मुंगेर में सड़क सुरक्षा को लेकर हर साल फरवरी-मार्च में यातायात पुलिस और जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत नियमों के पालन, हेलमेट पहनने और सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। लेकिन मुंगेर जिले में ये अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। इसका नतीजा यह है कि वाहन चालकों की लापरवाही के कारण जिले की नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर सालभर खून बहता रहा। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी बनी जानलेवा जिले में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार वाहन, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और ओवरलोडिंग सवारी मानी जा रही है। हेलमेट नहीं पहनना, बिना सीट बेल्ट वाहन चलाना और गलत दिशा में गाड़ी चलाना आम बात हो गई है। खासकर नेशनल हाईवे पर तेज गति से दौड़ते वाहनों की चपेट में आकर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। एक साल में 88 लोगों की गई जान यातायात पुलिस द्वारा दर्ज सड़क दुर्घटना के मामलों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जनवरी से दिसंबर के बीच जिले में हुई सड़क दुर्घटनाओं में कुल 88 लोगों की मौत हुई है। इनमें 76 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया गया। हेलमेट नहीं पहनना बना मौत की वजह यातायात डीएसपी कार्यालय में दर्ज मामलों के अनुसार, अधिकतर मौतें हेलमेट नहीं पहनने और तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से हुई हैं। दोपहिया वाहन चालकों द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार भारी पड़ रही है। कई मामलों में दुर्घटना इतनी गंभीर रही कि मौके पर ही लोगों की मौत हो गई। महीने दर महीने बढ़ता रहा मौत का आंकड़ा अगर महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क हादसों का सिलसिला पूरे वर्ष जारी रहा। 88 परिवारों के लिए साल बन गया दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं में हुई 88 मौतों ने जिले के 88 परिवारों को जीवनभर का दर्द दे दिया। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पति या पिता। कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। सवालों के घेरे में जागरूकता अभियान लगातार बढ़ते हादसों ने सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और प्रशासनिक सख्ती भी नाकाफी साबित हो रही है। ऐसे में जरूरत है कि सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इन हादसों पर लगाम लगाई जा सके। मुंगेर में सड़क सुरक्षा को लेकर हर साल फरवरी-मार्च में यातायात पुलिस और जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत नियमों के पालन, हेलमेट पहनने और सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। लेकिन मुंगेर जिले में ये अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। इसका नतीजा यह है कि वाहन चालकों की लापरवाही के कारण जिले की नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर सालभर खून बहता रहा। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी बनी जानलेवा जिले में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार वाहन, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और ओवरलोडिंग सवारी मानी जा रही है। हेलमेट नहीं पहनना, बिना सीट बेल्ट वाहन चलाना और गलत दिशा में गाड़ी चलाना आम बात हो गई है। खासकर नेशनल हाईवे पर तेज गति से दौड़ते वाहनों की चपेट में आकर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। एक साल में 88 लोगों की गई जान यातायात पुलिस द्वारा दर्ज सड़क दुर्घटना के मामलों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जनवरी से दिसंबर के बीच जिले में हुई सड़क दुर्घटनाओं में कुल 88 लोगों की मौत हुई है। इनमें 76 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया गया। हेलमेट नहीं पहनना बना मौत की वजह यातायात डीएसपी कार्यालय में दर्ज मामलों के अनुसार, अधिकतर मौतें हेलमेट नहीं पहनने और तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से हुई हैं। दोपहिया वाहन चालकों द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार भारी पड़ रही है। कई मामलों में दुर्घटना इतनी गंभीर रही कि मौके पर ही लोगों की मौत हो गई। महीने दर महीने बढ़ता रहा मौत का आंकड़ा अगर महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क हादसों का सिलसिला पूरे वर्ष जारी रहा। 88 परिवारों के लिए साल बन गया दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं में हुई 88 मौतों ने जिले के 88 परिवारों को जीवनभर का दर्द दे दिया। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने पति या पिता। कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। सवालों के घेरे में जागरूकता अभियान लगातार बढ़ते हादसों ने सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और प्रशासनिक सख्ती भी नाकाफी साबित हो रही है। ऐसे में जरूरत है कि सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इन हादसों पर लगाम लगाई जा सके।


