बिहार के मोतिहारी में स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गोपालगंज में अटक गया है। 210 मीट्रिक वजन वाला शिवलिंग पिछले दो दिनों से गोपालगंज के बलथरी चेक पोस्ट पर फंसा हुआ है। दरअसल, विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसके आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। शिवलिंग को पूर्वी चंपारण ले जाने के लिए डुमरिया पुल पार करना होगा। एनएच-27 पर स्थित डुमरिया पुल लंबे समय से जर्जर है। भारी वाहनों के लगातार परिचालन के कारण पुल कमजोर हो चुका है। शिवलिंग को लेकर जा रहा ट्रक 110 चक्के वाला है, ऐसे में ट्रेलर और शिवलिंग का कुल वजन सैकड़ों टन है। अब सुरक्षित पुल पार कराने को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के बीच लगातार मंथन जारी है। शिवलिंग की कुछ तस्वीरें देखिए…. एक्सपर्ट इंजीनियर्स की टीम बुलाई गई इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम बुलाई है। इस टीम में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम पुल के पिलर्स और गर्डर के भार सहने की क्षमता की जांच करेगी, ताकि सबसे कमजोर हिस्सों की पहचान की जा सके। दूसरे रूट पर भी हो रहा विचार अगर डुमरिया पुल से जाना जोखिम भरा पाया जाता है, तो शिवलिंग को किसी दूसरे लंबे रास्ते से ले जाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इतने भारी वाहन के लिए हर सड़क उपयुक्त नहीं है। पुल के नीचे अतिरिक्त जैक या लोहे के गर्डर लगाकर उसे अस्थायी रूप से मजबूत करने की योजना पर भी विचारा हो रहा है, ताकि ट्रेलर धीरे-धीरे पुल पार कर सके। तकनीकी विशेषज्ञों के साथ किया जा रहा मंथन गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया, ‘इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है। सभी पहलुओं सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी तैयारी और अनुमति के बिना शिवलिंग को नारायणी नदी पार नहीं कराया जाएगा। एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि ‘शिवलिंग को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष योजना लागू की जा रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।’ जिला प्रशासन मुस्तैद गोपालगंज और पूर्वी चंपारण दोनों जिलों के डीएम खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि विराट रामायण मंदिर में लगने वाला ये शिवलिंग बिना किसी क्षति के अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच सके। तमिलनाडु से बिहार के गोपालगंज पहुंचने पर शिवलिंग का स्वागत हुआ। बलथरी चेक पोस्ट पर शिवलिंग की पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। भारी भीड़ और सड़क जाम को लेकर ट्रैफिक मैनेज करने में दिक्कतें आ रही है। सुरक्षा को लेकर गोपालगंज जिला प्रशासन के द्वारा कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा और एसपी अवधेश दीक्षित ने शिवलिंग के स्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक संचालन को लेकर अधिकारियों को कोताही नहीं बरतने के भी दिशा निर्देश दिए हैं। तमिलनाडु में तैयार हुआ है शिवलिंग बता दें कि तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 33 फुट ऊंचा और 33 फुट लंबा शिवलिंग तैयार किया गया था। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग 2178 किलोमीटर की लंबी यात्रा पूरी कर गोपालगंज पहुंचा है। जिसे पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। यह विशाल शिवलिंग फिलहाल यूपी-बिहार बलथरी चेकपोस्ट पर रुका हुआ है। इसे नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण पहुंचाया जाएगा। एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बना शिवलिंग शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यह विशाल शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते 10 साल से विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था। शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, उनकी टीम ने इसे तराशा है। सड़क मार्ग से इसे 21 नवंबर को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था। शिवलिंग को रवाना करने के पहले पूजा-पाठ की गई थी, जिसमें स्थानीय गांव के लोग भी शामिल हुए थे। 17 जनवरी को मंदिर में स्थापित होगा शिवलिंग गोपालगंज से शिवलिंग खजुरिया, हुसैनी होते हुए केसरिया पहुंचेगा, जहां 17 जनवरी को इसे स्थापित करने की तैयारी चल रही है। उस दिन शिवलिंग की पीठ पूजा होगी। हालांकि, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बाद में होगी। विराट रामायण मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललन सिंह के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2026 में शिवलिंग को विधिवत स्थापित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 33 फीट का यह शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की भव्यता को और बढ़ाएगा। अंतिम चरण में मंदिर का निर्माण कार्य रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग, आदि का काम पूरा हो गया है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। निर्धारित समय में निर्माण पूरा करने की तैयारी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायन कुणाल के मुताबिक, मंदिर निर्माण काम को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, ताकि बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर स्थापित हो सके। साल 2023 के 20 जून को शिलान्यास के बाद विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। पटना से इस मंदिर की दूरी लगभग में 120 किलोमीटर है। विराट रामायण मंदिर में चार आश्रम होंगे। चकिया का विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर यह विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर होगा। बिहार के मोतिहारी में स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग गोपालगंज में अटक गया है। 