Skin Disease: रंगीन पसीना! नाम सुनते ही आप यह सोच रहे होंगे कि भला ऐसा कैसे संभव हो सकता है। पसीना आना हमारे शरीर के लिए अच्छा होता है, यह हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित बनाए रखता है। आमतौर पर पसीने का कोई रंग नहीं होता है, यह रंगहीन होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें रंगीन पसीना आता है? जी हां, नीला, काला और हरा पसीना! यह बात आपको सोचने पर मजबूर कर सकती है लेकिन यह पूरी तरह तथ्याधारित है। रंगीन पसीना आना कोई जादुई या काल्पनिक बात नहीं है, बल्कि यह त्वचा की एक बीमारी है जिसे विज्ञान की भाषा में क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis) कहा जाता है। आइए जानते हैं रंगीन पसीना आने वाली यह बीमारी क्या है और इसके लक्षण क्या होते हैं? इससे बचने के लिए कौन से उपाय अपनाने चाहिए।
क्या होती है क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis)?
क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis) बहुत दुर्लभ बीमारियों में से एक है। इस बीमारी में व्यक्ति को रंगीन पसीना आता है। यानी जिस पसीने का कोई रंग नहीं होता, इस त्वचा की बीमारी से पीड़ित लोगों में पसीने का रंग नीला, हरा या काला होता है। हमारे शरीर में पसीना स्रावित करने वाली 2 ग्रंथियां होती हैं,एक्क्राइन (Eccrine) और एपोक्राइन (Apocrine)। त्वचा की यह बीमारी मुख्य रूप से एपोक्राइन ग्रंथियों से जुड़ी हुई है।
क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis) के लक्षण क्या-क्या होते हैं?
- गालों और माथे पर रंगीन पसीना दिखाई देना।
- पसीना सूखने के बाद कपड़ों पर नीला, हरा या काला दाग दिखाई देना।
- पसीना निकलने से ठीक पहले उस जगह पर हल्की खुजली होना।
क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis) के कारण क्या होते हैं?
- जब हमारे शरीर की रंग बनाने वाली ग्रंथि का ऑक्सीकरण (Oxidation) ज्यादा हो जाए, तब यह बीमारी होती है।
- लिपफ्यूसिन नाम का पिगमेंट जितना ज्यादा हमारे शरीर में ऑक्सीकृत होगा, पसीना उतना ही गहरा और रंगीन होगा।
क्रोमहिड्रोसिस (Chromhidrosis) से बचने के उपाय?
- नीम के पत्तों को पानी के साथ उबालकर उस पानी से नहाना चाहिए।
- जल्दी पसीना सोखने वाले कपड़े पहनने चाहिए।
- जितना हो सके सूती कपड़े ही पहनें।
- अगर बगल (एक्सिला) में ज्यादा पसीना आता है, तो स्वेटिंग पैड्स का इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


