आसनसोल मंडल के जसीडीह–झाझा रेलखंड अंतर्गत सिमुलतला के टेलवा हाल्ट के पास बरुआ नदी पुल पर शनिवार देर रात सीमेंट लदी मालगाड़ी के बेपटरी हो जाने से रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। इस हादसे का सीधा असर जमुई रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां आम दिनों में यात्रियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला स्टेशन रविवार को पूरी तरह सन्नाटे में तब्दील नजर आया। स्टेशन से लेकर टेंपो स्टैंड तक वीरानी लगातार ट्रेनों के रद्द और रूट डायवर्ट किए जाने के कारण जमुई रेलवे स्टेशन का नजारा बदला-बदला दिखा। प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर और स्टेशन परिसर में स्थित टेंपो स्टैंड तक खाली नजर आए। जहां आमतौर पर सुबह से देर रात तक यात्रियों की भीड़ लगी रहती है, वहां इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दिए। स्टेशन पर सन्नाटा इस बात का गवाह था कि रेल यातायात ठप होने से जनजीवन किस कदर प्रभावित हुआ है। यात्रियों में असमंजस और चिंता लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बाधित होने से सबसे अधिक परेशानी आम यात्रियों, दैनिक मजदूरों और छात्रों को उठानी पड़ी। स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों के चेहरों पर असमंजस और चिंता साफ झलक रही थी। कई लोग ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफॉर्म पर बैठे रहे, लेकिन जब ट्रेनों के रद्द होने की सूचना मिली तो मायूस होकर लौटते नजर आए। बिना यात्रा किए लौटने को मजबूर यात्री सिकंदरा निवासी मंटू कुमार ने बताया कि वे बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। रविवार को ड्यूटी जॉइन करने के लिए वे जमुई स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन हादसे की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण ट्रेन पकड़ने से पहले ही स्टेशन आ गए। यहां पहुंचने पर पता चला कि अधिकांश ट्रेनें रद्द हैं। मजबूरी में उन्हें बिना यात्रा किए ही घर लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो स्टेशन आने की जरूरत नहीं पड़ती। ठंड में भटके यात्री और छात्र सिझौड़ी गांव निवासी कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उन्हें जरूरी काम से मधुपुर जाना था। कड़ाके की ठंड में पैदल स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ गई। वहीं, परीक्षा देकर लौट रहे लखीसराय के उत्तम कुमार सिंह और नवादा के अंकित कुमार यादव जैसे कई छात्र भी ट्रेनों के रद्द होने से स्टेशन परिसर में ठंड के बीच भटकते नजर आए। छात्रों का कहना था कि अचानक ट्रेनों के रद्द होने से न तो ठहरने की व्यवस्था थी और न ही वैकल्पिक साधन आसानी से मिल पा रहे थे। कुछ ट्रेनों का आंशिक संचालन, कई रद्द यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने कुछ ट्रेनों का आंशिक संचालन और रूट परिवर्तन किया। देवघर–पटना और पटना–देवघर मेमू को झाझा से शॉर्ट ओरिजिनेट व टर्मिनेट किया गया। वहीं जसीडीह–किऊल मेमू का परिचालन भी झाझा से किया गया। इसके अलावा वंदे भारत एक्सप्रेस और धनबाद–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस को गया मार्ग से डायवर्ट किया गया, जबकि कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करना पड़ा। ट्रैक बहाली में जुटा रेलवे प्रशासन रेलवे प्रशासन के अनुसार मालगाड़ी के बेपटरी होने से ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचा है। इंजीनियरिंग विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर ट्रैक बहाली के कार्य में जुटी हुई हैं। क्रेन और अन्य मशीनों की मदद से बेपटरी डिब्बों को हटाया जा रहा है, लेकिन पूरी तरह यातायात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। यात्रियों की परेशानी जारी रहने की आशंका जब तक जसीडीह–झाझा रेलखंड पर रेल व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटती, तब तक यात्रियों की परेशानियां जारी रहने की आशंका बनी हुई है। रेल यातायात बाधित होने से न सिर्फ यात्रियों को दिक्कत हो रही है, बल्कि व्यापार और दैनिक आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है। यात्रियों ने रेलवे से मांग की है कि ट्रैक बहाली का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और ट्रेनों की स्थिति की जानकारी समय पर सार्वजनिक की जाए, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। आसनसोल