वैशाली पुलिस ने साइबर ठगी से 58 हजार रुपए बचाए:डिजिटल ट्रेल से रोकी गई रकम, पुलिस बोली-ठगी होने पर 1930 पर तुरंत करें शिकायत

वैशाली पुलिस ने साइबर ठगी से 58 हजार रुपए बचाए:डिजिटल ट्रेल से रोकी गई रकम, पुलिस बोली-ठगी होने पर 1930 पर तुरंत करें शिकायत

साइबर अपराध की लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच वैशाली पुलिस ने एक सराहनीय सफलता हासिल की है। हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र के सहजादपुर, किला पत्थर मस्जिद निवासी प्रेमचंद्र प्रकाश के खाते से ऑनलाइन ठगी के जरिए निकाले गए 58,454 रुपए पुलिस ने सफलतापूर्वक वापस दिला दिए हैं। इस कार्रवाई से न सिर्फ पीड़ित को राहत मिली है, बल्कि आम लोगों में साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भरोसा भी मजबूत हुआ है। ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ था युवक प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेमचंद्र प्रकाश, पिता शत्रुघन राय, के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग के जरिए रकम उड़ा ली थी। ठगों ने किसी अज्ञात लिंक या माध्यम से जानकारी हासिल कर पीड़ित के खाते से 58,454 रुपए की अवैध निकासी कर ली। घटना के बाद पीड़ित और उसके परिजनों में काफी चिंता और तनाव का माहौल था। साइबर थाने में दर्ज हुआ मामला मामले को लेकर पीड़ित की ओर से हाजीपुर स्थित साइबर थाना में 18 जून 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह मामला साइबर थाना कांड संख्या 33/24 के तहत दर्ज हुआ, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 465, 471 तथा आईटी एक्ट 2000 की धारा 66(C) और 66(D) लगाई गई। इस शिकायत की पावती संख्या 30505240016612 है। तेजी से शुरू हुई जांच प्रक्रिया शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई शुरू की। साइबर अपराध इकाई की टीम ने संबंधित बैंक, भुगतान माध्यमों और तकनीकी एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया। जांच के दौरान डिजिटल ट्रांजैक्शन का पूरा ट्रेल खंगाला गया और उस खाते की पहचान की गई, जहां ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। डिजिटल ट्रेल से रोकी गई रकम साइबर पुलिस अधिकारियों ने समय रहते संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराया, जिससे ठगी की गई रकम आगे ट्रांसफर नहीं हो सकी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बैंक के सहयोग से 58,454 रुपये की पूरी राशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज होने के कारण ही यह सफलता संभव हो सकी। पुलिस ने दी सतर्कता की सलाह साइबर थाना हाजीपुर के प्रभारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन लेनदेन के दौरान पूरी सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक, ई-मेल या एप पर भरोसा न करें। ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी साइबर ठगी का कारण बन सकती है। 1930 पर तुरंत करें शिकायत पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में की गई शिकायत से संबंधित खातों को फ्रीज कर रकम वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। पीड़ित ने जताया आभार रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित प्रेमचंद्र प्रकाश ने वैशाली पुलिस और साइबर थाना की टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि पैसा वापस मिलना मुश्किल है, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उनका भरोसा कायम हुआ। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि साइबर ठगी होने पर डरें नहीं, बल्कि तुरंत पुलिस से संपर्क करें। जागरूकता और कार्रवाई दोनों जरूरी यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि साइबर अपराध से लड़ाई में पुलिस की सक्रियता के साथ-साथ आम लोगों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। समय पर सूचना और सतर्क व्यवहार ही साइबर ठगों पर लगाम लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है। साइबर अपराध की लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच वैशाली पुलिस ने एक सराहनीय सफलता हासिल की है। हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र के सहजादपुर, किला पत्थर मस्जिद निवासी प्रेमचंद्र प्रकाश के खाते से ऑनलाइन ठगी के जरिए निकाले गए 58,454 रुपए पुलिस ने सफलतापूर्वक वापस दिला दिए हैं। इस कार्रवाई से न सिर्फ पीड़ित को राहत मिली है, बल्कि आम लोगों में साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भरोसा भी मजबूत हुआ है। ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ था युवक प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रेमचंद्र प्रकाश, पिता शत्रुघन राय, के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग के जरिए रकम उड़ा ली थी। ठगों ने किसी अज्ञात लिंक या माध्यम से जानकारी हासिल कर पीड़ित के खाते से 58,454 रुपए की अवैध निकासी कर ली। घटना के बाद पीड़ित और उसके परिजनों में काफी चिंता और तनाव का माहौल था। साइबर थाने में दर्ज हुआ मामला मामले को लेकर पीड़ित की ओर से हाजीपुर स्थित साइबर थाना में 18 जून 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह मामला साइबर थाना कांड संख्या 33/24 के तहत दर्ज हुआ, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 465, 471 तथा आईटी एक्ट 2000 की धारा 66(C) और 66(D) लगाई गई। इस शिकायत की पावती संख्या 30505240016612 है। तेजी से शुरू हुई जांच प्रक्रिया शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई शुरू की। साइबर अपराध इकाई की टीम ने संबंधित बैंक, भुगतान माध्यमों और तकनीकी एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया। जांच के दौरान डिजिटल ट्रांजैक्शन का पूरा ट्रेल खंगाला गया और उस खाते की पहचान की गई, जहां ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। डिजिटल ट्रेल से रोकी गई रकम साइबर पुलिस अधिकारियों ने समय रहते संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराया, जिससे ठगी की गई रकम आगे ट्रांसफर नहीं हो सकी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बैंक के सहयोग से 58,454 रुपये की पूरी राशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज होने के कारण ही यह सफलता संभव हो सकी। पुलिस ने दी सतर्कता की सलाह साइबर थाना हाजीपुर के प्रभारी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन लेनदेन के दौरान पूरी सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक, ई-मेल या एप पर भरोसा न करें। ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी साइबर ठगी का कारण बन सकती है। 1930 पर तुरंत करें शिकायत पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में की गई शिकायत से संबंधित खातों को फ्रीज कर रकम वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। पीड़ित ने जताया आभार रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित प्रेमचंद्र प्रकाश ने वैशाली पुलिस और साइबर थाना की टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि पैसा वापस मिलना मुश्किल है, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उनका भरोसा कायम हुआ। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि साइबर ठगी होने पर डरें नहीं, बल्कि तुरंत पुलिस से संपर्क करें। जागरूकता और कार्रवाई दोनों जरूरी यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि साइबर अपराध से लड़ाई में पुलिस की सक्रियता के साथ-साथ आम लोगों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। समय पर सूचना और सतर्क व्यवहार ही साइबर ठगों पर लगाम लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है।  

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