नया साल टर्निंग प्वॉइंट…नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़:15000 नौकरियां मिलेंगी, पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा लागू, मेट्रो-महादेव घाट कॉरिडोर पर फोकस, ट्रेनों की बदलेगी टाइमिंग

नया साल टर्निंग प्वॉइंट…नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़:15000 नौकरियां मिलेंगी, पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा लागू, मेट्रो-महादेव घाट कॉरिडोर पर फोकस, ट्रेनों की बदलेगी टाइमिंग

साल 2026 छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ कैलेंडर का नया पन्ना नहीं, बल्कि प्रशासनिक, सुरक्षा और शहरी ढांचे में बड़े बदलावों का साल बनने जा रहा है। नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अब आखिरी पड़ाव में है। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक राज्य नक्सल मुक्त होगा। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही कानून-व्यवस्था की कमान और मजबूत होगी। वहीं सरकारी दफ्तर फाइलों के ढेर से निकलकर ई-ऑफिस सिस्टम में प्रवेश करेंगे, जहां फैसले तेज होंगे। जवाबदेही सीधे सिस्टम में दर्ज होगी। दूसरी ओर विकास की तस्वीर भी तेजी से रंग भरने वाली है। स्टेट कैपिटल रीजन और रायपुर-दुर्ग मेट्रो की शुरुआत राजधानी क्षेत्र का नक्शा बदल देगी। महादेव घाट कॉरिडोर रायपुर को धार्मिक-पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभारेगा, जबकि राज्य स्तरीय रोजगार मेला हजारों युवाओं के लिए उम्मीद का दरवाजा खोलेगा। इसके साथ ही रेल यात्रियों के लिए ट्रेनों की टाइमिंग बदलेगी। आम जनता के लिए प्रशासन, सुरक्षा और सुविधाओं का चेहरा बदलने वाला है। कुल मिलाकर, 2026 छत्तीसगढ़ के लिए नया सिस्टम, नई रफ्तार और नई पहचान लेकर आता दिख रहा है। इस रिपोर्ट में डिटेल में पढ़िए 2026 में होने वाले बदलाव और इससे जुड़ी जानकारियां… नए साल में कानून होंगे आसान, आम लोगों को मिलेगी राहत नए साल 2025 में छत्तीसगढ़ में कानूनों का स्वरूप भी आम नागरिकों के अनुकूल होने जा रहा है। मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक 2025 के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इसके तहत राज्य के 11 विभागों से जुड़े 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। अब तक कई कानूनों में छोटे उल्लंघनों पर भी जुर्माना या कारावास का प्रावधान था, जिससे आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते थे। नए संशोधनों के बाद ऐसे मामलों में जेल या लंबी न्यायिक प्रक्रिया की जगह प्रशासकीय जुर्माने का प्रावधान होगा। इससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, अदालतों का बोझ घटेगा और लोगों को जल्दी राहत मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले भी राज्य सरकार 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन कर चुकी है। अब दूसरे चरण में और कानूनों को सरल बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का दूसरा संस्करण लाया जा रहा है। कुल मिलाकर, नया साल छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए सिर्फ घूमने-फिरने के नए ठिकाने नहीं, बल्कि कानूनी राहत और आसान सिस्टम भी लेकर आ रहा है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का दावा केंद्र और राज्य सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करना है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि बस्तर संभाग समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी संगठनों की पकड़ कमजोर पड़ चुकी है। नक्सल विरोधी अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। पिछले कुछ वर्षों में नक्सल हिंसा में तेज गिरावट के साथ-साथ बड़े नक्सल कैडर पर भी सीधा असर पड़ा है। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में PLGA, DVCM और ACM स्तर के कई सीनियर नक्सली मारे गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में इनामी और सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इससे नक्सली संगठनों की कमांड स्ट्रक्चर कमजोर हुई है। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति के तहत 2019 से अब तक नक्सल प्रभावित राज्यों में 377 फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित किए गए हैं, जिनमें 229 FOB सीआरपीएफ द्वारा बनाए गए हैं। इन सुरक्षा कैंपों के जरिए दुर्गम इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा बलों की स्थायी मौजूदगी बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2018 में जहां 126 जिले नक्सल प्रभावित थे। वहीं अक्टूबर 2025 तक यह संख्या घटकर सिर्फ 11 जिले रह गई है। नक्सल हिंसा की घटनाएं 2010 की 1,936 से घटकर 2025 में 218 रह गईं, जबकि नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में 90 फीसदी से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नर सिस्टम साल 2026 में राजधानी रायपुर की पुलिसिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की तैयारी कर चुकी है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस को अधिक अधिकार मिलेंगे। निर्णय प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज होगी। फिलहाल कई मामलों में पुलिस को मजिस्ट्रेट या प्रशासनिक अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम में यह प्रक्रिया सरल और त्वरित हो जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे अपराध नियंत्रण मजबूत होगा। तुरंत कार्रवाई संभव होगी। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी उठते रहे हैं कि कहीं इससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित तो नहीं होगा। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ती शहरी आबादी, ट्रैफिक दबाव और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए राजधानी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करना जरूरी हो गया है। प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह डिजिटल, ई-ऑफिस होगा अनिवार्य साल 2026 में छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक कामकाज लगभग पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस सिस्टम को पूरी तरह लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत सरकारी दफ्तरों में फाइलें (नस्ती) ऑनलाइन चलेंगी। डाक का संपादन ई-ऑफिस के जरिए होगा और नोटशीट, आदेश और पत्राचार पूरी तरह डिजिटल किए जाएंगे। हालांकि आवश्यक और कानूनी दस्तावेजों के लिए हार्डकॉपी मान्य रहेगी, लेकिन बाकी सभी काम पेपरलेस सिस्टम से होंगे। