भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि “लव जिहाद पर रोकथाम की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए और यह सोचने की जरूरत है कि बेटी बहकावे में कैसे आ जाती है।” उन्होंने परिवारों को आत्ममंथन करने और अपने घर में लगातार संवाद कायम रखने की सलाह दी। भागवत ने ‘स्त्री शक्ति संवाद’ में कहा कि परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। बेटियों को सावधानी और आत्मरक्षा के संस्कार देना, परिवार में खुला संवाद रखना और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। भोपाल के शिवनेरी भवन में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम में शनिवार को भागवत ने कहा कि स्त्री और पुरुष श्रेष्ठता की तुलना व्यर्थ है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति और पुरुष के संयोग से ही सृष्टि संभव है, अलग-अलग रहकर कोई भी पूर्ण नहीं हो सकता है। ये भी बोले भागवत यह खबर भी पढ़ें…
पं. प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव से की RSS की तुलना कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा- शिव भी विष पीते हैं और राष्ट्र की रक्षा करते हैं। संघ भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करने में लगा हुआ है। किस तरह से आने वाली पीढ़ी को बनाया जाए। यहां पढ़ें पूरी खबर…
भागवत बोले, बेटी बहकावे में कैसे आती है, परिवार सोचें:भोपाल में स्त्री शक्ति संवाद में कहा- परिवारों में चर्चा होगी तब रुकेगा लव जिहाद


