श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा अंगद टीला मैदान पर आयोजित श्रीराम लला के द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के चौथे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भजन सम्राट अनूप जलोटा ने अपनी आवाज का जादू बिखेर दिया। श्रीराम लला के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद “ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन” से कार्यक्रम की शुरुआत की। .कौन कहता है भगवान आते नहीं, मीरा के जैसे बुलाते नहीं
“अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम् राम नारायणम् जानकी वल्लभम्…कौन कहता है भगवान आते नहीं, मीरा के जैसे बुलाते नहीं..” गीत सुना कर श्रोताओं को तलियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद “मेरे मन में राम तन में राम रोम रोम में राम रे, राम सुमिर ले ध्यान लगा ले छोड़ जगत के काम रे” भाजनों के बीच अनूप जलोटा ने पहले वायलिन संगतकर्ता महेश राव के साथ स र ग म की संगत की औऱ उत्कृष्ट वादन का परिचय दिया।
इसके बाद “श्याम तेरी बंशी, कन्हैया तेरी बंशी पुकारे राधा नाम,…..” प्रस्तुत कर श्रोताओं को साथ गाने पर मजबूर किया। “कभी कभी भगवान को भी भक्तो से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभू केवट की नाव चढ़े” की प्रस्तुति दी। इसी क्रम “जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम, बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम..|” तबला वादक की कुशलता प्रमाणित करने को वादक अमित चौधरी के साथ जुगलबंदी कर तलियां बटोरी।
अमीशा जलोटा ने “पायो जी मैने राम रतन धन पायो” की प्रस्तुति दी। अंत में अनूप जलोटा ने रामलला पर “ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैजनिया….. ” की प्रस्तुति देते हुए तलियाँ बटोरी| भजन गायकी में तबले पर अमित चौधरी, वायलीन पर महेश राव, गिटार पर हिमांशु तिवारी व गायन में अमीशा जलोटा ने संगत दी| “सत्यम शिवम् सुंदरम्” की गायकी के साथ मंच पर श्रोताओं के बीच सामने आई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में पार्श्व गायिका तृप्ति शाक्य ने अपने स्वरों का जादू बिखेरा| तृप्ति संगीत की धुनों के बीच “सत्यम शिवम् सुंदरम्” की गायकी के साथ मंच पर श्रोताओं के बीच सामने आई। तृप्ति के साथ श्रोता भी स्वर गुनगुनाने के साथ ताल देने लगे| तृप्ति की भाव भंगिमाएं कुछ नृत्य जैसा आभास भी देती रहीं। “सखी मिल गाओ री मंगल, प्रभु श्री राम आए हैं” गीत की स्वर लहरियां छेडी पूरा पंडाल मस्ती में झूम उठा। “जो प्रेम गली में आए नहीं प्रियतम का ठिकाना क्या जाने
प्रतिष्ठा द्वादशी मंच पर तृप्ति ने “दुनिया में यही एक सुखदायी नाम, श्रीराम जय राम जय जय राम| तेरे सब बिगड़े संवार देगा काम, श्रीराम जय राम जय जय राम||”, इसके बाद “जो प्रेम गली में आए नहीं प्रियतम का ठिकाना क्या जाने” गीत पर श्रोताओं को झूमने पर विवश किया, एक के बाद एक क्रमशः “लगाओ प्रभू से लगन धीरे धीरे…”, “कभी राम बनके कभी श्याम बनके”, की प्रस्तुति दी तो श्रोता भावविभोर हो उठे। “मेरी झोपडी के भाग देखो खुल गए आज राम आए है” पर पंडाल भक्ति रस से सराबोर हो उठा। ” नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के जहाँ मेरा ठिकाना हो ” पर सभी मुग्ध हो गए। हिंदी और भोजपुरी संगीत में अपने स्वरों के लिए पहचानी जाती हैं तृप्ति प्रदेश के इटावा जनपद में जन्मी व प्रयागराज में पली बढ़ी तृप्ति शाक्य प्रसिद्ध पार्श्व गायिका हैं| जो हिंदी और भोजपुरी संगीत में अपने स्वरों के लिए पहचानी जाती हैं| भक्ति और लोक गीतों में उन्होंने हिंदी, भोजपुरी के अलावा बंगाली, राजस्थानी, पंजाबी, संस्कृत, नेपाली कई भाषाओं के गीतों में स्वर दिया है। तृप्ति को मोहम्मद रफी पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी रत्न पुरस्कार जैसे कई सम्मान मिल चुके हैं। 18 वर्ष की किशोरावस्था से ही गायन शुरू करने वाली तृप्ति अब तक 700 से अधिक एल्बम और कई फिल्मों के लिए अपनी आवाज़ दे चुकी है| भगवान राम औऱ बाबा श्याम के गीत खूब सराहे गए।
कार्यक्रम मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पत राय, राजेंद्र सिंह पंकज, डॉ अनिल मिश्र, गोपाल, धनंजय पाठक, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, विनोद श्रीवास्तव, कप्तान केके तिवारी, भोलेन्द्र आदि उपस्थित रहे| कार्यक्रम का संचालन देश दीपक मिश्र व संयोजन आशीष मिश्र ने किया।