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से फाइलें गुम होने की समस्या कम होगी, निर्णय प्रक्रिया में देरी घटेगी और कामकाज में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ेगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अब हर कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। राजधानी का नया नक्शा और मेट्रो की तैयारी होगी शुरू साल 2026 में छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शहरी बदलाव स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) परियोजना के रूप में सामने आएगा। 1 जनवरी 2026 से रायपुर, दुर्ग, भिलाई और नवा रायपुर अटल नगर को मिलाकर SCR के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू होगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा में राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक-2025 पहले ही पारित किया जा चुका है और 2026 में इसी प्राधिकरण के जरिए योजनाओं को जमीन पर उतारने की तैयारी है। SCR का उद्देश्य राजधानी क्षेत्र के शहरी विकास को एकीकृत करना है। इसके तहत ट्रैफिक, आवास और इन्फ्रास्ट्रक्चर की साझा और दीर्घकालिक योजना बनाई जाएगी, ताकि बढ़ती आबादी का दबाव संभाला जा सके और निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। SCR के तहत एक अहम परियोजना रायपुर-दुर्ग मेट्रो रेल सेवा भी है। सरकार ने इसके लिए शुरुआती तौर पर 5 करोड़ रुपए का बजट तय किया है, जिससे DPR और प्रारंभिक तकनीकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मेट्रो परियोजना को लेकर वित्तीय और तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन 2026 में SCR और मेट्रो दोनों योजनाओं को लेकर प्रक्रिया तेज होगी। नए साल से SECR बिलासपुर जोन की ट्रेनों का बदलेगा समय नए साल से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर जोन से होकर चलने वाली एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की समय-सारणी में बदलाव किया जा रहा है। 1 जनवरी 2026 से नई समय-सारणी लागू होगी। नई टाइम-टेबल के तहत ट्रेनों के समय में 5 से 25 मिनट तक का बदलाव किया गया है। रेलवे का दावा है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और परिचालन गति बढ़ने से यात्रा समय की बचत होगी। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले नई समय-सारणी की जानकारी जरूर प्राप्त करें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। यात्री संबंधित स्टेशन, रेलवे पूछताछ केंद्र या रेलवे की अधिकृत वेबसाइट से अपडेटेड टाइम-टेबल देख सकते हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अनुसार, नई समय-सारणी में कुल 63 गाड़ियों के समय में आंशिक बदलाव किया गया है। इसमें अप और डाउन दिशा की 55 एक्सप्रेस और 8 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। अन्य ट्रेनों और स्टेशनों की समय-सारणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रोजगार मेले में बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा मौका छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं के लिए साल 2026 नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। सरकार की योजना के मुताबिक, छत्तीसगढ़ रोजगार मेला 2026 के जरिए 15 हजार से ज्यादा युवाओं को नौकरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने पहले ही ये दावा कर दिया है कि 2026 में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय रोजगार मेले को बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें निजी और सरकारी क्षेत्र की कई कंपनियां हिस्सा लेंगी। मंत्री के मुताबिक, इस रोजगार मेले का मकसद सिर्फ नौकरियां देना ही नहीं, बल्कि युवाओं को उनकी कौशल क्षमता के अनुसार अवसर उपलब्ध कराना है। अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के आने से आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह पहल राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को कम करने और युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। महादेव घाट कॉरिडोर, रायपुर को मिलेगा नया धार्मिक-पर्यटन हब रायपुर में खारुन नदी के किनारे स्थित महादेव घाट और हटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर अब एक नए रूप में नजर आने वाला है। राज्य सरकार यहां महादेव घाट कॉरिडोर विकसित करने जा रही है, जिसे मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल लोक कॉरिडोर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। यह परियोजना न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी होगी, बल्कि रायपुर को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी। परियोजना के तहत महादेव घाट का संपूर्ण सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास किया जाएगा। घाटों का नवीनीकरण कर उन्हें सुरक्षित और आकर्षक बनाया जाएगा। ताकि श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना और स्नान कर सकें। मंदिर परिसर में भव्य प्रवेश द्वार, चौड़ी और व्यवस्थित सड़कें, पैदल मार्ग और बैठने की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। कॉरिडोर में धार्मिक गतिविधियों के लिए यज्ञशाला, प्रसाद और पूजन सामग्री के लिए वेंडर शॉप्स की सुविधाएं। खारुन नदी पर झूलता पुल और नौका विहार साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई मनोरंजन सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें खारुन नदी पर झूलता पुल, नौका विहार, लाइटिंग और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे यह इलाका दिन के साथ-साथ शाम और रात में भी आकर्षण का केंद्र बना रहेगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के लिए करीब 20 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, डिजाइन और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होते ही काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। महादेव घाट कॉरिडोर के विकसित होने से जहां एक ओर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन बढ़ने से होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यवसायों को भी सीधा फायदा मिलने की संभावना है। महादेव घाट कॉरिडोर रायपुर के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन नक्शे को नया आयाम देने वाली परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है।

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