झांसी में सीबीआई की बड़ी रेड: 70 लाख रुपए रिश्वत लेते आईआरएस अधिकारी सहित पांच गिरफ्तार

झांसी में सीबीआई की बड़ी रेड: 70 लाख रुपए रिश्वत लेते आईआरएस अधिकारी सहित पांच गिरफ्तार

CBI arrested IRS officer झांसी में सीबीआई ने केंद्रीय जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर सहित तीन अफसरों को गिरफ्तार किया है। साथ में एक वकील और व्यापारी को भी गिरफ्तार किया गया है। ‌ जिनके पास से 90 लाख रुपए नगद बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही भारी मात्रा में जेवर और संपत्ति के कागजात भी बरामद हुए हैं। जिनकी कुल कीमत 1.60 करोड़ रुपए है। सीबीआई गिरफ्तार अधिकारियों और अन्य को गोपनीय स्थान पर ले गई है। सीबीआई की कार्रवाई की जानकारी स्थानीय अधिकारियों में से किसी को नहीं हुई।‌ कार्रवाई ख़त्म होने के बाद लोगों को इसकी जानकारी हुई।‌ मामला नवाबाद थाना क्षेत्र का है। ‌

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की झांसी में सीबीआई ने बड़ी रेड डाली। जिसकी स्थानीय स्तर पर किसी को भनक तक नहीं लगी। पूरी कार्रवाई ख़त्म होने के बाद जीएसटी अफसर को इसकी जानकारी हुई। सीबीआई ने केंद्रीय जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर आईआरएस प्रभा भंडारी सहित तीन अधिकारियों को 70 लाख रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया। इसके साथ ही जीएसटी के मामलों को देखने वाले वकील नरेश कुमार गुप्ता और जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मगनानी को भी गिरफ्तार किया गया है।

पूछताछ के लिए गोपनीय स्थान पर ले गई

सीबीआई गिरफ्तार अधिकारियों और अन्य को पूछताछ के लिए गोपनीय स्थान पर ले गई है‌। जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। बताया जाता है कि मंगलवार को ही सीबीआई की टीम झांसी पहुंच गई थी। ‌सीबीआई को इनपुट मिला था कि जीएसटी की छापे की कार्रवाई रोकने के बदले केंद्रीय जीएसटी के ऑफिसर मोटी रकम रिश्वत के रूप में लेने जा रहे हैं। सबसे पहले सीबीआई ने जीएसटी के वकील नरेश कुमार गुप्ता से पूछताछ की। इसके बाद सीबीआई ने सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और उनके दो सुपरिंटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को बीच सड़क पर 70 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

मामला इस प्रकार सामने आया

बीते 19 दिसंबर को सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के नेतृत्व में झोकन बाग स्थित जय दुर्गा हार्डवेयर फॉर्म में छापा मारा गया था। जिस पर टैक्स में गड़बड़ी करने का आरोप था। इस दौरान टीम तीन बोरों में कागजात अपने साथ ले गई थी। जिसकी छानबीन चल रही है। इसी मामले को निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों ने डेढ़ करोड़ रुपए की मांग की थी। सीजीएसटी के वकील नरेश कुमार गुप्ता के माध्यम से यह बातचीत हो रही थी। इसकी जानकारी सीबीआई तक पहुंच गई। इसके बाद यह कार्रवाई की गई।

विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से होती है टैक्स की चोरी

बताया जाता है कि जीएसटी चोरी के मामले विभाग के सुपरिंटेंडेंट अनिल तिवारी, सुपरिंटेंडेंट अजय शर्मा और वकील नरेश गुप्ता निपटाते थे। जिनके माध्यम से रिश्वत की रकम तय और लेनदेन होता था। सीबीआई ने प्राइवेट फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया है।

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