को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। भाजपा नेता कौशल किशोर यादव ने जताई आपत्ति भाजपा जिला प्रवक्ता सह वकील कौशल किशोर यादव ने सड़क निर्माण एजेंसी और विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि ठाकुरगंज से मुरारीगच्छ जाने वाले पथ पर मुंशी भीट्टा कब्रिस्तान के पीछे से बहने वाली बूढ़ी डांगी नदी को मिट्टी से भरने का काम शुरू कर दिया गया है। इसी दौरान यह मामला उजागर हुआ। यादव ने कहा कि किसी भी स्थिति में प्राकृतिक नदी या जलधारा को पाटना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे जल निकासी बाधित होगी और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकारी जमीन छोड़ नदी को क्यों पाटा जा रहा? भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जिस स्थल पर सड़क के एलाइन्मेंट को मोड़ा गया है, उसके लगभग 50 मीटर पश्चिम में बिहार सरकार की जमीन उपलब्ध है। इसके बावजूद उस जमीन का उपयोग न कर नदी को पाटने का निर्णय समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी जमीन का उपयोग किया जाता, तो न तो पर्यावरण को नुकसान होता और न ही आसपास के इलाकों को खतरा पैदा होता। नदी को पाटने की वजह से बशीरनगर, मुकरीबस्ती और डिबरी मोहल्ले के लोग खासे चिंतित हैं। स्थानीय लोगों में बढ़ता डर स्थानीय नागरिकों और किसानों का कहना है कि बूढ़ी डांगी नदी भले ही साल के कुछ समय शांत रहती हो, लेकिन मेची नदी में उफान आने पर यही नदी विकराल रूप धारण कर लेती है। यह नदी आसपास के इलाकों से अतिरिक्त पानी निकालने का काम करती है। यदि इसे पाट दिया गया, तो बारिश और बाढ़ के समय पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो जाएगी। इससे सैकड़ों किसानों की फसलें बर्बाद हो सकती हैं और कई घर जलमग्न होने का खतरा पैदा हो जाएगा। लोगों का कहना है कि पहले भी इस क्षेत्र में जलजमाव और बाढ़ की समस्या सामने आती रही है। मुआवजे को लेकर पहले भी हुआ था विरोध गौरतलब है कि ठाकुरगंज बाइपास सड़क निर्माण को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। रैयतों ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें समुचित मुआवजा नहीं दिया गया। इसको लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। अब नदी पाटे जाने का मामला सामने आने से लोगों में यह आशंका गहराती जा रही है कि बाइपास निर्माण में नियमों और स्थानीय परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है। निर्माण विभाग ने दी सफाई पूरे मामले पर निर्माण विभाग का पक्ष भी सामने आया है। कार्यपालक अभियंता शैलेश कुमार ने दूरभाष पर बताया कि संबंधित नदी एक “मृत नदी” है। उन्होंने कहा कि इस नदी पर कई लोगों द्वारा जमीन की बंदोबस्ती की जा चुकी है। उनके अनुसार, वर्तमान में उसी स्थल पर मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा है और निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप है। हालांकि विभाग की इस दलील से स्थानीय लोग संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। जेडीयू विधायक ने जताई चिंता इस विवाद पर ठाकुरगंज के जेडीयू विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता कौशल किशोर यादव ने उन्हें इस संबंध में एक आवेदन दिया है। विधायक ने कहा कि ठाकुरगंज बाइपास का निर्माण उन्होंने काफी संघर्ष के बाद शुरू करवाया है और वे चाहते हैं कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास में सहायक बने, न कि भविष्य में किसी बड़ी समस्या का कारण। उन्होंने साफ कहा कि यदि बहती हुई नदी को भरा जाएगा, तो आसपास के कई इलाके इसकी चपेट में आ सकते हैं, जो किसी भी सूरत में उचित नहीं है। जिलाधिकारी से मिलने का भरोसा विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बताया कि वे जल्द ही इस मामले को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगे। सभी पक्षों से बातचीत कर एक व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विकास कार्य भी चलता रहे और पर्यावरण तथा आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। जांच की मांग तेज भाजपा नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से बाइपास सड़क के एलाइनमेंट और बूढ़ी डांगी नदी को पाटने के निर्णय की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाकर किया गया विकास भविष्य में भारी तबाही का कारण बन सकता है। फिलहाल ठाकुरगंज बाइपास सड़क निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।


