बसंत बहार में संगीत कार्यशाला खास रही:लोकगीतों में घुली बसंत की रागिनी, महिलाओं ने लिया हिस्सा

बसंत बहार में संगीत कार्यशाला खास रही:लोकगीतों में घुली बसंत की रागिनी, महिलाओं ने लिया हिस्सा

गौरैया संस्कृति संस्थान की ओर सें आयोजित बसंत बहार कार्यशाला विशेष रहा। इस दौरान बसंत से जुड़े लोकगीतों में लोक-संस्कृति की मिठास घुलती नजर आई।कार्यशाला में बसंत से संबंधित लोकगीतों की विभिन्न विधाएं सिखाई गईं। प्रतिभागियों ने सुर और ताल के साथ पारंपरिक गीतों का अभ्यास किया। इस दिन ‘हमका दिहू वरदान’, ‘चलो री गुइयां गंगा नहाए’, ‘सखि छोटी ननद बेंदे पे अड़ी’ और ‘गोकुल में बाजेला बधइया’ जैसे गीत सिखाए गए। प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया कार्यशाला में महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आभा शुक्ला, नीलम, माधुरी सिंह, प्रतिमा त्रिपाठी, लता, रीना सिंह, शशि वर्मा, शशि सिंह, अमिता, निकिता, सुषमा और कविता सहित कई महिलाओं ने इसमें हिस्सा लिया। ऑनलाइन माध्यम से भी सहभागिता रही, जिसमें सतना से लता तिवारी ने भी प्रशिक्षण में भाग लिया। ताल और लय के गीतों की प्रस्तुतियां सीखी लगभग 25 से 30 प्रतिभागी नियमित रूप से इन गीतों को सीख रहे हैं। बसंत गीतों के साथ-साथ लोक-संस्कृति को समझने पर भी जोर दिया गया। ढोलक पर राजकुमार और हारमोनियम पर आकाश तिवारी ने संगत दी, जिससे ताल और लय के सहारे गीतों की प्रस्तुति में निखार आया। संस्थान की ओर से बताया गया कि यह कार्यशाला ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी है। जो लोग लोकगीत सीखना चाहते हैं, वे संस्था से संपर्क कर सकते हैं। आने वाले दिनों में बसंत की अन्य विधाओं पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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