सहरसा में सफाई व्यवस्था ठप:चौथे दिन भी जारी 750 सफाई कर्मियों की हड़ताल, सड़कों पर कूड़े का अंबार

सहरसा में सफाई व्यवस्था ठप:चौथे दिन भी जारी 750 सफाई कर्मियों की हड़ताल, सड़कों पर कूड़े का अंबार

सहरसा नगर निगम में सफाई कर्मियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। नगर निगम के करीब 750 सफाई कर्मियों के काम पर न लौटने के कारण शहर की मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों और गलियों तक कूड़े का अंबार लग गया है। जगह-जगह फैली गंदगी और दुर्गंध से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा, लोग चिंतित शहर में फैली गंदगी को देखते हुए संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। नालियों में कचरा जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। मच्छर और मक्खियों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। शहरवासी लगातार नगर निगम और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। धरना स्थल पर पहुंचे विधायक आईपी गुप्ता सोमवार को सहरसा के स्थानीय विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता, जिन्हें आईपी गुप्ता के नाम से जाना जाता है, धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत सफाई कर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। विधायक ने सफाई कर्मियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि ये लोग शहर की रीढ़ हैं और इनके बिना नगर निगम की व्यवस्था चल ही नहीं सकती। उन्होंने मौके पर ही नगर निगम अधिकारियों और जिला प्रशासन से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। 9 सूत्री मांगों को लेकर जारी है आंदोलन सफाई कर्मी संघ के सचिव अमर कुमार मल्लिक ने बताया कि यह हड़ताल 9 सूत्री मांगों को लेकर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं और बार-बार मांग रखने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संघ की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18 हजार रुपये करना, पीएफ की लंबित राशि का भुगतान, नियमित मानदेय, कार्य के दौरान सुरक्षा की गारंटी, बीमा सुविधा और समय पर वेतन भुगतान शामिल है। अमर कुमार मल्लिक ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। नगर निगम कार्यालय का किया दौरा धरना स्थल से लौटने के बाद विधायक आईपी गुप्ता ने नगर निगम कार्यालय का भी दौरा किया। यहां उन्होंने अधिकारियों से सफाई कर्मियों की समस्याओं को लेकर चर्चा की। मीडिया से बात करते हुए विधायक ने कहा कि सफाई कर्मियों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और नगर निगम को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों के बिना शहर की कल्पना नहीं की जा सकती और उनकी अनदेखी से आम जनता को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन से जल्द समाधान का भरोसा विधायक आईपी गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही नगर निगम आयुक्त, महापौर और जिला पदाधिकारी से इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि सफाई कर्मियों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित हो और कोई स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि हड़ताल समाप्त हो सके और शहर की सफाई व्यवस्था बहाल हो। शहरवासियों में बढ़ता आक्रोश शहरवासियों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो हालात और बदतर हो सकते हैं। कई मोहल्लों में कूड़ा उठाव पूरी तरह बंद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। लोग सोशल मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। निगाहें प्रशासन पर टिकी फिलहाल सहरसा की जनता, सफाई कर्मी और जनप्रतिनिधि सभी की निगाहें नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। देखना यह है कि प्रशासन कब तक सफाई कर्मियों की मांगों पर ठोस फैसला लेकर हड़ताल खत्म कराता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर शहर की सेहत और आम जनजीवन पर पड़ सकता है। सहरसा नगर निगम में सफाई कर्मियों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रहने से शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। नगर निगम के करीब 750 सफाई कर्मियों के काम पर न लौटने के कारण शहर की मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों और गलियों तक कूड़े का अंबार लग गया है। जगह-जगह फैली गंदगी और दुर्गंध से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा, लोग चिंतित शहर में फैली गंदगी को देखते हुए संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। नालियों में कचरा जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। मच्छर और मक्खियों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। शहरवासी लगातार नगर निगम और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। धरना स्थल पर पहुंचे विधायक आईपी गुप्ता सोमवार को सहरसा के स्थानीय विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता, जिन्हें आईपी गुप्ता के नाम से जाना जाता है, धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत सफाई कर्मियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। विधायक ने सफाई कर्मियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि ये लोग शहर की रीढ़ हैं और इनके बिना नगर निगम की व्यवस्था चल ही नहीं सकती। उन्होंने मौके पर ही नगर निगम अधिकारियों और जिला प्रशासन से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। 9 सूत्री मांगों को लेकर जारी है आंदोलन सफाई कर्मी संघ के सचिव अमर कुमार मल्लिक ने बताया कि यह हड़ताल 9 सूत्री मांगों को लेकर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं और बार-बार मांग रखने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संघ की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 18 हजार रुपये करना, पीएफ की लंबित राशि का भुगतान, नियमित मानदेय, कार्य के दौरान सुरक्षा की गारंटी, बीमा सुविधा और समय पर वेतन भुगतान शामिल है। अमर कुमार मल्लिक ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। नगर निगम कार्यालय का किया दौरा धरना स्थल से लौटने के बाद विधायक आईपी गुप्ता ने नगर निगम कार्यालय का भी दौरा किया। यहां उन्होंने अधिकारियों से सफाई कर्मियों की समस्याओं को लेकर चर्चा की। मीडिया से बात करते हुए विधायक ने कहा कि सफाई कर्मियों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और नगर निगम को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों के बिना शहर की कल्पना नहीं की जा सकती और उनकी अनदेखी से आम जनता को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन से जल्द समाधान का भरोसा विधायक आईपी गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही नगर निगम आयुक्त, महापौर और जिला पदाधिकारी से इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि सफाई कर्मियों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित हो और कोई स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि हड़ताल समाप्त हो सके और शहर की सफाई व्यवस्था बहाल हो। शहरवासियों में बढ़ता आक्रोश शहरवासियों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो हालात और बदतर हो सकते हैं। कई मोहल्लों में कूड़ा उठाव पूरी तरह बंद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। लोग सोशल मीडिया और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। निगाहें प्रशासन पर टिकी फिलहाल सहरसा की जनता, सफाई कर्मी और जनप्रतिनिधि सभी की निगाहें नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। देखना यह है कि प्रशासन कब तक सफाई कर्मियों की मांगों पर ठोस फैसला लेकर हड़ताल खत्म कराता है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर शहर की सेहत और आम जनजीवन पर पड़ सकता है।  

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