बिहार म्यूजियम से पटना म्यूजियम को जोड़ने वाली सुरंग के निर्माण के लिए सिंगापुर से टनल बोरिंग मशीन (TBM) पटना आ गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से टनल की खुदाई के लिए विशेष प्रकार की TBM का निर्माण करवाया गया है। पटना मेट्रो की ओर से इसे एसेंबल करने का काम बिहार म्यूजियम में इसी सप्ताह से होगा। इसके पूरा होने में लगभग 2 महीने का समय लगेगा। इसके बाद मार्च में दोनों म्यूजियम को जोड़ने के लिए टनल निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह टनल 1.5 किलोमीटर लंबा होगा। मेट्रो की टनल खुदाई के लिए 6 मीटर गोलाई की टीबीएम का इस्तेमाल हो रहा है। मगर, म्यूजियम को जोड़ने वाले टनल के लिए 8 मीटर गोलाई की टीबीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए बेस स्लैब और लॉन्च शाफ्ट तैयार हो चुके हैं, जहां से TBM को अंडरग्राउंड खुदाई का काम शुरू करने के लिए प्लेटफॉर्म मिलेगा। नेहरू पथ पर दोनों टनल का क्रॉसिंग प्वाइंट होगा म्यूजियम को जोड़ने वाला टनल जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे होगा। वहीं, मेट्रो के टनल और म्यूजियम को जोड़ने वाली टनल का क्रासिंग प्वाइंट नेहरू पथ में होगा। इसी कारण मेट्रो की टनल जमीन से 29 मीटर नीचे से गुजरेगी। क्रॉसिंग प्वाइंट पर म्यूजियम की सुरंग और मेट्रो टनल में लगभग 6.5 मीटर की दूरी होगी। दो म्यूजियम को जोड़ने वाला भारत का पहला टनल इस विश्व स्तरीय ‘हेरिटेज टनल’ को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सुरंग पटना म्यूजियम, विद्यापति मार्ग, तारामंडल क्रॉसिंग, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना विमेंस कॉलेज और बिहार म्यूजियम सहित कई प्रमुख जगहों से होकर गुजरेगा। दो म्यूजियम को जोड़ने वाली यह अपनी तरह की भारत की पहली सुरंग है। इस टनल के बनने से दोनों म्यूजियम की आपसी कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। यह सुरंग एक आर्ट गैलरी की तरह होगी, जिसमें मधुबनी पेंटिंग्स के द्वारा राज्य की कला, संस्कृति, विरासत, भित्तिचित्र और अन्य कलाकृतियों को सुरंग की दीवारों पर प्रदर्शित किया जाएगा। एंट्री और एग्जिट बिल्डिंग में एक भूतल और प्रथम तल होगा और इसमें तीन-लेवल का बेसमेंट होगा। बिहार म्यूजियम से पटना म्यूजियम को जोड़ने वाली सुरंग के निर्माण के लिए सिंगापुर से टनल बोरिंग मशीन (TBM) पटना आ गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से टनल की खुदाई के लिए विशेष प्रकार की TBM का निर्माण करवाया गया है। पटना मेट्रो की ओर से इसे एसेंबल करने का काम बिहार म्यूजियम में इसी सप्ताह से होगा। इसके पूरा होने में लगभग 2 महीने का समय लगेगा। इसके बाद मार्च में दोनों म्यूजियम को जोड़ने के लिए टनल निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह टनल 1.5 किलोमीटर लंबा होगा। मेट्रो की टनल खुदाई के लिए 6 मीटर गोलाई की टीबीएम का इस्तेमाल हो रहा है। मगर, म्यूजियम को जोड़ने वाले टनल के लिए 8 मीटर गोलाई की टीबीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए बेस स्लैब और लॉन्च शाफ्ट तैयार हो चुके हैं, जहां से TBM को अंडरग्राउंड खुदाई का काम शुरू करने के लिए प्लेटफॉर्म मिलेगा। नेहरू पथ पर दोनों टनल का क्रॉसिंग प्वाइंट होगा म्यूजियम को जोड़ने वाला टनल जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे होगा। वहीं, मेट्रो के टनल और म्यूजियम को जोड़ने वाली टनल का क्रासिंग प्वाइंट नेहरू पथ में होगा। इसी कारण मेट्रो की टनल जमीन से 29 मीटर नीचे से गुजरेगी। क्रॉसिंग प्वाइंट पर म्यूजियम की सुरंग और मेट्रो टनल में लगभग 6.5 मीटर की दूरी होगी। दो म्यूजियम को जोड़ने वाला भारत का पहला टनल इस विश्व स्तरीय ‘हेरिटेज टनल’ को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह सुरंग पटना म्यूजियम, विद्यापति मार्ग, तारामंडल क्रॉसिंग, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना विमेंस कॉलेज और बिहार म्यूजियम सहित कई प्रमुख जगहों से होकर गुजरेगा। दो म्यूजियम को जोड़ने वाली यह अपनी तरह की भारत की पहली सुरंग है। इस टनल के बनने से दोनों म्यूजियम की आपसी कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। यह सुरंग एक आर्ट गैलरी की तरह होगी, जिसमें मधुबनी पेंटिंग्स के द्वारा राज्य की कला, संस्कृति, विरासत, भित्तिचित्र और अन्य कलाकृतियों को सुरंग की दीवारों पर प्रदर्शित किया जाएगा। एंट्री और एग्जिट बिल्डिंग में एक भूतल और प्रथम तल होगा और इसमें तीन-लेवल का बेसमेंट होगा।


