बक्सर में डुमरांव बाईपास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया एक बार फिर मुआवजे के विवाद में उलझ गई है। शनिवार को डुमरांव प्रखंड कार्यालय परिसर में मुआवजा आवेदन के लिए शिविर लगाया गया था, लेकिन सैकड़ों रैयतदारों में से केवल 10-15 किसान ही आवेदन लेने पहुंचे। किसानों का आरोप है कि सरकार बाजार मूल्य से काफी कम मुआवजा देकर उनकी जमीन हड़पना चाहती है। यह बाईपास पुराना भोजपुर से टेढ़की पुल तक प्रस्तावित है, जिसके लिए बनकट, पुरैनी, डुमरांव और भोजपुर कदीम मौजा की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। किसानों का कहना है कि सरकार 2014-15 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा तय कर रही है, जबकि वर्तमान में इन जमीनों का बाजार मूल्य कहीं अधिक है। स्थानीय किसानों के अनुसार, जिस जमीन की मौजूदा कीमत लगभग 15 लाख रुपए प्रति कट्ठा है, उसके बदले सरकार केवल एक लाख रुपए प्रति कट्ठा के आसपास मुआवजा दे रही है। 49 लाख 5 हजार 972 रुपए की राशि निर्धारित की किसान बेंद्र तिवारी ने बताया कि उनकी लगभग 0.4942 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) जमीन के लिए सरकार ने 49 लाख 5 हजार 972 रुपए की राशि निर्धारित की है। उनका कहना है कि यह राशि वर्तमान बाजार दरों के मुकाबले बेहद कम है। तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार जमीन की रजिस्ट्री के समय नए सर्किल रेट के अनुसार टैक्स वसूलती है, लेकिन मुआवजा पुराने रेट पर देती है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। पिछले चार वर्षों में केवल 78 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण किसानों के अनुसार, इसी भेदभावपूर्ण नीति के कारण पिछले चार वर्षों में केवल 78 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो सका है। नतीजतन, चार साल बीत जाने के बावजूद बाईपास निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इस बाईपास से क्षेत्र के यातायात दबाव को कम करने और विकास को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मुआवजा विवाद के चलते परियोजना ठप पड़ी है। मुआवजे की दरें सरकार के आदेश के अनुसार तय की गई इधर, जिला प्रशासन का कहना है कि मुआवजे की दरें सरकार के आदेश के अनुसार तय की गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसानों को आपत्ति है तो वे अपनी लड़ाई सरकार के स्तर पर लड़ें। आदेशानुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। बक्सर में डुमरांव बाईपास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया एक बार फिर मुआवजे के विवाद में उलझ गई है। शनिवार को डुमरांव प्रखंड कार्यालय परिसर में मुआवजा आवेदन के लिए शिविर लगाया गया था, लेकिन सैकड़ों रैयतदारों में से केवल 10-15 किसान ही आवेदन लेने पहुंचे। किसानों का आरोप है कि सरकार बाजार मूल्य से काफी कम मुआवजा देकर उनकी जमीन हड़पना चाहती है। यह बाईपास पुराना भोजपुर से टेढ़की पुल तक प्रस्तावित है, जिसके लिए बनकट, पुरैनी, डुमरांव और भोजपुर कदीम मौजा की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। किसानों का कहना है कि सरकार 2014-15 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा तय कर रही है, जबकि वर्तमान में इन जमीनों का बाजार मूल्य कहीं अधिक है। स्थानीय किसानों के अनुसार, जिस जमीन की मौजूदा कीमत लगभग 15 लाख रुपए प्रति कट्ठा है, उसके बदले सरकार केवल एक लाख रुपए प्रति कट्ठा के आसपास मुआवजा दे रही है। 49 लाख 5 हजार 972 रुपए की राशि निर्धारित की किसान बेंद्र तिवारी ने बताया कि उनकी लगभग 0.4942 हेक्टेयर (करीब दो बीघा) जमीन के लिए सरकार ने 49 लाख 5 हजार 972 रुपए की राशि निर्धारित की है। उनका कहना है कि यह राशि वर्तमान बाजार दरों के मुकाबले बेहद कम है। तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार जमीन की रजिस्ट्री के समय नए सर्किल रेट के अनुसार टैक्स वसूलती है, लेकिन मुआवजा पुराने रेट पर देती है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। पिछले चार वर्षों में केवल 78 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण किसानों के अनुसार, इसी भेदभावपूर्ण नीति के कारण पिछले चार वर्षों में केवल 78 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो सका है। नतीजतन, चार साल बीत जाने के बावजूद बाईपास निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इस बाईपास से क्षेत्र के यातायात दबाव को कम करने और विकास को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मुआवजा विवाद के चलते परियोजना ठप पड़ी है। मुआवजे की दरें सरकार के आदेश के अनुसार तय की गई इधर, जिला प्रशासन का कहना है कि मुआवजे की दरें सरकार के आदेश के अनुसार तय की गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसानों को आपत्ति है तो वे अपनी लड़ाई सरकार के स्तर पर लड़ें। आदेशानुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।


