मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल कर दिया गया है। इससे न केवल फार्मासिस्ट पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। शनिवार को फार्मेसी काउंसिल की समीक्षा के बाद उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केन्द्रित सेवा व्यवस्था को सशक्त करता है। उन्होंने कहा कि परिषद ने मैनुअल और विवेकाधीन प्रणाली से आगे बढ़ते हुए नियम-आधारित, स्वचालित और तकनीक-संचालित व्यवस्था को अपनाया है। इससे न केवल फार्मासिस्टों को सुविधा मिली है, बल्कि एक मजबूत और विश्वसनीय डिजिटल डेटाबेस भी तैयार हुआ है। प्रक्रिया डिजिटल होने से आए यह दो बड़े बदलाव नवीनीकरण की प्रक्रिया हुई सरल
मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि फार्मासिस्ट पंजीकरण, नवीनीकरण और फार्मेसी पंजीकरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया है। यह सभी बदलाव फार्मेसी अधिनियम 1948 और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों के अनुरूप हैं। घर बैठे मिला फार्मासिस्ट लाइसेंस
नई डिजिटल प्रणाली के तहत 2,199 आवेदकों को परिषद कार्यालय आए बिना ही पंजीकृत फार्मासिस्ट का सर्टिफिकेट जारी किया गया। शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन डिजीलॉकर, पहचान का सत्यापन समग्र आईडी, डोमिसाइल और एफडीए लाइसेंस के एपीआई के माध्यम से स्वचालित रूप से किया जा रहा है। इससे आवेदकों का समय, यात्रा और आर्थिक खर्च काफी कम हुआ है और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी है। डिजिटलीकरण से पहले पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह कागज-आधारित थी। एजुकेशनल पेपर्स के वैरिफिकेशन में कई दिनों का समय लगता था। इससे कागजी काम बढ़ता था, कर्मचारियों के विवेक पर निर्भरता रहती थी और डेटा में असंगति की समस्या सामने आती थी। नई प्रणाली ने इन सभी कमियों को दूर कर दिया है।


