रैश ड्राइविंग, फोन पर बात, सिग्नल जम्प! बीमा कंपनियों की है आप पर नज़र, महंगा पड़ेगा इंश्योरेंस

रैश ड्राइविंग, फोन पर बात, सिग्नल जम्प! बीमा कंपनियों की है आप पर नज़र, महंगा पड़ेगा इंश्योरेंस

सड़क पर गाड़ी उतारते ही अगर आपके अंदर का माइकल शूमाकर जाग जाता है, सड़क को आप फॉर्मूला वन का रेसिंग ट्रैक समझने लगते हैं। शहर की कोई रेड लाइट आपको रोक नहीं पाती और गलत साइड से गाड़ी चलाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं और हेलमेट या सीटबेल्ट लगाना आपकी आन-बान-शान के खिलाफ है, तो भाई साहब आप भी उन्हीं लोगों में शुमार हैं, जो टशन में अपनी जेब पर कैंची चलाने पर आमादा रहते है। जी नहीं, हम एक्सीडेंट के बाद अस्पताल के खर्चों की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हर साल ऑटो इंश्योरेंस रीन्यू कराते समय, आपकी जेब से जो एक्स्ट्रा पैसे जाते हैं उसकी बात कर रहे हैं।

आप जब सड़कों पर हवा से बातें करते हुए चलते हैं, तो सिर्फ ट्रैफिक पुलिस ही नहीं, बल्कि इंश्ंयोरेंस कंपनियों की भी नजरें आप पर ही टिकी होती हैं। आप जो ओवरस्पीडिंग, रॉन्ग साइड, सिग्नल जम्प करके चालानों का मेडल इकट्ठा करते हैं। उसको भरकर गंगा नहीं नहा लेते, उसकी कीमत आपको ऑटो इंश्योरेंस के ज्यादा प्रीमियम के रूप में भी चुकानी होती है। नहीं समझ आया तो विस्तार से समझिए।

बीमा कंपनियों की आपकी ड्राइविंग पर नजर

भारत में सड़क हादसों की स्थिति बेहद गंभीर है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर रोज 1,264 सड़क हादसे होते हैं, जिसमें कम से कम 462 लोग रोज मरते हैं. ये 2022 के आंकड़े हैं. 2022 में करीब 1.68 लोगों की सड़क हादसे में मौत हुई। मरने वालों ज्यादातर की उम्र 25-35 साल के बीच थी।

देखिए जब भी कोई बीमा कंपनी कार इंश्योरेंस की लागत को कैलकुलेट करती है तो वो ये जरूर देखती है कि कार के मालिक की ड्राइविंग हिस्ट्री क्या रही है। मतलब कि उसके नाम पर सड़क नियमों के उल्लंघन के कितने चालान कटे हैं। गाड़ी का क्लेम लिया है या नहीं, ताकि वो जोखिम का अंदाजा लगा सके और उसी हिसाब से उसका प्रीमियम तय कर सके। मतलब साफ है कि ड्राइवर का ड्राइविंग व्यवहार उसके कार प्रीमियम को तय करने में भूमिका निभाता है।

अगर आपके व्हीकल नंबर पर ओवर-स्पीडिंग के कई चालान हैं, तो आपका इंश्योरर आपको ज्यादा प्रीमियम चार्ज कर सकता है। अब समझिए कि बीमा कंपनियां आपकी ड्राइविंग पर नजर कैसे रखती हैं

एडवांस्ड ट्रैफिक कैमरों से नज़र

तकरीबन सभी बड़े शहरों में आजकल एडवांस्ड कैमरे लग चुके हैं, इससे बीमा कंपनियों को ट्रैफिक उल्लंघनों की जांच करने में मदद मिली है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) अब इंश्योरेंस कंपनियों को परिवहन ई-चालान सिस्टम के जरिये ड्राइवर्स के उल्लंघन इतिहास की जांच करने की भी इजाजत देता है. यानी इंश्योरेंस कंपनियां उल्लंघनों के आधार पर इंश्योरेंस का प्रीमियम तय करती हैं।

बार-बार क्लेम लेना पड़ता है भारी

हर क्लेम-फ्री साल के लिए, इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसीधारकों को नो-क्लेम बोनस NCB देती हैं। अगर आपकी ड्राइविंग बहुत खराब है और अक्सर ही अपनी गाड़ी ठोक देते हैं और फिर बार-बार, छोटे क्लेम लेते हैं तो बीमा कंपनियों को ये बात पसंद नहीं आती है। उन्हें ये संदेश जाता है कि आप एक लापरवाह ड्राइवर हैं। इसलिए अगर आपने क्लेम किया तो अगले रीन्युअल पर NCB जीरो हो सकता है या फिर कम हो सकता है। अगर आपकी ड्राइविंग हिस्ट्री अच्छी है तो, आप NCB भी ले सकते हैं और इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिस्काउंट भी।

NCB कैलकुलेशन
बीमा कंपनियां आमतौर पर पहले क्लेम फ्री साल पर 20% का डिस्काउंट देती हैं. इसके बाद वो इसे धीरे-धीरे हर क्लेम फ्री साल के लिए बढ़ाती जाती हैं.

क्लेम फ्री साल NCB
पहले साल का रीन्यूअल 20%
दूसरे साल का रीन्यूअल 25%
तीसरे साल का रीन्यूअल 35%
चौथे साल का रीन्यूअल 45%
पांचवें साल का रीन्यूअल 50%

कितना प्रीमियम बढ़ सकता है?

बीमा कंपनियों उन ड्राइवर्स को NCB यानी नो क्लेम बोनस इनाम के तौर पर देती हैं, जो क्लेम नहीं लेते हैं। ये सिर्फ सेफ ड्राइविंग को प्रमोट नहीं करता है, बल्कि अगली बार जब इंश्योरेंस का रीन्युअल होता है तो उस पर 50% तक का डिस्काउंट भी मिलता है। NCB से आपका OWN DAMAGE (OD) प्रीमियम कम होता है। ये डिस्काउंट आपको तबतक मिलता है जबतक आप कोई भी क्लेम नहीं लेते हैं।

जैसे कि मान लीजिए कि OD के लिए पहले साल का प्रीमियम 25,000 रुपये है। आपने कोई क्लेम नहीं लिया है तो दूसरे साल के लिए प्रीमियम इस तरह से होगा।

पॉलिसी साल NCB प्रीमियम अमाउंट
पहले साल का प्रीमियम ₹25,000
दूसरे साल का प्रीमियम 20% ₹20,000

इसलिए गाड़ी स्पीड लिमिट में चलाएं, यातायात नियमों का पालन करें. इससे आपकी खुद की जिंदगी और सेहत तो अच्छी रहेगी ही, आपके जेब की सेहत भी बढ़िया रहेगी।

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