झारखंड के युवाओं के लिए नया साल खुशखबरी लेकर आने वाला है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज सीजीएल परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। यह कार्यक्रम दिन के 1.30 बजे से राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया गया है। लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं मंच से नियुक्ति पत्र वितरण करेंगे, जिससे इस आयोजन को खास महत्व मिल गया है। प्रशाखा पदाधिकारी के हैं सर्वाधिक उम्मीदवार झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के तहत विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। चयनित पदों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 847, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 191, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 239, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के 170, अंचल निरीक्षक सह कानूनगो के 178, कनीय सचिवालय सहायक के 288 और प्लानिंग असिस्टेंट के 4 पद शामिल हैं। कुल मिलाकर 1927 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने जा रहे हैं। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम की है भव्य तैयारी इन नियुक्तियों से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी सफलता मिलने जा रही है। इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। इधर, मोरहाबादी मैदान में होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया गया है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री इस आयोजन की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुरक्षा, यातायात, बैठने की व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय है। विज्ञापन से नियुक्ति तक विवादों की कहानी जिस नियुक्ति परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को आज नियुक्ति पत्र दिया जा रहा, वह परीक्षा लंबे समय तक विवादों में रही है। सीजीएल परीक्षा का सफर 28 दिसंबर 2015 को विज्ञापन जारी होने के साथ शुरू हुआ था। उस समय आवेदन शुल्क एक हजार रुपए रखा गया था। ठीक एक साल बाद 21 अगस्त 2016 को प्रारंभिक परीक्षा हुई और अक्टूबर में परिणाम भी जारी कर दिया गया, लेकिन मुख्य परीक्षा नहीं हो सकी। कारण था टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल पदों को एक साथ जोड़ देना। इसी मुद्दे को लेकर जनार्दन शर्मा नामक अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे। सिंगल बेंच ने छात्र के पक्ष में फैसला देते हुए दोनों श्रेणियों का रिजल्ट अलग-अलग प्रकाशित करने का आदेश दिया। सरकार इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच गई, जहां सिंगल बेंच का आदेश रद्द कर दिया गया। इसके बाद छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां सुनवाई से इनकार कर दिया गया। दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई, जिसमें कहा गया कि नियमावली की गलती सरकार की है, छात्रों की नहीं, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी सुनवाई नहीं की। अंततः सरकार ने पूरा विज्ञापन ही वापस ले लिया। आरक्षण, नियमावली और पेपर लीक ने बढ़ाई परेशानी साल 2017 में फिर से आवेदन लिए गए और परीक्षा 2018 में कराने की घोषणा हुई। इस बार पदों की संख्या बढ़ाई गई, लेकिन तारीख बदलकर 2019 के नवंबर-दिसंबर कर दी गई। तब भी परीक्षा नहीं हो सकी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 100 प्रतिशत आरक्षण झारखंडवासियों के लिए लागू कर दिया। बाद में यह फैसला वापस लिया गया। नई सरकार बनने के बाद 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया। नई नियमावली बनी, लेकिन 2022 में रमेश हांसदा बनाम राज्य सरकार केस में हाईकोर्ट से सरकार को झटका लगा और पूरी वैकेंसी रद्द करनी पड़ी। उसी साल फिर आवेदन बुलाए गए और परीक्षा की तारीख कई बार बदली गई। 2024 में 21 और 28 जनवरी को परीक्षा हुई, लेकिन पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई। अगस्त-सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा हुई, जिस पर फिर पेपर लीक और नियमों में भेदभाव के आरोप लगे। झारखंड के युवाओं के लिए नया साल खुशखबरी लेकर आने वाला है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज सीजीएल परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। यह कार्यक्रम दिन के 1.30 बजे से राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित किया गया है। लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं मंच से नियुक्ति पत्र वितरण करेंगे, जिससे इस आयोजन को खास महत्व मिल गया है। प्रशाखा पदाधिकारी के हैं सर्वाधिक उम्मीदवार झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के तहत विभिन्न विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। चयनित पदों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 847, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 191, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 239, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के 170, अंचल निरीक्षक सह कानूनगो के 178, कनीय सचिवालय सहायक के 288 और प्लानिंग असिस्टेंट के 4 पद शामिल हैं। कुल मिलाकर 1927 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने जा रहे हैं। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम की है भव्य तैयारी इन नियुक्तियों से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी सफलता मिलने जा रही है। इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। इधर, मोरहाबादी मैदान में होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया गया है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री इस आयोजन की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुरक्षा, यातायात, बैठने की व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय है। विज्ञापन से नियुक्ति तक विवादों की कहानी जिस नियुक्ति परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को आज नियुक्ति पत्र दिया जा रहा, वह परीक्षा लंबे समय तक विवादों में रही है। सीजीएल परीक्षा का सफर 28 दिसंबर 2015 को विज्ञापन जारी होने के साथ शुरू हुआ था। उस समय आवेदन शुल्क एक हजार रुपए रखा गया था। ठीक एक साल बाद 21 अगस्त 2016 को प्रारंभिक परीक्षा हुई और अक्टूबर में परिणाम भी जारी कर दिया गया, लेकिन मुख्य परीक्षा नहीं हो सकी। कारण था टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल पदों को एक साथ जोड़ देना। इसी मुद्दे को लेकर जनार्दन शर्मा नामक अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे। सिंगल बेंच ने छात्र के पक्ष में फैसला देते हुए दोनों श्रेणियों का रिजल्ट अलग-अलग प्रकाशित करने का आदेश दिया। सरकार इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच गई, जहां सिंगल बेंच का आदेश रद्द कर दिया गया। इसके बाद छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां सुनवाई से इनकार कर दिया गया। दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई, जिसमें कहा गया कि नियमावली की गलती सरकार की है, छात्रों की नहीं, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी सुनवाई नहीं की। अंततः सरकार ने पूरा विज्ञापन ही वापस ले लिया। आरक्षण, नियमावली और पेपर लीक ने बढ़ाई परेशानी साल 2017 में फिर से आवेदन लिए गए और परीक्षा 2018 में कराने की घोषणा हुई। इस बार पदों की संख्या बढ़ाई गई, लेकिन तारीख बदलकर 2019 के नवंबर-दिसंबर कर दी गई। तब भी परीक्षा नहीं हो सकी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 100 प्रतिशत आरक्षण झारखंडवासियों के लिए लागू कर दिया। बाद में यह फैसला वापस लिया गया। नई सरकार बनने के बाद 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया। नई नियमावली बनी, लेकिन 2022 में रमेश हांसदा बनाम राज्य सरकार केस में हाईकोर्ट से सरकार को झटका लगा और पूरी वैकेंसी रद्द करनी पड़ी। उसी साल फिर आवेदन बुलाए गए और परीक्षा की तारीख कई बार बदली गई। 2024 में 21 और 28 जनवरी को परीक्षा हुई, लेकिन पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई। अगस्त-सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा हुई, जिस पर फिर पेपर लीक और नियमों में भेदभाव के आरोप लगे।


