Social Media Addiction: फ्रांस भी उन देशों की कतार में शामिल हो गया है जो युवा पीढ़ी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल पर सख्ती कर चुके हैं या इसकी तैयारी में हैं। नए साल के संदेश में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ संकेत दिए कि सरकार अब बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया और स्क्रीन की बढ़ती लत से बचाने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
सरकार 19 जनवरी को एक ड्राफ्ट बिल संसद में लाने की तैयारी में है। दुनियाभर में कई देशों की सरकारों का मानना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए नाबालिगों को लत लगाने वाले कंटेंट की ओर धकेलते हैं। ऐसे में ‘डिजिटल कर्फ्यू’, उम्र आधारित प्रतिबंध और स्क्रीन टाइम नियंत्रण जैसी पहलें जरूरी हो गई हैं।
फ्रांस यह करेगा उपाय
- 15 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच सीमित।
- 15–18 साल के किशोरों के लिए रात को ‘डिजिटल कर्फ्यू’।
- छोटी कक्षाओं पर लागू मोबाइल प्रतिबंध हाई स्कूलों तक बढ़ेगा।
बच्चों को किससे बचाना चाहती हैं सरकारें?
- लाइक, शेयर और नोटिफिकेशन का अदृश्य दबाव
- साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग
- फर्जी स्कीम और आर्थिक धोखाधड़ी
- यौन शोषण और बच्चों को जाल में फंसाना
- जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम और नींद की कमी
यह देश पहले ही बढ़ा चुके कदम
- ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम के यूजर अकाउंट डिएक्टिवेट करने का आदेश
- स्पेन, ग्रीस: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य उम्र सीमा की तैयारी
- इटली, डेनमार्क: उम्र सत्यापन सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है।
- न्यूजीलैंड: ऑस्ट्रेलिया जैसा कानून लाने पर विचार किया जा रहा है।
- इंडोनेशिया: न्यूनतम उम्र तय, हानिकारक कंटेंट फिल्टर अनिवार्य
- मलेशिया: बच्चों व किशोरों की सुरक्षा के लिए नए कानून की तैयारी
टेक कंपनियों की सफाई, ‘हम सुरक्षा बढ़ा रहे हैं
मेटा का दावा है कि वह उम्र सत्यापन मजबूत कर रहा है और किशोरों को संवेदनशील कंटेंट नहीं दिखाता। स्नेपचैट में टीन अकाउंट प्राइवेट होते हैं, चैट सिर्फ पहले से जुड़े दोस्तों से संभव है। टिकटॉक सहित अन्य प्लेटफॉर्म भी सेफ्टी टूल्स जोड़ रहे हैं, पर सरकारें मानती हैं कि यह पर्याप्त नहीं है।


