नए साल के अवसर पर अनूपशहर के दर्जन भर ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल पर्यटकों के लिए आकर्षक विकल्प हो सकते हैं। ये स्थान शांति, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। मोहल्ला मदार गेट में स्थित सिद्ध संत स्वामी दीनदयाल महाराज की समाधि एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां प्रतिवर्ष होली के अवसर पर एक बड़ा मेला आयोजित होता है, जिसमें प्रदेश भर से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। अनूपशहर बलभद्र क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, जहां मोहल्ला नागर शैली मे बलभद्र महाराज की काले पत्थर की एक दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। यहां हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मेला लगता है। इसके अतिरिक्त, राजा अनूप द्वारा अपने शासनकाल में स्थापित अनूपेश्वर महादेव मंदिर भी मोहल्ला मदार गेट में स्थित है और यह धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है।इसी के समीप स्थित गणेश मंदिर एवं पंचमुखी महादेव मंदिर भी धार्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। देश के प्रसिद्ध उद्योगपति जयप्रकाश गौड़ द्वारा निर्मित हर हर महादेव मंदिर भी एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। यहां स्थापित फुब्बारा, लाइटिंग और हरियाली आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इसी मंदिर के निकट मस्तराम घाट स्थित है। गंगा किनारे 51 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा यहां का एक प्रमुख सेल्फी पॉइंट है। यह घाट अब अनूपशहर में प्री-वेडिंग शूट के लिए भी लोकप्रिय हो गया है। बाबा मस्तराम की समाधि भी पर्यटकों के लिए एक आकर्षक केंद्र है। यहां के बारे में यह मान्यता है कि रविवार को बाबा मस्तराम से मांगी गई प्रत्येक मुराद पूरी होती है। भक्त प्रसाद के रूप में बाबा को सिगरेट चढ़ाते हैं, जिसे बाबा पीते हैं। मोहल्ला मदार गेट में सिखों के सातवें गुरु, गुरु हरिराय साहिब की याद में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा स्थित है। यह गुरुद्वारा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु हरिराय साहब की ससुराल भी अनूपशहर में ही थी। कस्बे के मोहल्ला नागर शैली में स्थित गिरधारी जी का मंदिर एक अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल है। मान्यता है कि यहां पर मीराबाई के गिरधर नागर (भगवान कृष्ण) की प्रतिमा स्थापित हैं, जिससे यह मंदिर भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। अनूपशहर के बबस्टर गंज घाट पर बाल हनुमान मंदिर स्थित है। प्रत्येक मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां चोला चढ़ाने और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वैशाख पूर्णिमा, यानी हनुमान जन्मोत्सव पर यहां एक बड़ा आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों परिवार दर्शन करने आते हैं। अनूपशहर से करीब पांच किमी दूर गंगा किनारे महर्षि भृगु की तपोभूमि भृगु क्षेत्र आश्रम भी एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। आश्रम के चारों ओर फैली हरियाली इसे एक शांत और दर्शनीय स्थान बनाती है। अनूपशहर से 15 किमी दूर महाभारतकालीन मां अवंतिका देवी मंदिर में वर्ष के दोनों नवरात्रि पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों भक्तगण पहुंचते हैं। इस मंदिर को भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का साक्षी भी माना जाता है। गंगा नदी का किनारा और आसपास की हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसी स्थान से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर महाभारतकालीन अंबकेश्वर मंदिर स्थित है। जनश्रुति के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना पांडवों द्वारा की गई थी और इसकी गहराई पाताल लोक तक जाती है।