मंडल के जसीडीह–झाझा रेलखंड अंतर्गत सिमुलतला के टेलवा हाल्ट के पास बरुआ नदी पुल पर शनिवार देर रात सीमेंट लदी मालगाड़ी के बेपटरी हो जाने से रेल यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। इस हादसे का सीधा असर जमुई रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां आम दिनों में यात्रियों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला स्टेशन रविवार को पूरी तरह सन्नाटे में तब्दील नजर आया। स्टेशन से लेकर टेंपो स्टैंड तक वीरानी लगातार ट्रेनों के रद्द और रूट डायवर्ट किए जाने के कारण जमुई रेलवे स्टेशन का नजारा बदला-बदला दिखा। प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर और स्टेशन परिसर में स्थित टेंपो स्टैंड तक खाली नजर आए। जहां आमतौर पर सुबह से देर रात तक यात्रियों की भीड़ लगी रहती है, वहां इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दिए। स्टेशन पर सन्नाटा इस बात का गवाह था कि रेल यातायात ठप होने से जनजीवन किस कदर प्रभावित हुआ है। यात्रियों में असमंजस और चिंता लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बाधित होने से सबसे अधिक परेशानी आम यात्रियों, दैनिक मजदूरों और छात्रों को उठानी पड़ी। स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों के चेहरों पर असमंजस और चिंता साफ झलक रही थी। कई लोग ट्रेन के इंतजार में घंटों प्लेटफॉर्म पर बैठे रहे, लेकिन जब ट्रेनों के रद्द होने की सूचना मिली तो मायूस होकर लौटते नजर आए। बिना यात्रा किए लौटने को मजबूर यात्री सिकंदरा निवासी मंटू कुमार ने बताया कि वे बेंगलुरु की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। रविवार को ड्यूटी जॉइन करने के लिए वे जमुई स्टेशन पहुंचे थे, लेकिन हादसे की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण ट्रेन पकड़ने से पहले ही स्टेशन आ गए। यहां पहुंचने पर पता चला कि अधिकांश ट्रेनें रद्द हैं। मजबूरी में उन्हें बिना यात्रा किए ही घर लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो स्टेशन आने की जरूरत नहीं पड़ती। ठंड में भटके यात्री और छात्र सिझौड़ी गांव निवासी कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उन्हें जरूरी काम से मधुपुर जाना था। कड़ाके की ठंड में पैदल स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ गई। वहीं, परीक्षा देकर लौट रहे लखीसराय के उत्तम कुमार सिंह और नवादा के अंकित कुमार यादव जैसे कई छात्र भी ट्रेनों के रद्द होने से स्टेशन परिसर में ठंड के बीच भटकते नजर आए। छात्रों का कहना था कि अचानक ट्रेनों के रद्द होने से न तो ठहरने की व्यवस्था थी और न ही वैकल्पिक साधन आसानी से मिल पा रहे थे। कुछ ट्रेनों का आंशिक संचालन, कई रद्द यात्रियों की परेशानी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने कुछ ट्रेनों का आंशिक संचालन और रूट परिवर्तन किया। देवघर–पटना और पटना–देवघर मेमू को झाझा से शॉर्ट ओरिजिनेट व टर्मिनेट किया गया। वहीं जसीडीह–किऊल मेमू का परिचालन भी झाझा से किया गया। इसके अलावा वंदे भारत एक्सप्रेस और धनबाद–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस को गया मार्ग से डायवर्ट किया गया, जबकि कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को पूरी तरह रद्द करना पड़ा। ट्रैक बहाली में जुटा रेलवे प्रशासन रेलवे प्रशासन के अनुसार मालगाड़ी के बेपटरी होने से ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचा है। इंजीनियरिंग विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर ट्रैक बहाली के कार्य में जुटी हुई हैं। क्रेन और अन्य मशीनों की मदद से बेपटरी डिब्बों को हटाया जा रहा है, लेकिन पूरी तरह यातायात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। यात्रियों की परेशानी जारी रहने की आशंका जब तक जसीडीह–झाझा रेलखंड पर रेल व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटती, तब तक यात्रियों की परेशानियां जारी रहने की आशंका बनी हुई है। रेल यातायात बाधित होने से न सिर्फ यात्रियों को दिक्कत हो रही है, बल्कि व्यापार और दैनिक आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है। यात्रियों ने रेलवे से मांग की है कि ट्रैक बहाली का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और ट्रेनों की स्थिति की जानकारी समय पर सार्वजनिक की जाए, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।


