Bajra For Diabetes: थाली की शान ‘बाजरा’ सिर्फ एक अनाज नहीं, बल्कि बीमारियों से लड़ने का एक नेचुरल हथियार है। आज के समय में जब डायबिटीज (मधुमेह) एक बड़ी समस्या बन चुकी है, तब हमारे पूर्वजों का यह देसी सुपरफूड किसी नेचुरल दवाई से कम नहीं है। साइंस भी अब यह मान चुका है कि बाजरा ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए सबसे बेस्ट ऑप्शंस में से एक है। आइए समझते हैं कि बाजरा आपके शरीर में कैसे काम करता है और क्यों यह हर घर की डाइट में होना चाहिए।
शुगर कंट्रोल का असली फॉर्मूला
डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत है, खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल का अचानक बढ़ जाना होता है। जब हम गेहूं या चावल खाते हैं, तो वे शरीर में जाकर तुरंत शुगर में बदल जाते हैं, जिससे ब्लड में शुगर का लेवल अचानक बढ़ जाता है। इसके अलावा, बाजरा धीरे-धीरे पचता है, जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहती है, जिससे बॉडी में शुगर का लेवल नॉर्मल रहता है।
मैग्नीशियम, इंसुलिन का ‘नेचुरल बूस्टर’
बाजरे में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मैग्नीशियम हमारी बॉडी के सेल्स को ‘इंसुलिन’ का सही यूज करने में हेल्प करता है। जब इंसुलिन सही से काम करता है, तो शुगर लेवल अपने आप कंट्रोल में रहने लगता है।
फाइबर का सुरक्षा कवच
बाजरे में फाइबर यानी रेशे की मात्रा गेहूं के मुकाबले कहीं अधिक होती है। यह फाइबर डायबिटीज के रोगियों के लिए दो तरह से सुरक्षा कवच का काम करता है-
- कार्बोहाइड्रेट का धीमा अवशोषण : फाइबर की वजह बॉडी से मिलने वाली शुगर खून में धीरे-धीरे घुलती है।
- मोटापे से बचाव : बाजरा खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ फील होता है, जिससे इंसान बार-बार खाने से बचता है। वजन काबू में रहना डायबिटीज के इलाज का फर्स्ट स्टेप है।
इन तरीकों से कर सकते हैं बाजरे का सेवन
राजस्थान में बाजरे की राब और सोगरा (मोटी रोटी) को लोग पुराने समय से खाते आ रहे हैं। जब बाजरे को छाछ के साथ मिलाकर बनाया जाता है, तो इसकी पौष्टिकता और बढ़ जाती है। यह न केवल शुगर को रोकता है बल्कि बॉडी की इम्यूनिटी पावर भी मजबूत करता है।


