बलौदाबाजार के वन परिक्षेत्र बल्दाकछार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तुरतुरिया में अब इको-रिलीजियस टूरिज्म (पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक पर्यटन) की शुरुआत की गई है। इस पहल का संचालन स्थानीय पांच गांवों के सदस्यों से गठित “तुरतुरिया संयुक्त वन प्रबंधन एवं पर्यटन समिति” कर रही है, जिसमें महिला सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। यह समिति 23 दिसंबर 2025 से कार्यरत है। अपने पहले ही सप्ताह में समिति ने लगभग 70,000 रुपये की आय अर्जित की है। समिति के प्रमुख दायित्वों में वाहन पार्किंग, शौचालय प्रबंधन, साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना शामिल है। समिति ने ‘पॉलीथिन फ्री तुरतुरिया’ के लिए बांस के कूड़ेदान लगाए ‘पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, समिति ने पूरे क्षेत्र में बांस के कूड़ेदान स्थापित किए हैं। इसके साथ ही, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को प्लास्टिक के उपयोग से बचने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। तुरतुरिया में बौद्धकालीन अवशेष और प्राचीन बुद्ध प्रतिमा तुरतुरिया का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी है। 19वीं सदी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के जे.डी. बेगलर ने यहां बौद्धकालीन अवशेषों और भगवान बुद्ध की एक प्राचीन प्रतिमा का उल्लेख किया था। वन मंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि भविष्य में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के साथ समन्वय स्थापित कर पुरातात्विक सर्वेक्षण और अन्य विकासात्मक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस इको-धार्मिक पर्यटन पहल से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह कदम पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र में आजीविका संवर्धन को भी मजबूत कर रहा है।


