हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अमेरिका में नौकरी और वीजा देने का लालच देकर युवक से एजेंटों ने 50 लाख रुपए ऐंठ लिए। एजेंट ने युवक को डंकी रूट से अमेरिका भेजने की कोशिश की, जिसमें युवक अमेरिकी सेना ने पकड़ लिया और आठ महीने की हिरासत के बाद डिपोर्ट कर दिया गया।
दोस्त की सिफारिश पर भरोसा योगेश निवासी उमरी ने बताया कि जुलाई 2024 में उसके दोस्त हर्ष ने उसे करनाल में एजेंट अंकित चौधरी, विकास उर्फ कासू और गुरी के पास भेजा। इन एजेंट ने हर्ष काे अमेरिका भेजा था। बातचीत करने पर आरोपी एजेंटों ने खुद को सरकारी एजेंट होने का दावा किया। 50 लाख रुपए मांगे आरोपी ने उसे 50 लाख रुपए में अमेरिका भेजकर नौकरी दिलाने का वादा किया। इसमें टिकट, लाइफ इंश्योरेंस और जॉब सिक्योरिटी शामिल थी। आरोपी ने एडवांस में 15 लाख रुपए मांगे और बकाया रकम अमेरिका जाकर देना तय हुआ। भरोसा दिया कि अमेरिका के लिए लीगल फॉर्म खुले हैं और वे उसे लीगल तरीके से भेजेंगे। दिल्ली से ब्राजील भेजा एडवांस लेकर आरोपी ने उसे 22 जुलाई 2024 को फोन किया कि उसकी टिकट हो गई है। 26 जुलाई उसकी दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट कराई गई। लेकिन उसे ब्राजील के बीजल एयरपोर्ट पर उतार दिया गया। वहां उन्हें कस्टडी में ले लिया गया। 15 लाख के लिए किया मजबूर तब परिवार ने तुरंत अंकित-विकास से संपर्क किया, तो उसे छुड़ाने के लिए 15 लाख रुपए मांगे। अगले ही दिन अंकित और विकास गांव उमरी पहुंचे। यहां उसके परिवार ने 15 लाख रुपए नगद दिए। लेकिन उसे 10 दिनों तक ब्राजील की पुलिस कस्टडी में रहना पड़ा। डेढ़ महीना घुमाया यहां से छूटकर आरोपी उसे करीब डेढ़ महीने तक ब्राजील में घुमाते रहे। आरोपी बार-बार अमेरिका की सीधी फ्लाइट कराने का आश्वासन देते रहे। लेकिन आरोपियों ने उसको जंगलों के रास्ते अमेरिका भेजने का प्लान बनाया। ब्राजील से उसे कार से बुलिविया, फिर पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया पहुंचाया। 32 लाख रुपए मांगे कोलंबिया में अंकित ने अपना खाता दिया और 1 लाख रुपए मांगे। उसने परिवार से संपर्क करके पैसे ट्रांसफर करवा दिए। फिर उसे कोलंबिया से पनामा जंगल, कोस्टा रिका, निकारागुआ, ग्वाटेमाला होते हुए मेक्सिको पहुंचाया। वहां आरोपी के गुर्गों ने बंदूक तानकर 32 लाख रुपए मांगे, वरना जान से मारने की धमकी दी। नकद पैसे देकर छुड़ाया परिवार ने घबराहट में अंकित के उसी खाते में 2 लाख रुपए डाले और 2 दिन बाद बकाया 30 लाख रुपए कैश सौंपे दिए। फिर किसी तरह उन लोगों ने उसे मेक्सिको से अमेरिकी बॉर्डर पार कराया। लेकिन जैसे ही एंट्री अमेरिका में हुई, तो आर्मी ने उसे पकड़ लिया। सितंबर में डिपोर्ट कर दिया यहां उनके पास कोई लीगल दस्तावेज नहीं थे। इसलिए उसे पकड़कर जेल में डाल दिया गया। यहां 8 महीने हिरासत में रहने के बाद उसे 11 सितंबर को डिपोर्ट दिया। पुलिस ने शिकायत पर एजेंटों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।


