Fat Loss Korean Style: वजन घटाने की बात आते ही अक्सर भूखा रहने और सख्त डाइट की तस्वीर सामने आ जाती है, लेकिन Korean Switch On Diet इस सोच को बदलने का दावा करती है। यह कोरियन स्टाइल डाइट शरीर के मेटाबॉलिज़्म को एक्टिव करने पर फोकस करती है, ताकि बिना ज्यादा कटौती के फैट बर्न किया जा सके। इस डाइट को साउथ कोरिया के मोटापा विशेषज्ञ डॉ. पार्क योंग-वू ने तैयार किया है। इसका मकसद शरीर के मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करना है ताकि शरीर फैट को एनर्जी के तौर पर इस्तेमाल करे, न कि मसल्स को नुकसान पहुंचाए।
क्यों मानी जा रही है यह डाइट असरदार
इस डाइट का फोकस पेट की सेहत सुधारने और अनहेल्दी क्रेविंग को कंट्रोल करने पर है। इसमें शुगर, मैदा, प्रोसेस्ड फूड, शराब और ज्यादा कैफीन से दूरी बनाई जाती है। इसके बदले हाई-प्रोटीन फूड जैसे अंडे, चिकन, मछली, टोफू, नट्स और फाइबर से भरपूर सब्ज़ियां शामिल की जाती हैं। रोजाना पर्याप्त पानी, हल्की एक्सरसाइज और अच्छी नींद को भी उतना ही जरूरी माना जाता है।
डाइट का आसान वीक-बाय-वीक प्लान
- पहले हफ्ते में शरीर को डिटॉक्स करने पर जोर दिया जाता है। शुरुआती कुछ दिनों तक प्रोटीन शेक, वॉक और प्रोबायोटिक्स लिए जाते हैं। इसके बाद हल्का, लो-कार्ब और हाई-प्रोटीन लंच जोड़ा जाता है।
- दूसरे हफ्ते में इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू होती है। रात का खाना बहुत हल्का रखा जाता है और एक दिन 24 घंटे का फास्ट भी शामिल किया जाता है।
- तीसरे और चौथे हफ्ते में फास्टिंग और एक्सरसाइज का स्तर थोड़ा बढ़ जाता है। वर्कआउट के बाद सीमित मात्रा में हेल्दी कार्ब्स लेने की छूट मिलती है, जिससे एनर्जी बनी रहे।
सोशल मीडिया पर लोगों के अनुभव
कई लोग सोशल मीडिया पर इस डाइट से जुड़े अपने रिजल्ट शेयर कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि उनका वजन तेजी से कम हुआ और शरीर पहले से ज्यादा हल्का महसूस होने लगा। कुछ लोगों ने बेहतर नींद और कम भूख की भी बात कही। भारत में लोग इसे अपने खाने के हिसाब से ढाल रहे हैं, जैसे टोफू की जगह पनीर या चावल की जगह शकरकंद का इस्तेमाल।
क्या हैं इसके नुकसान
हर डाइट की तरह इसके भी कुछ नुकसान बताए जाते हैं। शुरुआत में सिरदर्द, थकान या चिड़चिड़ापन हो सकता है। लंबे समय तक फास्टिंग सभी के लिए सही नहीं होती, खासकर जिनकी सेहत पहले से कमजोर हो। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बिना सही जानकारी के सख्त डाइट अपनाना नुकसानदेह हो सकता है।
अपनाने से पहले क्या रखें ध्यान
अगर कोई इस डाइट को आजमाना चाहता है तो धीरे-धीरे शुरुआत करना बेहतर है। शरीर के सिग्नल समझना और जरूरत पड़े तो डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है। वजन कम करना अच्छी बात है, लेकिन सेहत को नजरअंदाज करके नहीं। लंबे समय तक फिट रहने के लिए संतुलित खानपान और टिकाऊ आदतें ही सबसे बड़ा मंत्र हैं।


