नालंदा जिले में किसानों को राहत मिली है। रबी सीजन में होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे की डेट को आगे बढ़ा दिया गया है। पांच जनवरी से शुरू होने वाला सर्वे अब नौ जनवरी के बाद होगा। कृषि विभाग ने किसानों की फॉर्म रजिस्ट्री के लिए 6 से 9 जनवरी तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के कारण यह निर्णय लिया है। 10 लाख से अधिक प्लॉटों का होगा सर्वेक्षण जिले में इस बार रबी सीजन के दौरान कुल 10 लाख 47 हजार 500 कृषि भूखंडों का डिजिटल सर्वे किया जाना है। इस विशाल अभियान के लिए करीब 270 सर्वेयरों की नियुक्ति की गई है। इन सर्वेयरों में कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) शामिल हैं। सर्वे दल के सदस्यों को हर खेत तक पहुंचकर न केवल फसल की जानकारी एकत्र करनी होगी, बल्कि सिंचाई के लिए उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा भी मोबाइल एप पर दर्ज करना होगा। यह डेटा कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रक्रिया में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे की कार्यप्रणाली में कई अहम परिवर्तन किए गए हैं। पहले जहां प्लॉटों का आवंटन जिला स्तर से होता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर स्थानांतरित कर दी गई है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी खुद सर्वेयरों का चयन करेंगे, उनकी आईडी बनाएंगे और क्षेत्रों का आवंटन करेंगे। इस विकेंद्रीकरण से सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों को सर्वे के दौरान आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित कृषि विभाग ने सर्वेयरों के लिए दैनिक लक्ष्य भी तय कर दिया है। प्रत्येक सर्वेयर को रोजाना 80 प्लॉटों का सर्वेक्षण पूरा करना होगा। वहीं, सुपरवाइजरों को सर्वेक्षित प्लॉटों का सत्यापन तीन दिनों के अंदर करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था सर्वे की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। हालांकि सर्वे की प्रक्रिया नौ जनवरी के बाद शुरू होगी, लेकिन प्लॉटों का आवंटन नौ जनवरी तक ही सर्वेयरों को कर दिया जाएगा, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र से परिचित हो सकें। किसानों और विभाग दोनों के लिए लाभदायक डिजिटल फसल सर्वे के माध्यम से हर मौसम में उगाई जाने वाली वास्तविक फसलों और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों की प्रामाणिक जानकारी मिलती है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण पारदर्शी और सुलभ है। एक क्लिक पर यह जानना संभव हो जाता है कि किस गांव या इलाके में किस प्रकार की खेती हो रही है। यह डेटा कृषि विभाग को किसानों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने में मदद करता है। साथ ही, फसल बीमा, बीज वितरण, खाद-उर्वरक की आपूर्ति जैसी योजनाओं का सटीक क्रियान्वयन संभव होता है। आठ दिन पहले हो चुका है प्रशिक्षण जिला स्तर पर टाउन हॉल में आठ दिन पूर्व ही सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में मोबाइल एप के उपयोग, डेटा संग्रहण की पद्धति और सर्वे की बारीकियों को समझाया गया था। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि रबी सीजन में फसल सर्वे की सभी तैयारियां पूर्ण हैं और लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। फॉर्म रजिस्ट्री के विशेष शिविर की समाप्ति के बाद डिजिटल क्रॉप सर्वे तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। किसानों से अपेक्षा की जा रही है कि वे सर्वेयरों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि उनके हित में बेहतर योजनाएं बनाई जा सकें। नालंदा जिले में किसानों को राहत मिली है। रबी सीजन में होने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे की डेट को आगे बढ़ा दिया गया है। पांच जनवरी से शुरू होने वाला सर्वे अब नौ जनवरी के बाद होगा। कृषि विभाग ने किसानों की फॉर्म रजिस्ट्री के लिए 6 से 9 जनवरी तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के कारण यह निर्णय लिया है। 10 लाख से अधिक प्लॉटों का होगा सर्वेक्षण जिले में इस बार रबी सीजन के दौरान कुल 10 लाख 47 हजार 500 कृषि भूखंडों का डिजिटल सर्वे किया जाना है। इस विशाल अभियान के लिए करीब 270 सर्वेयरों की नियुक्ति की गई है। इन सर्वेयरों में कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार, सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) शामिल हैं। सर्वे दल के सदस्यों को हर खेत तक पहुंचकर न केवल फसल की जानकारी एकत्र करनी होगी, बल्कि सिंचाई के लिए उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा भी मोबाइल एप पर दर्ज करना होगा। यह डेटा कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रक्रिया में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव इस वर्ष डिजिटल क्रॉप सर्वे की कार्यप्रणाली में कई अहम परिवर्तन किए गए हैं। पहले जहां प्लॉटों का आवंटन जिला स्तर से होता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर स्थानांतरित कर दी गई है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी खुद सर्वेयरों का चयन करेंगे, उनकी आईडी बनाएंगे और क्षेत्रों का आवंटन करेंगे। इस विकेंद्रीकरण से सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों को सर्वे के दौरान आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित कृषि विभाग ने सर्वेयरों के लिए दैनिक लक्ष्य भी तय कर दिया है। प्रत्येक सर्वेयर को रोजाना 80 प्लॉटों का सर्वेक्षण पूरा करना होगा। वहीं, सुपरवाइजरों को सर्वेक्षित प्लॉटों का सत्यापन तीन दिनों के अंदर करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था सर्वे की गुणवत्ता और गति दोनों सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। हालांकि सर्वे की प्रक्रिया नौ जनवरी के बाद शुरू होगी, लेकिन प्लॉटों का आवंटन नौ जनवरी तक ही सर्वेयरों को कर दिया जाएगा, ताकि वे अपने कार्यक्षेत्र से परिचित हो सकें। किसानों और विभाग दोनों के लिए लाभदायक डिजिटल फसल सर्वे के माध्यम से हर मौसम में उगाई जाने वाली वास्तविक फसलों और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों की प्रामाणिक जानकारी मिलती है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण पारदर्शी और सुलभ है। एक क्लिक पर यह जानना संभव हो जाता है कि किस गांव या इलाके में किस प्रकार की खेती हो रही है। यह डेटा कृषि विभाग को किसानों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने में मदद करता है। साथ ही, फसल बीमा, बीज वितरण, खाद-उर्वरक की आपूर्ति जैसी योजनाओं का सटीक क्रियान्वयन संभव होता है। आठ दिन पहले हो चुका है प्रशिक्षण जिला स्तर पर टाउन हॉल में आठ दिन पूर्व ही सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में मोबाइल एप के उपयोग, डेटा संग्रहण की पद्धति और सर्वे की बारीकियों को समझाया गया था। जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि रबी सीजन में फसल सर्वे की सभी तैयारियां पूर्ण हैं और लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। फॉर्म रजिस्ट्री के विशेष शिविर की समाप्ति के बाद डिजिटल क्रॉप सर्वे तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। किसानों से अपेक्षा की जा रही है कि वे सर्वेयरों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि उनके हित में बेहतर योजनाएं बनाई जा सकें।


