वीरता (मरणोपरांत) समाज सेवा के लिए जूडो में श्रेष्ठ प्रदर्शन पर्यावरण के लिए वीरता के लिए वीरता (मरणोपरांत) वीरता के लिए विज्ञान-प्रौद्योगिकी वंश तायल (17) : मलोया, चंडीगढ़ योगिता मंडावी (14) : कोंडागांव, छत्तीसगढ़ पूजा (17): बाराबंकी, उत्तर प्रदेश अजय राज (9) : आगरा, उत्तर प्रदेश व्योमा प्रिया (9): कोयंबटूर, तमिलनाडु कमलेश कुमार (11): भभुआ (कैमूर जिला), बिहार मुहम्मद सिदान पी (11) पल्लकड़, केरल अर्णव अनुप्रिया महर्षि (17) छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र खास: 2020 में माता-पिता के निधन के बाद अनाथ हुए तायल को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सिफारिश पर चंडीगढ़ के मलोया में स्नेहालय बाल गृह में रखा गया। यहां उन्होंने दिव्यांग बच्चों की सेवा शुरू की। दो का पुनर्वास कराया। उन्हें परीक्षा पे चर्चा 2023 में भाग के लिए पीएम से प्रशंसा पत्र प्राप्त हुआ है। खास: नक्सल प्रभावित कोंडागांव की योगिता कम उम्र में अनाथ हो गई थीं। राष्ट्रीय स्तर की खेलो इंडिया खिलाड़ी की पहचान। खेलो इंडिया महिला जूडो लीग (2025) में सब जूनियर 44 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक और राज्य स्तरीय स्कूल गेम्स (2024-25) में अंडर-19 गर्ल्स खिताब समेत कई पुरस्कार प्राप्त की हैं। खास: सुदूर गांव की रहने वाली पूजा ने गेहूं की कटाई करने वाली मशीनों से होने वाले कृषि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए भूसी धूल को अलग करने वाली मशीन विकसित की है। कई पुरस्कार प्राप्त की चुकी हैं। जापान के सकुरा विज्ञान विनिमय कार्यक्रम (2025) के लिए चयन हुआ। खास: गांव की नदी के पास मगरमच्छ के हमले में पिता की जान बचाकर असाधारण साहस का परिचय दिया। जब मगरमच्छ ने उनके पिता के पैर को जकड़ लिया और उन्हें पानी में खींचने की कोशिश की, तो अजय ने निडर होकर डंडे से बार-बार वार तब तक किया, जब तक मगरमच्छ ने छोड़ नहीं दिया। खास: अपने घर के पास के पार्क में स्लाइड से खेलते समय छह साल के बच्चे जियांश रेड्डी को करंट से बचाने की कोशिश में जान गंवा दी। दरअसल स्लाइड की लोहे की सीढ़ियों में क्षतिग्रस्त भूमिगत केबल से करंट फैल गया था। जियांश को झटका लगा, तो व्योमा उसकी मदद के लिए दौड़ी और करंट की चपेट में आ गई। खास: जयपुर गांव में दुर्गावती नदी स्नान के दौरान डूब रहे बच्चों को बचाने के दौरान खुद चपेट में आ गए थे। वे उन तीन बच्चों में शामिल थे, जो नदी में स्नान कर रहे थे। बचाने के प्रयास में वे बह गए। शव 48 घंटे बाद 15 किमी दूर मिला था। उनका काम निस्वार्थ साहस और बलिदान का एक मार्मिक उदाहरण है। खास: अपने दो दोस्तों को बिजली के झटके से बचाया। जब एक दोस्त ने बिजली के खंभे को छू लिया और दूसरा उसकी मदद करने की कोशिश में बिजली के झटके का शिकार हो गया, तो सिदान ने लकड़ी का इस्तेमाल करके उन्हें बिजली के झटके से दूर खींच लिया और दोनों की जान बचा ली। खास: 2022 में एक सड़क दुर्घटना में अपने दाहिने हाथ के लकवाग्रस्त होने के बाद विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धि में बदल दिया। इन्होंने ‘फेयर चांस’ विकसित किया, जो एक एआई-आधारित हाथ के लकवा को ठीक करने का उपकरण है। आईआईटी बॉम्बे टेकफेस्ट 2024 में अंतरराष्ट्रीय नवाचार पुरस्कार मिल चुका है।


