गोपालगंज के सुप्रसिद्ध थावे भवानी मंदिर में 17 दिसंबर को हुई चोरी की घटना के बाद प्रशासन ने वीआईपी दर्शन पर अगले आदेश तक पूर्णतः रोक लगा दी है। यह निर्णय मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सदर एसडीओ अनिल कुमार ने बताया कि 17 दिसंबर की रात मंदिर में मां दुर्गा के आभूषणों की चोरी हुई थी। इस घटना के बाद एहतियातन वीआईपी दर्शन व्यवस्था को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी एसडीओ ने स्पष्ट किया कि जब तक चोरी की घटना की पूरी जांच-पड़ताल नहीं हो जाती और मामले का खुलासा नहीं हो जाता, तब तक वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह फैसला आवश्यक था। इस चोरी में करोड़ों रुपए के मुकुट और जेवर गायब हुए, जिससे भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची। यह घटना भीड़भाड़ और विशिष्ट व्यक्तियों के आवागमन के दौरान सुरक्षा घेरे में सेंध लगने की संभावना को भी उजागर करती है। वीआईपी दर्शन के कारण आम भक्तों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था अक्सर वीआईपी दर्शन के कारण आम भक्तों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था। इस रोक से अब सभी श्रद्धालु एक समान व्यवस्था में दर्शन कर सकेंगे, जिससे मंदिर में अनुशासन बना रहेगा और कतार प्रबंधन बेहतर होगा। थावे मंदिर में विशेषकर सोमवार और शुक्रवार को भारी भीड़ होती है। विशिष्ट दर्शन बंद होने से भगदड़ जैसी स्थिति की संभावना कम होगी। चोरी के बाद अब मंदिर प्रशासन सेंसर लगाने पर विचार कर रहा है। वीआईपी दर्शन पर रोक को फिलहाल एक सुधारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है ताकि मंदिर की गरिमा और सुरक्षा वापस बहाल की जा सके। गोपालगंज के सुप्रसिद्ध थावे भवानी मंदिर में 17 दिसंबर को हुई चोरी की घटना के बाद प्रशासन ने वीआईपी दर्शन पर अगले आदेश तक पूर्णतः रोक लगा दी है। यह निर्णय मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सदर एसडीओ अनिल कुमार ने बताया कि 17 दिसंबर की रात मंदिर में मां दुर्गा के आभूषणों की चोरी हुई थी। इस घटना के बाद एहतियातन वीआईपी दर्शन व्यवस्था को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी एसडीओ ने स्पष्ट किया कि जब तक चोरी की घटना की पूरी जांच-पड़ताल नहीं हो जाती और मामले का खुलासा नहीं हो जाता, तब तक वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह फैसला आवश्यक था। इस चोरी में करोड़ों रुपए के मुकुट और जेवर गायब हुए, जिससे भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची। यह घटना भीड़भाड़ और विशिष्ट व्यक्तियों के आवागमन के दौरान सुरक्षा घेरे में सेंध लगने की संभावना को भी उजागर करती है। वीआईपी दर्शन के कारण आम भक्तों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था अक्सर वीआईपी दर्शन के कारण आम भक्तों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था। इस रोक से अब सभी श्रद्धालु एक समान व्यवस्था में दर्शन कर सकेंगे, जिससे मंदिर में अनुशासन बना रहेगा और कतार प्रबंधन बेहतर होगा। थावे मंदिर में विशेषकर सोमवार और शुक्रवार को भारी भीड़ होती है। विशिष्ट दर्शन बंद होने से भगदड़ जैसी स्थिति की संभावना कम होगी। चोरी के बाद अब मंदिर प्रशासन सेंसर लगाने पर विचार कर रहा है। वीआईपी दर्शन पर रोक को फिलहाल एक सुधारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है ताकि मंदिर की गरिमा और सुरक्षा वापस बहाल की जा सके।