210 मीट्रिक वजन वाला शिवलिंग पिछले दो दिनों से गोपालगंज के बलथरी चेक पोस्ट पर फंसा हुआ है। दरअसल, विशाल आकार और भारी वजन के कारण इसके आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। शिवलिंग को पूर्वी चंपारण ले जाने के लिए डुमरिया पुल पार करना होगा। एनएच-27 पर स्थित डुमरिया पुल लंबे समय से जर्जर है। भारी वाहनों के लगातार परिचालन के कारण पुल कमजोर हो चुका है। शिवलिंग को लेकर जा रहा ट्रक 110 चक्के वाला है, ऐसे में ट्रेलर और शिवलिंग का कुल वजन सैकड़ों टन है। अब सुरक्षित पुल पार कराने को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के बीच लगातार मंथन जारी है। शिवलिंग की कुछ तस्वीरें देखिए…. एक्सपर्ट इंजीनियर्स की टीम बुलाई गई इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम बुलाई है। इस टीम में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम पुल के पिलर्स और गर्डर के भार सहने की क्षमता की जांच करेगी, ताकि सबसे कमजोर हिस्सों की पहचान की जा सके। दूसरे रूट पर भी हो रहा विचार अगर डुमरिया पुल से जाना जोखिम भरा पाया जाता है, तो शिवलिंग को किसी दूसरे लंबे रास्ते से ले जाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इतने भारी वाहन के लिए हर सड़क उपयुक्त नहीं है। पुल के नीचे अतिरिक्त जैक या लोहे के गर्डर लगाकर उसे अस्थायी रूप से मजबूत करने की योजना पर भी विचारा हो रहा है, ताकि ट्रेलर धीरे-धीरे पुल पार कर सके। तकनीकी विशेषज्ञों के साथ किया जा रहा मंथन गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने बताया, ‘इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है। सभी पहलुओं सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और वैकल्पिक व्यवस्था पर मंथन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी तैयारी और अनुमति के बिना शिवलिंग को नारायणी नदी पार नहीं कराया जाएगा। एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि ‘शिवलिंग को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष योजना लागू की जा रही है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।’ जिला प्रशासन मुस्तैद गोपालगंज और पूर्वी चंपारण दोनों जिलों के डीएम खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि विराट रामायण मंदिर में लगने वाला ये शिवलिंग बिना किसी क्षति के अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच सके। तमिलनाडु से बिहार के गोपालगंज पहुंचने पर शिवलिंग का स्वागत हुआ। बलथरी चेक पोस्ट पर शिवलिंग की पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। भारी भीड़ और सड़क जाम को लेकर ट्रैफिक मैनेज करने में दिक्कतें आ रही है। सुरक्षा को लेकर गोपालगंज जिला प्रशासन के द्वारा कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा और एसपी अवधेश दीक्षित ने शिवलिंग के स्थल का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक संचालन को लेकर अधिकारियों को कोताही नहीं बरतने के भी दिशा निर्देश दिए हैं। तमिलनाडु में तैयार हुआ है शिवलिंग बता दें कि तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 33 फुट ऊंचा और 33 फुट लंबा शिवलिंग तैयार किया गया था। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग 2178 किलोमीटर की लंबी यात्रा पूरी कर गोपालगंज पहुंचा है। जिसे पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। यह विशाल शिवलिंग फिलहाल यूपी-बिहार बलथरी चेकपोस्ट पर रुका हुआ है। इसे नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण पहुंचाया जाएगा। एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बना शिवलिंग शिवलिंग निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक विनायक वेंकटरमण के अनुसार, इस शिवलिंग के निर्माण पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। यह विशाल शिवलिंग एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मीट्रिक टन वजनी है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में बीते 10 साल से विशाल शिवलिंग का निर्माण किया जा रहा था। शिवलिंग के मुख्य शिल्पकार लोकनाथ हैं, उनकी टीम ने इसे तराशा है। सड़क मार्ग से इसे 21 नवंबर को महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था। शिवलिंग को रवाना करने के पहले पूजा-पाठ की गई थी, जिसमें स्थानीय गांव के लोग भी शामिल हुए थे। 17 जनवरी को मंदिर में स्थापित होगा शिवलिंग गोपालगंज से शिवलिंग खजुरिया, हुसैनी होते हुए केसरिया पहुंचेगा, जहां 17 जनवरी को इसे स्थापित करने की तैयारी चल रही है। उस दिन शिवलिंग की पीठ पूजा होगी। हालांकि, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बाद में होगी। विराट रामायण मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ललन सिंह के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2026 में शिवलिंग को विधिवत स्थापित किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 33 फीट का यह शिवलिंग विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की भव्यता को और बढ़ाएगा। अंतिम चरण में मंदिर का निर्माण कार्य रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग, आदि का काम पूरा हो गया है। आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। निर्धारित समय में निर्माण पूरा करने की तैयारी बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायन कुणाल के मुताबिक, मंदिर निर्माण काम को समय पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, ताकि बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर स्थापित हो सके। साल 2023 के 20 जून को शिलान्यास के बाद विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। पटना से इस मंदिर की दूरी लगभग में 120 किलोमीटर है। विराट रामायण मंदिर में चार आश्रम होंगे। चकिया का विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण हो जाने पर यह विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर होगा।


